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देश का सबसे बड़ा केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ', न केवल आतंकियों व नक्सलियों से लोहा लेता है, बल्कि कानून व्यवस्था को बनाए रखने और निष्पक्ष चुनाव कराने में भी अहम भूमिका अदा करता है। इसके परे भी इस 'बल' की एक खासियत है। वह है बल का 'सिविक एक्शन प्रोग्राम'। इसके तहत सीआरपीएफ, नक्सल प्रभावित इलाकों और घनघोर जंगलों में लोगों की कई तरीके से मदद करती है। बीमार लोगों का इलाज कराती है। कई जगहों पर बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और उनकी दिनचर्या से जुड़ी कई मुश्किल राहों को सुगम बनाती है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के बीजापुर में तर्रेम थाना क्षेत्र के अंतर्गत एफओबी चिन्नगेलूर में सीआरपीएफ ने मानवता की एक मिसाल कायम की है।
सीआरपीएफ ने नक्सल प्रभावित इलाके बीजापुर के तर्रेम थाना क्षेत्र के अंतर्गत फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस 'एफओबी' चिन्नगेलूर, स्थापित किया था। इस बेस पर सीआरपीएफ की 153वीं बटालियन तैनात है। नक्सलियों को खदड़ने के अलावा, बल के जवान यहां पर कई तरह से लोगों की मदद करते हैं। तीन दिसंबर को छत्तीसगढ़ में वोटों की गिनती चल रही थी। अत्यंत संवेदनशील, नक्सल प्रभावित व घनघोर जंगलों में सीआरपीएफ के जवान ग्रामीण लोगों की मदद के लिए सदैव तैयार रहते हैं। वोटों की गिनती के बीच 153वीं बटालियन को यह सूचना मिली कि निकटवर्ती गांव बडा तर्रेम (नदी पारा) में एक महिला, गंभीर तौर पर बीमार है, उसे इलाज नहीं मिल पा रहा है। कमांडर वैद्य संकेत के नेतृत्व में एक टीम गांव के लिए रवाना हो गई। वहां तक एंबुलेंस नहीं पहुंच सकती थी। इसके चलते जवानों ने एक चारपाई को उल्टा कर स्ट्रेचर बनाया। चूंकि उस जगह पर नक्सलियों के हमले का खतरा बना रहता है। नक्सलियों द्वारा घात लगाकर हमला करना या आईईडी के जरिए सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाना, ऐसी गुंजाइश सदा बनी रहती है।
जवानों द्वारा अत्यंत गंभीर हालत में कमली हेमला पत्नी विज्जा हेमला को सीआरपीएफ कैंप तक लाया गया। कैंप कमांडर योगेश के मार्गदर्शन में, 108 नंबर एंबुलेंस सेवा को कॉल किया गया। आधा दर्जन से अधिक जवानों ने चारपाई के स्ट्रेचर को लेकर करीब तीन किलोमीटर का सफर तय किया। प्राथमिक चिकित्सा मुहैया कराने के बाद महिला को एंबुलेंस के जरिए बासागुड़ा रवाना किया गया। कमांडेंट 153 बटालियन राजीव कुमार के मुताबिक, महिला की हालत स्थिर है। उसका इलाज चल रहा है। सीआरपीएफ को कहीं से भी ऐसी कोई सूचना मिलती है, तो वहां तुरंत बल की टीम को रवाना किया जाता है। ग्रामीणों को हर संभव मदद प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता को सीआरपीएफ दोहराती रहती है।