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Electricity : बिजली कंपनियों का भी चुनाव कर सकेंगे ग्राहक, मानसून सत्र में पेश हो सकता है विधेयक

Fri, 17 Jun 2022 01:16 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली। 
एजेंसी, नई दिल्ली।  Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 17 Jun 2022 01:16 AM IST
सार

बिजली मंत्री आरके सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि इस विधेयक में बिजली कंपनियों को चुनने का विकल्प उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इससे इन कंपनियों की मनमानी पर रोक लगेगी। 

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Customers will also be able to choose power companies
Electricity - फोटो : पेक्सेल्स

विस्तार

विभिन्न सुविधाओं के अलावा ग्राहक दूरसंचार सेवा प्रदाताओं की तरह अब बिजली कंपनियों का भी चुनाव कर सकेंगे। यह संभव होगा बिजली (संशोधन) विधेयक-2021 से, जो जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में पेश हो सकता है।

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बिजली मंत्री आरके सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि इस विधेयक में बिजली कंपनियों को चुनने का विकल्प उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इससे इन कंपनियों की मनमानी पर रोक लगेगी।  उद्योग मंडल फिक्की के ‘इंडियन एनर्जी ट्रांसमिशन’ सम्मेलन-2022 में बिजली मंत्री ने कहा कि हर कोई (सभी मंत्रालय एवं संबंधित पक्ष) बिजली कानून में संशोधन चाहता है।
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इसमें प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए वितरण कारोबार को लाइसेंस मुक्त करने, हर आयोग में विधि से जुड़े व्यक्ति को सदस्य के रूप में शामिल करने, बिजली अपीलीय न्यायाधिकरण को मजबूत करने एवं ग्राहकों के अधिकारों-कर्तव्यों को निर्धारित करने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने उद्योग जगत से देश में ऊर्जा बदलाव में शामिल होने के लिए तैयार रहने को कहा।
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हरित हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए प्रोत्साहन
उन्होंने कहा कि बिजली के स्वच्छ स्रोत को बढ़ावा देने के लिए पवन ऊर्जा के मामले में अलग से नवीकरणीय खरीद बाध्यता (आरपीओ) होगी। इसके तहत बिजली वितरण कंपनियों और उत्पादकों से बिजली खरीदने वाले थोक खरीदारों को नवीकरणीय ऊर्जा का कुछ हिस्सा लेने की जरूरत होगी। आरपीओ नियमों को पूरा करने के लिए सीधे नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादकों से भी हरित ऊर्जा ले सकते हैं। उन्होंने देश में हरित हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए और प्रोत्साहन देने का संकेत दिया। 

7 लाख मेगावॉट का पा सकते हैं लक्ष्य
आरके सिंह ने कहा, अगर हरित हाइड्रोजन, ई-वाहन और सभी उद्योगों को हरित ऊर्जा आधारित बनाने का दृष्टिकोण हकीकत बनता है तो भारत 2030 तक 5 लाख मेगावॉट लक्ष्य के मुकाबले 7 लाख मेगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल कर सकता है। अब बिजली मांग का आधार 2.05 लाख मेगावॉट है। आने वाले दिनों में इसमें और वृद्धि होगी। 


आयात पर घटानी होगी निर्भरता
केंद्रीय बिजली सचिव आलोक कुमार ने ऊर्जा बदलाव के जरिये आयात पर निर्भरता घटाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने बड़े स्तर पर ग्रिड विस्तार परियोजना जारी रखने की योजना बनाई है। कोयला अगले 20 साल या उसके बाद भी बिजली उत्पादन का प्रमुख स्रोत बना रहेगा। बिजली मंत्रालय पीपीए (बिजली खरीद समझौते) में तापीय बिजली के साथ नवीकरणीय ऊर्जा को शामिल करने पर काम कर रहा है।

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