{"_id":"5bfbb485bdec22414f5780c6","slug":"court-asks-the-center-challenge-a-section-of-the-corruption-prevention-law-act","type":"story","status":"publish","title_hn":"भष्टाचार रोकथाम कानून की एक धारा को चुनौती : न्यायालय ने केंद्र से मांगा जवाब","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
भष्टाचार रोकथाम कानून की एक धारा को चुनौती : न्यायालय ने केंद्र से मांगा जवाब
भाषा, नई दिल्ली
Updated Mon, 26 Nov 2018 02:23 PM IST
विज्ञापन
supreme court
- फोटो : PTI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केंद्र से उस याचिका पर जवाब मांगा है जिसमें भ्रष्टाचार निरोधी कानून के एक प्रावधान की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है।
विज्ञापन
भ्रष्टाचार रोकथाम कानून की धारा 17 ए के तहत भ्रष्टाचार के मामले में किसी भी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले अनिवार्य रूप से मंजूरी लेनी होती है।
विज्ञापन
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की पीठ ने उक्त कानून की संशोधित धारा 17 ए की वैधता के खिलाफ गैर सरकारी संगठन सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (सीपीआईएल) की जनहित याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी कर उससे जवाब मांगा।
विज्ञापन
संगठन की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि संशोधित प्रावधान के तहत सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में जांच शुरू करने से पहले उनके नियोक्ता प्राधिकार की मंजूरी लेनी अनिवार्य है। पीठ ने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि आप सुने जाने के हकदार हैं और इसलिये हमने नोटिस जारी किया है।’’