इन देशों में भी है हाइवे पर फाइटर जेट उतारने की सुविधा, जानिए क्यों है इसकी जरूरत
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इंडियन एयरफोर्स ने आज (24 अक्टूबर) आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर 20 फाइटर जेट उतारे। इससे पहले मई 2016 में यमुना एक्सप्रेस वे पर एयरफोर्स के मिराज 2000 फाइटर प्लेन ने टच डाउन किया था। अब भारत उन देशों की लिस्ट में शामिल हो गया है जो युद्ध या किसी भी आपातकालीन स्थिति में अपने देश के हाइवे को फाइटर जेट का रनवे बना सकते हैं। भारत आने वाले वक्त में देश के और हाइवेज को भी इस लायक बनाने की कोशिश में है, फिलहाल आज का कार्यक्रम एयरफोर्स और राज्य सरकार ने मिलकर करवाया था।
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इंडियन एयरफोर्स ने आज (24 अक्टूबर) आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर 20 फाइटर जेट उतारे। इससे पहले मई 2016 में यमुना एक्सप्रेस वे पर एयरफोर्स के मिराज 2000 फाइटर प्लेन ने टच डाउन किया था। अब भारत उन देशों की लिस्ट में शामिल हो गया है जो युद्ध या किसी भी आपातकालीन स्थिति में अपने देश के हाइवे को फाइटर जेट का रनवे बना सकते हैं। भारत आने वाले वक्त में देश के और हाइवेज को भी इस लायक बनाने की कोशिश में है, फिलहाल आज का कार्यक्रम एयरफोर्स और राज्य सरकार ने मिलकर करवाया था।
एक्सप्रेसवे पर IAF का शक्ति प्रदर्शन, सुपर हरक्यूलिस लैंड, मिराज ने किया टचडाउन
आज की ड्रिल में C-130 सुपर हरक्यूलिस, मिराज 2000, AN-32 और सुखोई MKi शामिल थे। दुनिया में सबसे पहले यह कारनामा नाजी जर्मनी ने द्वितीय विश्व युद्ध के वक्त किया था। उसके बाद बाकी देशों ने इसे आजमाया।
पाकिस्तान ने 2010 में लैंड करवाया था मिराज
पाकिस्तान ने दो बार अपने हाइवे का इस्तेमाल फाइटर जेट को उतारने के लिए किया। पहली बार यह काम साल 2000 में F-7P के साथ किया गया और फिर 2010 में मिराज III को उतारा गया था। वहीं चीन ने यह ड्रिल सबसे पहले 1989 में की थी और उसके बाद देश के विभिन्न हिस्सों मे इसे किया गया था।
इसकी जरूरत क्या है?
ऐसे हाइवे कम से कम दो से 3.5 किलोमीटर लंबे होते हैं, इनको बाकी सड़कों से मोटा और मजबूत भी होना चाहिए। आपातकालीन स्थिति में किसी एक्सप्रेसवे को रनवे बनाने में 24 से 48 घंटे का वक्त लगता है। किसी जेट को उतारने से पहले उस हाइवे के सारे गड्ढों को भरना होता है ताकि कोई हादसा ना हो जाए।