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वैज्ञानिकों ने कहा, 'सलाइवा टेस्टिंग' से सस्ते दाम पर और जल्द मिलेंगे कोरोना के नतीजे

Sat, 22 Aug 2020 03:06 PM IST
अनवर अंसारी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: अनवर अंसारी Updated Sat, 22 Aug 2020 03:06 PM IST
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COVID-19 saliva diagnosis cheaper faster alternative to swab testing, say scientists
कोरोना की जांच के लिए नमूना एकत्र करता एक स्वास्थ्य कर्मी। - फोटो : PTI

कोरोना वायरस की टेस्टिंग को लेकर वैज्ञानिकों ने एक नए तरीके के बारे में बताया है। इसमें कम लागत वाला लार (सलाइवा) टेस्ट किया जाएगा और लोग इसके लिए खुद के नमूनों को बिना किसी परेशानी के इकट्ठा कर पाएंगे। कोरोना टेस्टिंग के इस तरीके से आसानी से कोविड-19 का पता लगाया जा सकता है।

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वैज्ञानिकों ने कहा कि टेस्टिंग का यह तरीका तेजी से और अधिक सटीक परिणाम देगा और स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा नमूना एकत्र करने के दौरान होने वाले जोखिमों को भी कम करेगा। फिलहाल, भारत में इस तरीके का प्रयोग नहीं किया जा रहा है, लेकिन इस बात की उम्मीद है कि जल्द ही इस तरीके से टेस्टिंग की जाएगी। 
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लार आधारित इस कोरोना टेस्टिंग में नासोफेरींजल स्वैब विधियों के आधार पर जांच की जाएगी। इसकी मदद से लोग स्वयं के नमूनों को आसानी से एकत्र कर सकते हैं, उन्हें इसके लिए एक ट्यूब में लार गिरानी होगी और टेस्टिंग के लिए लैब भेजना होगा। 
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यह भी पढ़ें: भारत में कोरोना रिकवरी रेट दुनिया में सबसे बेहतर, ये वायरस लड़ने में बड़ी उपलब्धि: स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन

चेन्नई के एलएंडटी माइक्रोबायोलॉजी रिसर्च सेंटर के वरिष्ठ एसोसिएट प्रोफेसर एआर आनंद ने कहा, यह एक अनोखा तरीका है क्योंकि इसमें एक अलग न्यूक्लिक एसिड (आरएनए) एक्सट्रेक्शन स्टेप की जरूरत नहीं होती है। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एक्सट्रेक्शन किट्स की पहले कमी देखी जा रही थी। 

आनंद ने लार टेस्टिंग को आसान तरीके मानते हुए कहा, इस टेस्ट के लिए कुछ अभिकर्मकों और एक रियल टाइम पोलीमरेज चेन रिएक्शन (आरटी-पीसीआर) मशीन की आवश्यकता है।


इस सप्ताह अमेरिकी खाद्य और औषधि प्रशासन (एफडीए) ने येल स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी को ‘सालिवडायरेक्ट’ कोविड-19 टेस्टिंग की मंजूरी दी। एफडीए की मंजूरी के बाद इस नई प्रौद्योगिकी पर चर्चा तेज हो गई है। 

हालांकि भारत में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के लिए लार टेस्टिंग को मंजूरी दी जानी बाकी है, लेकिन आनंद जैसे वैज्ञानिकों का सुझाव है कि इस मामले को और आगे बढ़ाया जाए।

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