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CP Radhakrishnan: तमिलनाडु में 93 दिनों में 19000 किमी का सफर, नदियों को जोड़ने की पहल; OBC समुदाय से आते हैं
Sun, 17 Aug 2025 10:20 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Sun, 17 Aug 2025 10:20 PM IST
सार
CP RadhaKrishnan: तमिलनाडु में जन्मे सीपी राधाकृष्णन गाउंडर- कोंगु वेल्लालर यानी ओबीसी समुदाय से आते हैं। वे तमिलनाडु से उपराष्ट्रपति बनने वाले वे तीसरे नेता होंगे। वे 1998 में पहली बार सांसद चुने गए और 2023 में बने झारखंड के राज्यपाल बने। उनकी पत्नी का नाम आर. सुमति है।
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सीपी राधाकृष्णन के बारे में जानें
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
तमिलनाडु के तिरुपुर में 4 मई, 1957 को जन्मे सीपी राधाकृष्णन को भाजपा के नेतृत्व वाले राजग ने उपराष्ट्रपति पद का साझा उम्मीदवार बनाया है। ओबीसी समुदाय से आने वाले 67 वर्षीय राधाकृष्णन वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं। इससे पहले वह करीब डेढ़ साल तक झारखंड के राज्यपाल रहे। झारखंड की जिम्मेदारी संभालते हुए राधाकृष्णन को तेलंगाना का राज्यपाल और पुडुचेरी का उपराज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था।
यह भी पढ़ें - CP Radhakrishnan: PM मोदी ने उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार राधाकृष्णन को दी बधाई, कहा- सेवा और सादगी उनकी पहचान
बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक और राजनीति
सीपी राधाकृष्णन ने बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक की पढ़ाई की। 16 साल की उम्र में वह आरएसएस के स्वयंसेवक के तौर पर सार्वजनिक जीवन में आए और 1974 में भारतीय जनसंघ की तमिलनाडु कार्यकारिणी में शामिल हुए। साल 1996 में उन्हें तमिलनाडु भाजपा का प्रदेश महासचिव बनाया गया। वह 1998 में कोयंबटूर से पहली बार लोकसभा पहुंचे और 1999 में दोबारा चुने गए। हालांकि, इसके बाद उन्हें लगातार तीन बार लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। सांसद रहते हुए उन्होंने कपड़ा मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष के तौर पर काम किया और कई अहम संसदीय समितियों के सदस्य भी रहे।
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2004-07 तक तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष
राधाकृष्णन साल 2004 में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने वाले भारतीय संसदीय दल का हिस्सा बने। वह ताइवान जाने वाले पहले संसदीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य भी रहे। वह 2004 से 2007 तक तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे। इस दौरान उन्होंने सभी भारतीय नदियों को जोड़ने, आतंकवाद को मिटाने, समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने, छुआछूत खत्म करने और नशे के खतरे से निपटने जैसी मांगों को लेकर 93 दिनों में 19 हजार किलोमीटर की रथ यात्रा निकाली।
यह भी पढ़ें - NDA Vice President Candidate: सीपी राधाकृष्णन होंगे एनडीए के उपराष्ट्रपति पद प्रत्याशी, जेपी नड्डा ने की घोषणा
2016 में कोच्चि जूट बोर्ड के अध्यक्ष बने
राधाकृष्णन को 2016 में कोच्चि के जूट बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। उनके नेतृत्व में जूट निर्यात 2,532 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। साल 2020 से 2022 तक वह केरल में भाजपा के अखिल भारतीय प्रभारी रहे। फरवरी 2023 में झारखंड के राज्यपाल बने और शुरुआती चार महीनों में ही 24 जिलों का दौरा किया। वह खेलों में भी सक्रिय रहे। क्रिकेट और वॉलीबॉल का भी उन्हें शौक है। वह अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, जापान और चीन समेत कई देशों की यात्रा कर चुके हैं।
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बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक और राजनीति
सीपी राधाकृष्णन ने बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक की पढ़ाई की। 16 साल की उम्र में वह आरएसएस के स्वयंसेवक के तौर पर सार्वजनिक जीवन में आए और 1974 में भारतीय जनसंघ की तमिलनाडु कार्यकारिणी में शामिल हुए। साल 1996 में उन्हें तमिलनाडु भाजपा का प्रदेश महासचिव बनाया गया। वह 1998 में कोयंबटूर से पहली बार लोकसभा पहुंचे और 1999 में दोबारा चुने गए। हालांकि, इसके बाद उन्हें लगातार तीन बार लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। सांसद रहते हुए उन्होंने कपड़ा मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष के तौर पर काम किया और कई अहम संसदीय समितियों के सदस्य भी रहे।
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2004-07 तक तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष
राधाकृष्णन साल 2004 में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने वाले भारतीय संसदीय दल का हिस्सा बने। वह ताइवान जाने वाले पहले संसदीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य भी रहे। वह 2004 से 2007 तक तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे। इस दौरान उन्होंने सभी भारतीय नदियों को जोड़ने, आतंकवाद को मिटाने, समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने, छुआछूत खत्म करने और नशे के खतरे से निपटने जैसी मांगों को लेकर 93 दिनों में 19 हजार किलोमीटर की रथ यात्रा निकाली।
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2016 में कोच्चि जूट बोर्ड के अध्यक्ष बने
राधाकृष्णन को 2016 में कोच्चि के जूट बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। उनके नेतृत्व में जूट निर्यात 2,532 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। साल 2020 से 2022 तक वह केरल में भाजपा के अखिल भारतीय प्रभारी रहे। फरवरी 2023 में झारखंड के राज्यपाल बने और शुरुआती चार महीनों में ही 24 जिलों का दौरा किया। वह खेलों में भी सक्रिय रहे। क्रिकेट और वॉलीबॉल का भी उन्हें शौक है। वह अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, जापान और चीन समेत कई देशों की यात्रा कर चुके हैं।
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