फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Courts should work like Lord Krishna to protect women Karnataka High Court said

महिलाओं की सुरक्षा के लिए अदालतें भगवान कृष्ण जैसा करें काम: कर्नाटक हाईकोर्ट

Sat, 12 Sep 2020 04:04 AM IST
Kuldeep Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलुरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलुरू Published by: Kuldeep Singh Updated Sat, 12 Sep 2020 04:04 AM IST
विज्ञापन
Courts should work like Lord Krishna to protect women Karnataka High Court said
महिलाओं ने अदालतों से की सुरक्षा की मांग - फोटो : सांकेतिक तस्वीर

जिस तरह से महाभारत में भगवान कृष्ण ने धर्म की रक्षा की थी, वैसे ही अदालतों को भी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए काम करना चाहिए। कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस बी वीरप्पा और जस्टिस ईएस इंदिरेश की पीठ ने एक मामले की सुनवाई में यह अहम टिप्पणी की। पीठ ने कहा, पीढ़ी दर पीढ़ी महिलाओं के खिलाफ अन्याय होता देखकर अदालतें मूक दर्शक की तरह नहीं बनी रह सकती हैं।

विज्ञापन


पीठ ने कहा, पीढ़ी दर पीढ़ी महिलाओं के खिलाफ अन्याय के प्रति मूक दर्शक नहीं बनी रह सकती हैं अदालतें
हाईकोर्ट ने इसी के साथ 2013 में 69 वर्षीय महिला से दुष्कर्म के दोषी की सजा के खिलाफ अपील खारिज कर दी। पीठ ने कहा, अब वक्त आ गया है कि कोर्ट को एक अभिभावक की तरह बर्ताव करना चाहिए और महिलाओं की सुरक्षा के क्रम में धर्म की रक्षा करनी चाहिए। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत यह रक्षा की जानी चाहिए और दुष्कर्मियों समेत इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्ती से पेश आना चाहिए। आठ सितंबर को दिए आदेश में कोर्ट ने भगवद्गीता के दो श्लोकों का जिक्र भी किया।
विज्ञापन


निचली अदालत के सात साल जेल की सजा का फैसला बरकरार
पीठ के समक्ष दुष्कर्म के दोषी ने सजा के खिलाफ अपील की थी, जिसे दक्षिण कन्नड़ की जिला अदालत ने 14 नवंबर, 2014 को सुनाई थी। अपराध के वक्त दोषी 24 साल का था। कोर्ट ने उसे 69 वर्षीय बुजुर्ग महिला से दुष्कर्म का दोषी पाया था, जिसे वह दादी कहा करता था। दोषी युवक ने इस घिनौनी वारदात को अंजाम देने के साथ ही 55,000 रुपये भी लूट लिए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

दोषी के वकील ने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि उसके मुवक्किल के खिलाफ सुबूत से यह साबित नहीं होता कि वह अपराध में शामिल था। हालांकि, हाईकोर्ट ने निचली अदालत के दोषी को सात साल के सश्रम कारावास की सजा के फैसले को बरकरार रखते हुए उसकी अपील खारिज कर दी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed