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सीआरपीएफ: नक्सल इलाकों में अधिक हेलीपैड बनाने की योजना, बचाई जा सकेगी घायल जवानों की जिंदगी 

Tue, 15 Mar 2022 11:00 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Tue, 15 Mar 2022 11:00 PM IST
सार

सरकार ने कहा है कि पिछले कुछ वर्षों में देश में नक्सली हिंसा प्रभावित जिलों की संख्या 126 से घटकर 70 रह गई है और इसमें और कमी लाने की कोशिश हो रही है।

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CRPF planning to make helipad in Naxal hit areas for night landing
हेलिपैड बनाने की योजना - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से घायल जवानों की हवाई मार्ग से निकासी सीआरपीएफ के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। इससे निपटने के लिए सीआरपीएफ रात में लैंडिंग की सुविधा वाले और अधिक हेलीपैड बनाने पर विचार कर रहा है। नक्सलियों के खिलाफ अभियान के तहत केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने विभिन्न राज्यों में अपनी कुल ताकत (लगभग 1.20 लाख) का करीब 40 प्रतिशत जवानों को तैनात किया है।

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अति हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में कोबरा तैनात 
छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के कुछ अति हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में कमांडो बटालियन फॉर रेसोल्यूट एक्शन (कोबरा) जैसी विशेष जंगल युद्ध इकाइयां निर्णायक लड़ाई के लिए डेरा डाली हुई हैं। वरिष्ठ अधिकारियों व उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, सीआरपीएफ छत्तीसगढ़ (दक्षिण बस्तर) के घने जंगलों में कम से कम 30 नए अग्रिम संचालन अड्डे (एफओबी) स्थापित कर रहा है, जबकि झारखंड व बिहार में ऐसे आधा दर्जन स्थानों की तलाश हो रही है।
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सरकार ने कहा है कि पिछले कुछ वर्षों में देश में नक्सली हिंसा प्रभावित जिलों की संख्या 126 से घटकर 70 रह गई है और इसमें और कमी लाने की कोशिश हो रही है। नक्सल विरोधी अभियान में तैनात एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि दूर-दराज इलाकों में मुठभेड़ या आइईडी विस्फोट के दौरान घायल जवानों की हवाई निकासी सबसे महत्वपूर्ण होती है, ताकि उनकी जान बचाई जा सके।
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मौसम या तकनीकी कारणों से नहीं हो पाती हेलिकॉप्टर की लैंडिंग  
छत्तीसगढ़ में कोबरा इकाई के साथ काम करने वाली एक बटालियन के कमांडिंग आफिसर कहते हैं कि कई बार हेलीकॉप्टर के पायलट मौसम या अन्य तकनीकी कारणों से लैंडिंग या उड़ान भरने की सलाह नहीं देते, तब स्थिति मुश्किल हो जाती है। मौसम और प्रकाश की उपलब्धता दो सबसे महत्वपूर्ण कारक हैं, जिनके कारण हेलीकॉप्टरों के पहुंचने में या तो देरी हो रही है या उड़ानें रद कर दी गई हैं। इससे जवानों में भारी आक्रोश है। इसलिए, सीआरपीएफ अधिक हेलीपैड बनाने और उन्हें सुरक्षित व रोशन करने के तरीकों पर विचार कर रहा है, ताकि इन राज्यों के अंदरुनी क्षेत्रों में हेलीकॉप्टरों की लैंडिंग बढ़ाई जा सके। तीन राज्यों में सीआरपीएफ के सेक्टर कार्यालयों को यह काम सौंपा गया है।

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