कोरोना संक्रमण पर काबू पाने के लिए क्या हड़बड़ी में है सरकार?
- आनन फानन में दी गई विदेशी टीकों की अनुमति
- देश को संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि लॉकडाउन अंतिम विकल्प
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कोरोना से हालात बेकाबू हो रहे हैं।सरकार अब इससे निबटने के लिए सक्रिय हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार सक्रियता दिखानी शुरू की है और निर्माण भवन में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में इसकी तेजी साफ दिखाई दे सकती है। आनन-फानन में बिना समय गंवाए केंद्र सरकार ने तीन बड़े निर्णय ले लिए। गृहमंत्री अमित शाह ने जहां राज्यों को जरूरत पड़ने पर लॉकडाउन लगाने का अधिकार दे दिया है, वहीं अब देश में कोई भी डब्ल्यूएचओ से मान्यता प्राप्त वैक्सीन को लगवा सकता है। खुद अमित शाह ने भी कहा कि डब्ल्यूएचओ से मान्यता प्राप्त वैक्सीन को अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है।
संक्रमण को लेकर बढ़ते दबाव में केंद्र सरकार के यह निर्णय पूरी तरह से जल्दबाजी में लिए गए हैं। दो दिन पहले वैक्सीन को लेकर अमर उजाला डॉट कॉम से विशेष बातचीत में नेशनल कोविड टास्क फोर्स, आईसीएमआर के अध्यक्ष डॉ. नरेन्द्र कुमार अरोड़ा ने साफ कहा था कि हम इस तरह से किसी विदेशी वैक्सीन को देश में टीका लगाने की इजाजत नहीं दे सकते। उन्होंने बताया कि रूस की स्पूतनिक वी को भी क्लीनिकल ट्रायल और परीक्षण के बाद ही अनुमति दी जाएगी। डॉ. अरोड़ के अनुसार विदेशी वैक्सीन वहां के लोगों, जलवायु, प्रभाव के आधार पर बनी है। इसे अपने यहां बिना परीक्षण के सीधे इस्तेमाल की इजाजत नहीं दी जा सकती। डॉ. अरोड़ा के जवाब में उनकी हड़बड़ी भी दिखाई दे रही थी। उन्होंने साफ कहा कि जिस प्रक्रिया से स्पूतनिक को अनुमति दी है, उसी तरह से ही अन्य विदेशी वैक्सीन को भी अनुमति दी जाएगी। लेकिन इस दौरान गृह मंत्री अमित शाह का बयान आया है कि जिस वैक्सीन को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अनुमति दे दी है, उसे अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है।
अब सरकार बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट को देगी आर्थिक मदद
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के आदार पूनावाला ने पिछले महीने ही संसधनों की कमी का हवाला देकर 3000 करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की मांग की थी। कोविड-19 टास्क फोर्स से जुड़े सदस्य मानते हैं कि इसमें निर्णय लेने में केंद्र सरकार के स्तर पर कुछ विलंब हुआ। बताते हैं इसका निर्णय 19 अप्रैल को हो पाया है। अब केंद्र सरकार बायोटेक और सीरम दोनों को 4500 करोड़ रुपये का आर्थिक सहायता प्रदान करेगी। ताकि देश में टीके की आपूर्ति लगातार बनी रहे।
अध्ययन के बाद दिया गया 18 साल से ऊपरवालों को टीकाकरण की अनुमति
कोविड-19 टास्क फोर्स के एक सदस्य का कहना है कि 18 साल से ऊपर के लोगों को एक मई से वैक्सीन लगाने की अनुमति हड़बड़ी में नहीं दी गई है। सूत्र का कहना है कि पहले चरण की लहर में मृत्यु के अधिकतम मामले 45 साल से अधिक की उम्र वालों के थे। लेकिन दूसरी लहर में पाया गया कि 45 साल से कम आयु के लोग तेजी से कोरोना के संक्रमण से जान गंवा बैठे हैं। इसलिए केंद्र सरकार ने सभी वायरस के खिलाफ सेफ गार्ड देने का निर्णय किया है। हालांकि सूत्र का कहना है कि यह निर्णय दो-तीन सप्ताह पहले लेना चाहिए था।
बताते हैं मौजूदा समय में देश में 60 हजार से अधिक टीकाकरण केंद्र हैं। कोविड टास्क फोर्स के अध्यक्ष डा. अरोड़ा का कहना है कि इन केन्द्रों पर प्रतिदिन एक करोड़ लोगों को टीका लगाया जा सकता था, लेकिन टीका लगवाने के लिए एक दिन में अधिकतम 25 लाख लोग तक ही आगे आ सके। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी कहना है कि हम 45 साल से कम उम्र के लोगों को इसमें शामिल कर लेते तो अब तक काफी लोगों को टीका लग गया होता। टीका की कमी के बारे में सूत्रों का कहना है कि इसके प्रबंधन, समन्वय में कुछ खामियां हैं। उसे दूर किया जा रहा है, लेकिन टीका उपलब्ध है। अभी इसकी कमी नहीं है।
टीका लगवाने वालों में मौत के मामले इक्का-दुक्का
नेशनल कोविड टास्क फोर्स के अध्यक्ष तो कहते हैं कि उन्हें टीका लगवाने वाला कोई संक्रमित मृत्यु का शिकार हुआ नहीं लगता। उनके पास इस तरह के कोई आंकड़े नहीं हैं। सिल्वर लाइन हास्पिटल के एमडी डा. बिनोद बिहारी चौबे कहते हैं कि यह सही नहीं है। हालांकि बिनोद बिहारी चौबे मानते हैं कि जिन लोगों को टीका लगे कुछ दिन हो गया है, उनमें संक्रमण की तीव्रता घातक स्तर पर नहीं पहुंच रही है। वह सामान्य लोगों की तुलना में आसानी से ठीक किए जा सकते हैं।
यह कोई अंतिम टीका या कोरोना की दवा नहीं, जानिए फिर आगे क्या होगा
कोरोना का दुनिया के देशों में मौजूद कोई भी टीका इस महामारी का इलाज नहीं है। न यह महामारी की दवा है और न ही अभी तक कोई निर्धारित प्रेक्रिप्शन खोजा जा सका है। नेशनल कोविड टास्क फोर्स के अध्यक्ष डॉ. अरोड़ा, मैक्स, वैशाली के डॉ. अश्विन चौबे, एम्स के डॉ. आनंद कृष्णन समेत सभी का मानना है कि इस मौजूदा टीका की दो खुराक से कुछ खास नहीं होने वाला है। कोरोना वायरस के नए वैरिएंट अभी आएंगे, यह म्यूटेशन करेगा। हर टीके की एक मियाद होती है। इसलिए मियाद खत्म होने के बाद फिर टीका लगवाना होगा या फिर टीके की तीसरी डोज लगेगी। स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्र का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महामारी को लेकर तमाम शोध चल रहे हैं। संभव है कि तबतक इसकी कोई निर्धारित दवा आ जाए। इसलिए जबतक कोई दवा नहीं आती तबतक के लिए यह टीका केवल सेफगार्ड का काम करेगा। संक्रमण की तीव्रता को कम करेगा।