खुलासा: पांच राज्यों में पहली बार मिले देश के आधे टीबी रोगी, दो लाख से ज्यादा गायब
- पहली बार साल 2019 में 24 लाख से ज्यादा मरीज आए सामने
- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने टीबी पर वार्षिक रिपोर्ट की जारी
विस्तार
देश में पहली बार टीबी के सर्वाधिक मरीज सामने आए हैं। हालांकि, इनमें से आधे मरीज पांच राज्यों में ही मिले हैं। बुधवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इंडिया टीबी रिपोर्ट-2020 को जारी किया। इसमें बताया गया कि दो लाख से ज्यादा टीबी मरीज गुमशुदा हैं। जबकि, 1.3 लाख मरीज पंजीयन के बाद दोबारा अस्पताल ही नहीं पहुंचे।
केंद्र के अनुमान के अनुसार देश में टीबी के 26.9 लाख मरीज हो सकते हैं लेकिन वर्ष 2019 में 24.04 लाख मरीजों की पहचान हो सकी। हालांकि, पिछले वर्षों की तुलना में यह आंकड़ा 12 फीसदी अधिक है। इनमें से 94.4 फीसदी मरीजों का पिछले वर्ष ही उपचार शुरू हो चुका है।
जबकि वर्ष 2018 में 21.02 लाख मरीज मिले थे और उपचार सफलता दर 80 फीसदी दर्ज की गई थी। टीबी रोग को लेकर बीते कुछ वर्षों में बजट भी काफी बढ़ाया गया है। वर्ष 2016-17 में स्वीकृत 640 से बढ़कर वर्ष 2019 में 3333 करोड़ रुपये दिया गया है।
वर्ष 2019 में 79,144 मरीजों की टीबी के चलते मौत हुई है। जबकि 14,318 मरीजों में उपचार का असर देखने को नहीं मिला है। टीबी के कुल मरीजों में 1,51,286 बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा एमडीआर और आरआर टीबी के 66,255 रोगियों में से 56,569 को उपचार दिया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार पांच राज्य उत्तर प्रदेश 20, महाराष्ट्र 9, मध्यप्रदेश आठ और राजस्थान व बिहार में सात फीसदी मरीज मिले हैं। इसके अलावा वर्ष 2018 की तुलना में प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों की पहचान होने से संख्या में बढ़ोतरी हुई है।
मंत्रालय के अनुसार हिमाचल प्रदेश ने 2021, सिक्किम व लक्षद्वीप ने 2020 और बिहार, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, मध्यप्रदेश, पुड्डूचेरी और तमिलनाडु ने 2025 में टीबी मुक्त होने का लक्ष्य रखा है। जबकि केरल का लक्ष्य इसी वर्ष टीबी मुक्त होने का है।
कोरोना के कारण लगभग 95 हजार अतिरिक्त मौतें टीबी से
‘यूरोपियन रेस्पिरेटरी जर्नल’ में बुधवार को प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार अगले पांच वर्षों में भारत में लगभग 95,000 अतिरिक्त मौतें टीबी के कारण हो सकती हैं। क्योंकि कोरोना वायरस महामारी का स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ा है। अध्ययन के अनुसार कोरोना महामारी टीबी के वैश्विक बोझ को काफी बढ़ा सकती है। अध्ययन के अनुमान के मुताबिक, स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर और मजबूत नहीं किया जाता है, तो भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका में टीबी से कम से कम 110,000 अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं।