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'फेक न्यूज' के खिलाफ अमर उजाला की पहल, यूनिसेफ के साथ मिलकर किया कार्यशाला का आयोजन

Tue, 26 Jun 2018 05:07 AM IST
हर्षिता, अमर उजाला, नई दिल्ली
हर्षिता, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 26 Jun 2018 05:07 AM IST
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Critical Appraisal Skill Programme Workshop Organised By Amar Ujala In   Collaboration with UNICEF
यूनिसेफ की कम्यूनिकेशन ऑफिसर सोनिया सरकार और आईआईएमसी के महानिदेशक केजी सुरेश ने कार्यशाला का उद्घाटन किया
'सोशल मीडिया के बढ़ते दायरे की वजह से अफवाहों का बाजार भी फल फूल रहा है। इस वजह से हर तरफ डर और असुरक्षा का माहौल बन चुका है। इसे रोकना जरूरी है।' इन अल्फाज के साथ भारतीय जनसंचार संस्थान के महानिदेशक केजी सुरेश ने 'क्रिटिकल अप्रेजल स्किल प्रोग्राम' कार्यशाला का शुभारंभ किया। इस मौके पर यूनिसेफ की अधिकारी सोनिया सरकार भी मौजूद रहीं। अमर उजाला और यूनिसेफ की साझेदारी में आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य उद्येश्य स्वास्थ्य से जुड़ी खबरों और उनकी रिपोर्टिंग में संवेदनशीलता और प्रमाणिकता को बढ़ावा देना था। दो दिन तक चलने वाले वर्कशॉप के पहले दिन कई वक्ताओं ने अपनी बात रखी।
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यूनिसेफ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. भृगु कपूरिया ने कहा, 'भारत की गिनती उन देशों में होती है जहां बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाए जा रहे हैं। सालभर में करीब 26 मिलियन नवजातों को इसके तहत वैक्सीन लगाए जा रहे हैं। मगर बिना साक्ष्य के इसे लेकर ऐसी अफवाहें फैलाई जा रही हैं जिससे सरकार की ओर से चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान प्रभावित होते हैं।' प्रतिरक्षीकरण और टीकाकरण पर अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि टीका लगने के बाद बच्चे को बुखार होना लाजमी है, इसमें घबराने की जरूरत नहीं होती। 
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उन्होंने कहा, 'अफवाहों के अलावा लोगों के बीच जागरुकता की कमी भी टीकाकरण अभियान की बड़ी चुनौती है। टीका लगने के बाद स्वस्थ बच्चे को भी बुखार हो सकता है, मगर इससे उसे कोई नुकसान नहीं होता। फिर भी कई अभिभावक डर या जानकारी के अभाव में बच्चे को सारे टीके नहीं दिलवाते।' डॉक्टर कपूरिया ने बताया कि जन्म के पांच साल के भीतर बच्चे को सात बार टीका लगवाना चाहिए।
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कार्यशाला में मौजूद अमर उजाला के वरिष्ठ संपादक संजय अभिज्ञान ने कहा, 'कई बार दवा कंपनियां अपना प्रचार प्रसार करने के लिए फर्जी शोध करवाती हैं। लिहाजा, किसी भी अध्ययन, खास तौर से जो स्वास्थ्य संबंधी विषयों से जुड़े हों, उनके नतीजों को प्रकाशित करने से पहले पत्रकारों को अच्छी तरह उनकी पड़ताल करने की जरूरत है।' वर्कशॉप के दौरान उन्होंने प्रतिरक्षीकरण, एंटीबायोटिक दवाओं और मां-बच्चे के स्वास्थ्य से संबंधित विषयों पर सेशन को संबोधित किया।


'क्रिटिकल अप्रेजल स्किल प्रोग्राम' ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने थॉमसन रायटर्स फाउंडेशन और यूनिसेफ ने साथ मिलकर तैयार किया है। इस प्रोग्राम का मकसद पत्रकारों को स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारियों की विश्वसनीयता और प्रासंगिकता सुनिश्चित करने के लिए शोध और विश्लेषण के गुर सिखाना है। अमर उजाला ने अपने पत्रकारों के लिए नई दिल्ली में कार्यशाला का आयोजन किया।
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