फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Court should not hurry in divorce cases says Supreme Court

शादी तोड़ने में अदालत को जल्दबाजी नहीं दिखानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

Mon, 21 Oct 2019 10:41 PM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Mon, 21 Oct 2019 10:41 PM IST
विज्ञापन
Court should not hurry in divorce cases says Supreme Court
प्रतीकात्मक तस्वीर

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा है कि अदालत को शादी तोड़ने में जल्दबाजी नहीं दिखानी चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा है कि यह रिश्ता बहुत नाजुक होता है। शीर्ष अदालत ने शादी के तीन वर्ष बाद शादी तोड़ने की सोच बैठे पति-पत्नी को पेश होने का आदेश दिया है। जस्टिस एन वी रमन्ना और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने कहा है कि शादी तोड़ने को लेकर अदालती आदेश हर मामले में एक समान लागू नहीं होते। 

विज्ञापन


हर मामले के तथ्य अलग-अलग होते हैं। यह एक नाजुक रिश्ता होता है। इस संबंध को तोड़ने के लिए हालात और तथ्यों पर गौर करना होता है। वास्तव में शादी के महज तीन वर्ष बाद ही पति-पत्नी ने अलग होने का निर्णय ले लिया। पति पेशे से डॉक्टर है। उनकी ओर से फैमली कोर्ट में तलाक की अर्जी लगाई। दोनों फटाफट तलाक चाहते हैं लिहाजा उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को मध्स्थता के लिए भेजा।
विज्ञापन


सोमवार को मध्यस्थकार ने पीठ को बताया कि इस मामले में पति-पत्नी के रिश्ते में सुधार होने की संभावना कम है। वहीं लड़के की ओर से पेश वकील ने कहा से कहा कि कूलिंग ऑफ पीरियड को खत्म कर दिया जाए और तलाक जल्द मंजूर की जाए। इस पर पीठ ने कहा कि अदालत को शादी तोड़ने में जल्दबाजी नहीं दिखानी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि तलाक से पहले छह महीने के कूलिंग ऑफ पीरियड का प्रावधान है, जिससे कि शादी तोड़ने से पहले पति-पत्नी को अपने रिश्ते को बचाने का नए सिरे से प्रयास कर सके। पीठ ने कहा कि इस कानून को हम नहीं बदल सकते। जिसपर वकील ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि अगर पति-पत्नी के बीच संबंध सुधरने की तनिक भी गुंजाइश न हो तो इस संबंध को लंबा खींचने का कोई मतलब नहीं है। 


इसपर पीठ ने कहा कि हर मामले के तथ्य और हालात अलग-अलग होते हैं। हमें हर मामले को अलग तरीके से देखना चाहिए। एक आदेश, हर मामलों पर लागू नहीं होता। इसके बाद पीठ ने यह जानना चाहा कि क्या पति-पत्नी अदालत में मौजूद हैं? वकील ने बताया कि फिलहाल अभी पति मौजूद है। जिसके बाद पीठ ने सुनवाई की अगली तारीख पर पति व पत्नी को पेश होने के लिए कहा है। अदालत पति-पत्नी से खुद बात करना चाहती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed