कोरोना से जंग की रणनीति: एकजुट होकर निभाएं जिम्मेदारी... तभी जीतेंगे हम
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कोरोना पीड़ित मरीजों और मृतकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार ने रणनीति बना ली है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अलग-अलग मापदंड के हिसाब से काम की नियमावली और दिशा-निर्देश तैयार किए हैं। हालात बेकाबू होने पर इस रणनीति पर अमल करके उन्हें संभाला जाएगा। मंत्रालय खुद मान रहा है कि कोरोना अधिकतर राज्यों में फैल चुका है और देश के करीब 211 जिले इसकी चपेट में हैं। आने वाले समय में इसके फैलने का खतरा बहुत अधिक है।
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कोरोना पीड़ित मरीजों और मृतकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार ने रणनीति बना ली है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अलग-अलग मापदंड के हिसाब से काम की नियमावली और दिशा-निर्देश तैयार किए हैं। हालात बेकाबू होने पर इस रणनीति पर अमल करके उन्हें संभाला जाएगा। मंत्रालय खुद मान रहा है कि कोरोना अधिकतर राज्यों में फैल चुका है और देश के करीब 211 जिले इसकी चपेट में हैं। आने वाले समय में इसके फैलने का खतरा बहुत अधिक है।
यह तैयारी : स्थानीय स्तर पर
- संक्रमित के मरीजों और उनके संपर्क में आने वाले लोगों की पहचान और जांच।
- संक्रमित और संदिग्ध व्यक्ति आइसोलेट होगा। संक्रमित व्यक्ति के जानने वाले सभी लोगों को क्वारंटीन किया जाएगा।
क्षेत्रीय स्तर पर : संक्रमित स्थान की पहचान होगी
- बड़े पैमाने पर वायरस फैला तो क्षेत्रवार गांव, कस्बे और शहर की पहचान होगी।
- प्रभावित शहर के जिले या ग्रामीण जिले बफर जोन के तौर चिह्नित होंगे।
- संक्रमित क्षेत्र को जोड़ने वाली सड़कें बंद होंगी। सभी वाहनों, सार्वजनिक वाहनों और व्यक्तिगत वाहनों की आवाजही बंद।
- जिन लोगों या वाहनों का चलना जरूरी है, रिकॉर्ड लेने के बाद विशेष पास जारी होंगे।
जिला प्रशासन की जिम्मेदारी
- लोगों को जागरूक करना। बचाव की विस्तृत जानकारी सभी को देनी होगी।
- स्वास्थ्यकर्मी बाहर जाते हैं तो उनकी स्क्रीनिंग, उनका पूरा ब्योरा रखना अनिवार्य।
- आपातकाल या जरूरी सेवाओं के लिए बाहर जाने वाले का डाटा रखना होगा।
- तय सीमा क्षेत्र से बाहर वाहन जाएगा तो सोडियम हाइपोक्लोराइट से सैनिटाइज होगा।
जांच केंद्र (लैबोरेटरी)
- सरकारी और गैर सरकारी लैबोरेटरी मानक अनुसार जांच करेंगी। सैंपल की संख्या बढ़ने पर निजी लौबोरेटरी में भेजेंगे।
- एनसीडीसी दिल्ली, एनआईवी पुणे और आईसीएमआर से संपर्क में रहेंगी।
- सभी सैंपल की जांच रिपोर्ट 12 से 24 घंटे के भीतर देनी अनिवार्य होगी।
- रोज की रिपोर्ट जिला, राज्य और केंद्रीय कंट्रोल रूम को मुहैया कराएगी लैबोरेटरी।
अस्पताल में रोगियों का इलाज
- सभी संक्रमित और संदिग्ध कोविड-19 अस्पताल में शिफ्ट किए जाएंगे।
- संक्रमित व्यक्ति की रिपोर्ट दो बार निगेटिव नहीं आती तब तक डिस्चार्ज नहीं होगा।
- हॉस्टल, होटल, गेस्ट हाउस और स्टेडियम कोविड-अस्पताल के रूप में परिवर्तित होंगे।
- बड़े अस्पतालों में गंभीर रोगियों का इलाज।
- वेंटिलेटर या एक्मो सपोर्ट के लिए सुविधा वाले स्थानीय अस्पताल चिन्हित होंगे।
इलाज के दौरान ऐसे करें बचाव
- स्वास्थ्यकर्मी तीन लेयर वाला सर्जिकल मास्क पहनेंगे।
- आइसोलेशन वार्ड या क्रिटिकल केयर यूनिट में स्टाफ पीपीई किट पहनेगा।
- ऐसी जगहों की दिन में अनिवार्य रूप से दो बार होगी सफाई।