कोरोना टेस्ट किट को लेकर अभी नहीं मिल पा रहा कोई साफ जवाब, क्या है वजह
- आईसीएमआर, माईलैब, आईईटी दिल्ली की अनेक सवालों पर चुप्पी
- आईसीएमआर के रीएजेंट पर आरटीपीसीआर तकनीक से हो रही है जांच
- जर्मन किट के आने के बाद जांच में तेजी आने के आसार
विस्तार
कोरोना के संक्रमित तेजी से बढ़ने लगे हैं। अभी देश में कहीं भी संक्रमित लोगों को केन्द्र में रखकर उसके आस-पास के सभी लोगों का चीन, सिंगापुर या दक्षिण कोरिया की तरह परीक्षण नहीं हो पा रहा है। लेकिन इसके सामानांतर देश में जांच की किट भी एक पहेली बनी हुई है।
आईसीएमआर के प्रमुख बलराम भार्गव, डॉ. रमन गंगाखेड़कर इस बारे में कुछ नहीं कहना चाहते। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी अभी इस सवाल को टाले जा रहे हैं। आईसीएमआर की एडवाइजरी बाडी आईआईटी दिल्ली की टीम को अभी 1200 रुपये की किट तैयार करने के लिए संक्रमितों के सैंपल(स्वैब) ही नहीं मिल पाए हैं।
टेस्ट किट की सफलता पर क्यों खामोश है माई लैब
टेस्ट किट के परिणाम देने की सफलता से जुड़े सवाल पर पुणे की माई लैब की खामोशी भी समझ में नहीं आ रही है। माई लैब के गौतम वानखेड़े, मोहित अग्रवाल, दीपक कुमार कुछ सवालों पर जानकारी दे पाने की स्थिति में नहीं है। माईलैब के विशेषज्ञ यह नहीं बता पा रहे हैं कि जब भारत में कोरोना के मामले मार्च के दूसरे सप्ताह से आने शुरू हुए हैं, ऐसे में उनकी जांच किट के परिणाम की सफलता की गारंटी क्या है?
इस सवाल पर दीपक कुमार और मोहित अग्रवाल का कहना है कि वह आईसीएमआर की किट पर कैसे सवाल खड़ा सकते हैं। उनसे हुई बातचीत में यही बात उभरी कि आईसीएमआर ने जो स्पेसिफिकेशन उन्हें दिए उसके आधार पर काम कर दिया गया।
कंपनी के अधिकारी केवल इतना बता रहे हैं उन्होंने छह सप्ताह के रिकार्ड टाइम में आईसीएमआर की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वाइरोलॉजी के लिए किट तैयार की है। यह किट अमेरिका के फूड एंड एडमिनिस्ट्रेशन(एफडीए) तथा डब्ल्यू एचओ के मानक के अनुरुप है। माईलैब ने इस किट को माइलैबपैथोडिटेक्ट कोविड-19 किट का नाम दिया है।
दावा किया है कि एक किट से 100 लोगों का परीक्षण किया जा सकेगा। अगले सप्ताह तक एक लाख किट की आपूर्ति की जा सकेगी और आरटीपीसीआर आधारित किट के माध्यम से एक प्रयोगशाला औसतन 1000 लोगों की जांच कर सकेगी। एक बार की जांच में 7-8 घंटे की बजाय महज ढाई घंटे लगेंगे।
इस सवाल का साफ जवाब नहीं मिला कि इस किट का रोगियों पर परीक्षण किया गया है कि नहीं और यह केवल नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वाइरोलॉजी की किट का एक तकनीकी संशोधन मात्र है जिसमें परीक्षण का समय घटकर ढाई घंटे हो जाएगा।
आईआईटी दिल्ली सैंपल का इंतजार करती रह गई
आईआईटी दिल्ली की टीम ने 1200 रुपये में देश को कोरोना जांच की किट दिलाने का वादा किया है। किट का आरंभिक डिजाइन तैयार हो गया है, लेकिन इसे संक्रमित लोगों के सैंपल(स्वैब) पर परीक्षण के बाद अंतिम रूप दिया जा सकता है। किट तैयार करने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि सैंपल आने के बाद किट के तैयार होने के बारे में कुछ कहा जा सकता है।
सूत्र बताते हैं कि अब आईआईटी दिल्ली को सैंपल मिल पाने की संभावना नहीं है। कुछ एथिकल इश्यू सामने आ रहे हैं। ऐसे में आईआईटी दिल्ली ने अपने स्तर से कुछ अन्य विकल्पों पर विचार करना शुरू कर दिया है। बताते हैं वह किट तैयार करने के लिए अन्य तरीके प्रयोग में लाएंगे।
कैसे हो रही है जांच
कोरोना की जांच अभी आरटीपीसीआर तकनीक के जरिए आईसीएमआर द्वारा उपलब्ध कराए गए रीएजेंट के माध्यम से हो रही है। रीएजेंट माइक्रोबायलॉजी की भाषा में एक तरह का केमिकल होता है। इसका जांच के दौरान इस्तेमाल किया जाता है। एक बार की जांच में 35-40 लोगों के सैंपल रखे जाते हैं और जांच होने में 6-7 घंटे का समय लगता है।
किंग जार्ज मेडिकल कालेज लखनऊ की तकनीशियन अनीता जैन का कहना है कि इस तरह से एक दिन में 70-80 सैंपल की जांच ही संभव है। जांच में सैंपल की संख्या बढ़ाने पर त्रुटि का खतरा रहता है। डा. अनीता के अनुसार इसलिए कम सैंपल ही लिए जाते हैं।
खास बात यह भी है कि सैंपल (नाक, गला या फेफड़े से लिया गया स्वैब) फ्रीजर में सुरक्षित(कोल्ड चेन) रहना चाहिए। उ.प्र. में यह जांच बीएचयू, केजीएमयू, एसजीपीजीआई समेत सभी प्रमुख मेडिकल कालेजों में उपलब्ध हो गई है। यही स्थिति देश के अन्य हिस्सों में है और आईसीएमआर, केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ऐसे सक्षम अस्पताल, मेडिकल कालेज और लैब की सूची जारी कर दी है।
जर्मनी और अन्य जगहों से आयातित किट के भरोसे
सूत्रों की माने तो कोरोना महामारी से जंग में जल्द ही जर्मनी से जांच किट की बड़ी खेप आनी है। इसके अलावा कुछ अन्य देशों से भी भारत चिकित्सा उपकरण, जरूरत के सामान, किट आदि लेने के प्रयास में लगा है। उम्मीद है कि अगले एक दो सप्ताह में मैईलैब की भी किट उपलब्ध हो सकती है।