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मंदिरों में दिखने लगा नोटबंदी का असर, चढ़ावा रह गया आधा
सुरेंद्र मिश्र, मुंबई
Updated Tue, 22 Nov 2016 03:52 AM IST
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नोटबंदी का असर मंदिरों में भी दिखने लगा है। मुंबई के श्री सिद्धिविनायक मंदिर और शिर्डी के साईं मंदिर में शुरुआत में चढ़ावे की रकम दोगुनी हो गई थी, जिसमें कमी आई है। श्री साईंबाबा संस्थान ट्रस्ट ने तो दान काउंटरों से 500 और 1,000 के पुराने नोटों को लेना ही बंद कर दिया है। हालांकि मंदिरों की दानपेटियों से अब भी 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट निकल रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि मुंबई के श्री सिद्धिविनायक मंदिर में नोटबंदी की घोषणा के बाद 16 नवंबर को जब दानपेटियां खोली गईं तो इनसे 60 लाख रुपए से अधिक की रकम निकली। मंदिर ट्रस्ट के चेयरमैन नरेंद्र राणे ने बताया कि सात नवंबर से 15 नवंबर तक मिले दान में 500 के 3340 पुराने नोट और 1000 के 1060 पुराने नोट और नए 2000 के 90 नोट मिले। यानी बीते हफ्ते 500-1000 के नोटों के रूप में 27.50 लाख रुपये दान के तौर पर मिले हैं।
18 नवंबर को दान की राशि मात्र चार लाख ही रह गई। इसी तरह शिर्डी के साईंबाबा मंदिर में 11 नवंबर की हुई गणना में दान की रकम एक करोड़ 50 लाख 88 हजार रुपये थी। दान की यह रकम क्रमश: घटकर 18 नवंबर को 17 लाख 23 हजार रुपये पर सिमट गई।
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शक्तिपीठों में पुराने नोट चढ़ा गए श्रद्धालु
नोटबंदी के बाद हिमाचल प्रदेश के शक्तिपीठों में श्रद्धालु करीब 76 लाख के 500 और 1000 के पुराने नोट चढ़ा गए हैं। हालांकि मंदिर प्रशासन ने 500 और 1,000 के प्रचलन से बाहर हो चुके पुराने नोटों को लेना बंद कर चुका है। चिंतपूर्णी में सर्वाधिक 24.5 लाख की, नयनादेवी मंदिर में 27.86 लाख, ज्वालाजी में पांच लाख की जबकि बज्रेश्वरी मंदिर कांगड़ा में 10 लाख 98 हजार रुपये की पुरानी करेंसी चढ़ाई जा चुकी है। चामुंडा में तो 10 नवंबर तक ही सात लाख नौ हजार रुपये के पुराने नोट भक्त चढ़ा गए थे।
वैष्णो देवी और हरिद्वार में कम पहुंच रहे श्रद्धालु
नोटबंदी के बाद से मां वैष्णो देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में कमी आई है। यहां प्रतिदिन करीब 20 हजार भक्त पहुंचते थे, अब यह आंकड़ा 10 हजार के करीब ही रह गया है। श्राइन बोर्ड से दान की रशीद प्राप्त करने वालों की संख्या में भी कमी आई है। हरिद्वार के मंसा मंदिर, चंडी मंदिर, दक्ष मंदिर, माया मंदिर, काली मंदिरों में बीते दस दिनों में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भारी कमी आई है।
काशी विश्वनाथ मंदिर में नहीं दिखा नोटबंदी का असर
वाराणसी के बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर में नोटबंदी का असर नहीं दिखा है। बीते पांच दिन में हुंडियों की गिनती में 19.53 लाख रुपये चढ़ावे के रूप में आए हैं। करंसी में 500-1000 के नोट ज्यादा रहे हैं। वहीं मथुरा के ठाकुर बांके बिहारी मंदिर की पांच गुल्लकों से चालीस लाख रुपये निकले हैं। इनसे विदेशी मुद्रा के अलावा दो हजार के नए नोट भी निकल रहे हैं।
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उल्लेखनीय है कि मुंबई के श्री सिद्धिविनायक मंदिर में नोटबंदी की घोषणा के बाद 16 नवंबर को जब दानपेटियां खोली गईं तो इनसे 60 लाख रुपए से अधिक की रकम निकली। मंदिर ट्रस्ट के चेयरमैन नरेंद्र राणे ने बताया कि सात नवंबर से 15 नवंबर तक मिले दान में 500 के 3340 पुराने नोट और 1000 के 1060 पुराने नोट और नए 2000 के 90 नोट मिले। यानी बीते हफ्ते 500-1000 के नोटों के रूप में 27.50 लाख रुपये दान के तौर पर मिले हैं।
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18 नवंबर को दान की राशि मात्र चार लाख ही रह गई। इसी तरह शिर्डी के साईंबाबा मंदिर में 11 नवंबर की हुई गणना में दान की रकम एक करोड़ 50 लाख 88 हजार रुपये थी। दान की यह रकम क्रमश: घटकर 18 नवंबर को 17 लाख 23 हजार रुपये पर सिमट गई।
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शक्तिपीठों में पुराने नोट चढ़ा गए श्रद्धालु
नोटबंदी के बाद हिमाचल प्रदेश के शक्तिपीठों में श्रद्धालु करीब 76 लाख के 500 और 1000 के पुराने नोट चढ़ा गए हैं। हालांकि मंदिर प्रशासन ने 500 और 1,000 के प्रचलन से बाहर हो चुके पुराने नोटों को लेना बंद कर चुका है। चिंतपूर्णी में सर्वाधिक 24.5 लाख की, नयनादेवी मंदिर में 27.86 लाख, ज्वालाजी में पांच लाख की जबकि बज्रेश्वरी मंदिर कांगड़ा में 10 लाख 98 हजार रुपये की पुरानी करेंसी चढ़ाई जा चुकी है। चामुंडा में तो 10 नवंबर तक ही सात लाख नौ हजार रुपये के पुराने नोट भक्त चढ़ा गए थे।
वैष्णो देवी और हरिद्वार में कम पहुंच रहे श्रद्धालु
नोटबंदी के बाद से मां वैष्णो देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में कमी आई है। यहां प्रतिदिन करीब 20 हजार भक्त पहुंचते थे, अब यह आंकड़ा 10 हजार के करीब ही रह गया है। श्राइन बोर्ड से दान की रशीद प्राप्त करने वालों की संख्या में भी कमी आई है। हरिद्वार के मंसा मंदिर, चंडी मंदिर, दक्ष मंदिर, माया मंदिर, काली मंदिरों में बीते दस दिनों में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भारी कमी आई है।
काशी विश्वनाथ मंदिर में नहीं दिखा नोटबंदी का असर
वाराणसी के बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर में नोटबंदी का असर नहीं दिखा है। बीते पांच दिन में हुंडियों की गिनती में 19.53 लाख रुपये चढ़ावे के रूप में आए हैं। करंसी में 500-1000 के नोट ज्यादा रहे हैं। वहीं मथुरा के ठाकुर बांके बिहारी मंदिर की पांच गुल्लकों से चालीस लाख रुपये निकले हैं। इनसे विदेशी मुद्रा के अलावा दो हजार के नए नोट भी निकल रहे हैं।