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CRPF: महिला अफसर का आईपीएस एडीजी पर यौन उत्पीड़न का आरोप, सीआरपीएफ ने किया ट्रांसफर तो हाईकोर्ट ने रोका

Thu, 25 Dec 2025 08:08 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Thu, 25 Dec 2025 08:08 PM IST
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CRPF Female officer accuses IPS ADG of harassment
CRPF - फोटो : Amar Ujala

देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' में तैनात एक महिला सहायक कमांडेंट 'एसी' ने आईपीएस 'एडीजी' पर कथित यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। हालांकि वह आईपीएस अब सीआईएसएफ में एडीजी पद पर तैनात बताए गए हैं। जब ये आरोप लगाए गए, तब आईपीएस अधिकारी, सीआरपीएफ के जम्मू सेक्टर में बतौर आईजी तैनात थे। महिला अधिकारी फिलहाल '88' बटालियन में तैनात हैं। सीआरपीएफ ने उनका तबादला, त्रिपुरा में स्थित बल की 124 बटालियन में कर दिया। इस तबादले के पीछे कोई 'शिकायत' बताई गई है। महिला अधिकारी ने अपने तबादले के विरोध में दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। जस्टिस सी. हरी शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की बैंच ने 24 दिसंबर को इस मामले की सुनवाई की। दिल्ली हाईकोर्ट ने तीन फरवरी 2026 तक सीआरपीएफ की महिला अधिकारी के तबादले पर रोक लगा दी है। 

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सीआरपीएफ मुख्यालय के एक जिम्मेदार अधिकारी 'डीआईजी' ने इस मामले की आधिकारिक पुष्टि की है। उनका कहना है कि महिला अधिकारी के खिलाफ शिकायत आई है। इसी आधार पर तबादला किया गया है। महिला अधिकारी ने 2014 से 2015 के बीच सीआरपीएफ के कादरपुर स्थित ट्रेनिंग अकादमी में प्रशिक्षण लिया था। यह ट्रेनिंग सेंटर, गुरुग्राम में स्थित है। उसके बाद महिला अधिकारी की तैनाती, 88 महिला बटालियन 'दिल्ली' में की गई। जिम्मेदार अधिकारी के मुताबिक, वे यहां पर लगभग पांच साल या उससे कुछ ज्यादा दिनों तक तैनात रहीं। इसके बाद उनका तबादला, जम्मू सेक्टर के उधमपुर स्थित 187 बटालियन में कर दिया गया। मई 2022 से लेकर मार्च 2023 तक वे यहां पर रहीं। करीब दस माह का कार्यकाल रहा। दोबारा से उनका तबादला, 88 महिला बटालियन में हुआ। यहां पर वे लगभग दो साल व आठ महीने तक रहीं। यहां से उनका तबादला, त्रिपुरा स्थित 124 बटालियन में किया गया। जिम्मेदार अधिकारी के अनुसार, शिकायत मिली थी, इसलिए महिला अफसर का तबादला किया गया है। बल के नियमानुसार, दिल्ली में उनका कुल कार्यकाल पूरा हो गया था। 
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हालांकि महिला अधिकारी का कहना था कि उनका कार्यकाल पूरा होने से पहले ही उन्हें यहां से त्रिपुरा भेजा गया है। महिला अधिकारी ने इस बाबत, बल के महानिदेशक तक अपनी बात पहुंचाई, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। दिल्ली हाईकोर्ट में लगाई गई याचिका में जो प्रार्थना की गई है, उसमें कई बातें कही गई हैं। अदालत ने कहा, पीड़िता की प्रार्थना को स्वीकार क्यों न किया जाए। इस संबंध में विभाग को तीन सताह में जवाब देना होगा। विभाग के जवाब देने के बाद अगर कोई रिजाइंडर फाइल करता है तो एक सप्ताह बाद उसका जवाब दिया जा सकता है। सुनवाई की अगली तिथि यानी तीन फरवरी 2026 तक ट्रांसफर पर स्टे रहेगा। महिला अधिकारी की तरफ से लगाई गई प्रार्थना में एक सर्विंग आईपीएस के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है। 
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2022 के दौरान आईपीएस अधिकारी, सीआरपीएफ के जम्मू सेक्टर में बतौर आईजी तैनात थे। महिला अधिकारी ने अदालत के समक्ष अपनी प्रार्थना में कहा है कि 29 अक्तूबर 2025 को को उसका ट्रांसफर आर्डर जारी किया गया। उन्होंने इसे पूरी तरह से अवैध और मनमाना बताया है। यह तबादला आदेश, सजा के तौर पर जारी किया गया है। यह संविधान के अनुच्छेद का 14, 16 और 21 का उल्लंघन है। यहां पर 'उत्प्रेषण रिट' जारी करने की प्रार्थना की गई है। 27 नवंबर 2014 के डीओपीटी के ओएम के रूल 6 (ए) और स्टेंडिंग आर्डर 2/2017 के पहरा 'डी' का हवाला भी दिया गया है। 
महिला अधिकारी की प्रार्थना में 'कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न' (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (पोश एक्ट) की बात कही गई है। यहां पर सेक्शन 12 के उल्लंघन का भी जिक्र है। प्रार्थना में कहा गया है कि तीन फरवरी 2023 का तबादला आदेश, उसके यौन उत्पीड़न की शिकायत के दौरान किया गया था। उस आदेश को गैर कानूनी 

घोषित किया जाए। महिला अधिकारी ने तीसरा रिलीफ इस आधार पर मांगा है कि उसके खिलाफ ऐसी कोई शिकायत है, जिसका उसे पता नहीं है। 22 फरवरी 2025 को शिकायत आई और 29 फरवरी को तबादला किया गया। डीआईजी 'सीआर/विजिलेंस' से पढ़ने योग्य और पूर्ण शिकायत की कॉपी, पीड़िता को दी जाए। बल के तत्कालीन आईपीएस आईजी, जम्मू सेक्टर के खिलाफ 2 अगस्त 2022 को शिकायत दी गई थी। उस शिकायत की जांच कर उसे डिस्पोज किया जाए। यानी मामले की निष्पक्ष जांच हो।   

दिल्ली हाईकोर्ट, राष्ट्रीय महिला आयोग को आदेश दे कि महिला अधिकारी की मदद करे। 'कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न' (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 का पालन हो। जिस अफसर पर आरोप हैं, वे प्रभावी अफसर हैं। केस को प्रभावित कर सकते हैं। बता दें कि अक्तूबर 2022 में 'सीआरपीएफ' की 187 बटालियन के तत्कालीन कमांडेंट को यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था। जम्मू-कश्मीर में उधमपुर पुलिस ने उनके खिलाफ आईपीएस की धारा 509, 354ए और 354डी के तहत केस दर्ज किया था। 

सीआरपीएफ ने भी इस मामले की जांच के आदेश जारी किए। आईजी सोनल मिश्रा की अध्यक्षता में दो सदस्यीय दल को केस की जांच सौंपी गई। दल की दूसरी सदस्य अपर्णा को बनाया गया था। उस वक्त जिस महिला अधिकारी ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था, वे भी 187 बटालियन में बतौर सहायक कमांडेंट तैनात रही हैं। अब उन्हीं का तबादला दिल्ली की 88 महिला बटालियन से त्रिपुरा में किया गया है। सीआरपीएफ जेएंडके जोन के तत्कालीन एसडीजी दलजीत सिंह ने कहा था, इस केस की जांच उधमपुर पुलिस कर रही है। विभागीय स्तर पर भी महिलाओं से जुड़े गम्भीर मामलों की जांच के लिए एक कमेटी बनाई गई है। 

सीआरपीएफ की 187 बटालियन, तब कई वजह से चर्चा में आ गई थी। बल के जिम्मेदार अफसरों के बीच एक पत्राचार हुआ था, जिसके चलते आईजी 'पर्स' ने जेएंडके जोन के स्पेशल डीजी को कई सिफारिशें की थीं। वहां तैनात डिप्टी कमांडेंट सरोज सिहाग और उनके पति सहायक कमांडेंट सतीश सिहाग का नाम भी उस पत्र में लिखा गया था। ये दोनों अफसर विभागीय जांच का सामना कर रहे थे। इन पर आरोप लगा था कि ये अपनी बटालियन में क्षेत्रवाद फैला रहे हैं। कमांडेंट सुरेंद्र राणा भी इनके प्रति सॉफ्ट रवैया रखते हैं। वजह, ये सभी अफसर हरियाणा से आते हैं। पत्र में लिखा था कि इन सबकी गतिविधियां, यूनिट का माहौल बिगाड़ रही थी। 


इसके बाद कथित तौर पर ऐसे आरोप भी लगे कि महिला सहायक कमांडेंट पर कमांडेंट, ज्यादा मेहरबानी दिखा रहे थे। ऐसी ही गलतफहमी के चलते सीओ की पत्नी ने वहां हंगामा कर दिया था। उसने आत्महत्या करने का प्रयास किया। आपात स्थिति के चलते सीओ राणा की छुट्टी मंजूर की गई। जवानों के बीच ऐसे माहौल को देखते हुए आईजी 'पर्स' ने सिफारिश की थी कि जल्द से जल्द सतीश सिहाग, सरोज सिहाग और महिला सहायक कमांडेंट का तबादला, जम्मू सेक्टर से बाहर कर दिया जाए। 

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