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माणिकराव कोकाटे को बड़ा झटका: नासिक कोर्ट ने दो साल की सजा रखी बरकरार, 1995 के धोखाधड़ी मामले में बड़ा फैसला

Tue, 16 Dec 2025 11:18 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नासिक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नासिक Published by: पवन पांडेय Updated Tue, 16 Dec 2025 11:18 PM IST
सार

महाराष्ट्र के मंत्री माणिकराव कोकाटे से जुड़े 1995 के धोखाधड़ी मामले में नासिक कोर्ट ने दो साल की सजा रखी बरकरार है। माणिकराव कोकाटे सत्तारूढ़ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता हैं और वर्तमान में महाराष्ट्र सरकार में खेल मंत्री हैं। नासिक अदालत के इस फैसले को उनके और पार्टी, दोनों के लिए अहम झटका माना जा रहा है।

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Court upholds Maharashtra minister Kokate's 2-year jail term in 1995 cheating, forgery case
माणिकराव कोकाटे, मंत्री, महाराष्ट्र - फोटो : ANI

विस्तार

महाराष्ट्र के खेल मंत्री माणिकराव कोकाटे को एक पुराने मामले में बड़ा झटका लगा है। नासिक जिले की अदालत ने 1995 के धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में उन्हें सुनाई गई दो साल की जेल की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि सरकारी कोटे से लिया गया फ्लैट नियमों के अनुसार नहीं था और इस प्रक्रिया में राज्य सरकार के साथ धोखा हुआ।
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क्या है पूरा मामला?
मामला वर्ष 1995 का है। आरोप है कि माणिकराव कोकाटे और उनके भाई विजय कोकाटे ने सरकारी 10% विवेकाधीन कोटे के तहत नासिक के येओलकर माला (कॉलेज रोड) इलाके में कम आय वर्ग (एलआईजी) के लिए बने दो फ्लैट हासिल किए। पात्र बनने के लिए उन्होंने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज जमा किए और खुद को एलआईजी श्रेणी का बताते हुए यह भी दावा किया कि उनके पास शहर में कोई मकान नहीं है।
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मामले में अदालत का फैसला
फरवरी 20 को मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दोनों भाइयों को दोषी ठहराते हुए दो साल की कैद और 50-50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके बाद अपील पर मार्च 5 को सत्र अदालत ने सजा पर अस्थायी रोक लगा दी थी और जमानत मंजूर की थी। मंगलवार को नासिक जिला एवं सत्र न्यायाधीश पीएम. बदर ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए सजा बरकरार रखी और कहा कि फ्लैट का आवंटन नियमों के खिलाफ था।

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अन्य आरोपियों को राहत, शिकायत और जांच
इस मामले में कुल चार लोगों पर आरोप थे। माणिकराव कोकाटे और उनके भाई को दोषी ठहराया गया, जबकि दो अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया। यह मामला पूर्व मंत्री टी. एस. दिघोले की शिकायत पर दर्ज हुआ था। शिकायत के बाद नासिक के सरकारवाड़ा पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया।

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