Assam: शराब घोटाले के बाद इस मामले में बढ़ीं सिसोदिया की मुश्किलें, असम की अदालत में पेश होने का आदेश
दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के खिलाफ असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कामरूप जिले के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट में केस दर्ज कराया था। अब इसी मामले में कोर्ट ने मनीष सिसोदिया को 19 नवंबर को कोर्ट में पेश होने को कहा है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दिल्ली शराब घोटाले में ईडी और सीबीआई की जांच का सामना कर रहे दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। शराब घोटाले के बाद वे एक नए कानूनी मामले में फंसते नजर आ रहे हैं। दरअसल, असम के सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के खिलाफ कामरूप जिले के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट में केस दर्ज कराया था। इस मामले को लेकर ही सिसोदिया की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। असम के एडवोकेट जनरल देवजीत लोन सैकिया ने बताया कि असम सीएम द्वारा दर्ज कराए गए इस मामले में अदालत ने मनीष सिसोदिया को 19 नवंबर को कोर्ट में पेश होने के लिए कहा है।
गौरतलब है कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा ने इसी साल जून माह में दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के खिलाफ 100 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा दायर किया था। सिसोदिया ने रिंकी सरमा पर बाजार दरों पर पीपीई के ठेके देने में कदाचार का आरोप लगाया था। पहले तो असम सीएम और उनकी पत्नी ने इन आरोपों को खारिज किया था, लेकिन बाद में रिंकी भुइयां सरमा ने कामरूप मेट्रोपॉलिटन जिले के सिविल जज नंबर 1 की अदालत में मुकदमा दायर किया।
सिसोदिया में प्रेस कांफ्रेंस में लगाए थे आरोप
सिसोदिया ने 4 जून को नई दिल्ली में एक प्रेस मीट को संबोधित करते हुए रिंकी भुइयां सरमा की प्रतिष्ठा और स्थिति को नुकसान पहुंचाने वाले कुछ आरोप लगाए थे। सिसोदिया ने अनावश्यक रूप से मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का नाम भी विवाद में घसीटा था। सिसोदिया ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा था कि असम सरकार ने अन्य कंपनियों से 600 रुपये में व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण किट खरीदे, जबकि सरमा ने अपनी पत्नी और बेटे के व्यापारिक भागीदारों की फर्मों को 990 रुपये में तत्काल आपूर्ति के आदेश दिए।
दो पोर्टलों ने भ्रष्टाचार का किया था दावा
1 जून को डिजिटल मीडिया संगठनों, नई दिल्ली स्थित 'द वायर' और गुवाहाटी स्थित 'द क्रॉसकरंट' ने एक संयुक्त जांच रिपोर्ट में दावा किया था कि असम सरकार ने चार कोविड-19 संबंधित आपातकालीन चिकित्सा आपूर्ति आदेश दिए थे। सूचना के अधिकार के जवाबों की एक श्रृंखला का हवाला देते हुए इन पोर्टलों ने दावा किया कि 18 मार्च से 23 मार्च 2020 के बीच दिए गए सभी चार ऑर्डर रिंकी भुइयां सरमा और परिवार के व्यापारिक सहयोगी घनश्याम धानुका के स्वामित्व वाली तीन फर्मों को मिले थे।
एक ट्वीट में उसने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को पीपीई किट की आपूर्ति में किसी भी तरह की गड़बड़ी का खंडन किया था और कहा था कि उन्होंने एक पैसा भी नहीं लिया। असम सरकार और सरमा ने अलग-अलग सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का परिवार कदाचार में शामिल नहीं है और दो डिजिटल मीडिया द्वारा लगाए गए आरोपों को झूठा, काल्पनिक, दुर्भावनापूर्ण और निहित स्वार्थों का करार दिया। सरमा 2020 में भाजपा के नेतृत्व वाली पहली राज्य सरकार के दौरान स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री थे।
गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने खारिज कर दी अपील
इसके बाद दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने गुवाहाटी उच्च न्यायालय में एक अपील दाखिल की थी, जिसमें सिसोदिया ने उनके खिलाफ असम के मुख्यमंत्री द्वारा दायर मामले को रद्द करने की मांग की गई थी। हालांकि गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने मनीष सिसोदिया द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया।