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कोरोना : कोविशील्ड टीके के बाद हुआ पीलिया, एक मरीज की मौत
Mon, 12 Jul 2021 07:58 AM IST
Kuldeep Singh
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Mon, 12 Jul 2021 07:58 AM IST
सार
- द इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर डिजीज एंड ट्रांसप्लांटेशन, भारत इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च चेन्नई के वैज्ञानिकों ने टीकाकरण में ऑटो इम्यून हेपेटाइटिस शीर्षक से प्रकाशित लेख में यह दावा किया है। एल्सवीयर जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, एआईएच होने का प्रमुख कारण वायरस को माना है।
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कोविशील्ड वैक्सीन का टीका लगवाते हुए
- फोटो : PTI
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विस्तार
केस एक : महिला स्वास्थ्यकर्मी (38) जिसको कोरोना नहीं था, लेकिन टीका लगने के 20 दिन बाद पीलिया हुआ और अस्पताल में भर्ती कराया गया। टीका लगने के करीब एक सप्ताह बाद बुखार और थकान महसूस हुआ, महिला का थायराइड ग्लैंड का 8 साल से इलाज चल रहा था। कुछ समय बाद महिला स्वस्थ हो गई।
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केस दो : 62 वर्षीय बुजुर्ग को टीका लगने के 16 दिन बाद बुखार, पीलिया, भूख न लगना जैसी दिक्कतें हुईं। अस्पताल में भर्ती होने के समय लिवर फंक्शन टेस्ट में बिलीरूबीन का स्तर बढ़ा था। पांच बार प्लाजमा थेरेपी दी गई। परिवार ने इलाज में असमर्थता जताई और भर्ती होने के 3 सप्ताह बाद मौत हो गई।
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यह दो उदाहरण बताते हैं कि कोविशील्ड टीका लगवाने वाले लोगों में बुखार और मांसपेशी में दर्द सामान्य लक्षण मिले हैं। एक ताजा अध्ययन में पता चला है कि कुछ लोगों में कोविशील्ड टीके से थ्रॉबोएंबोलिक और ऑटो इम्यून हेपेटाइटिस के दो मामले सामने आए हैं। टीके से ब्लड क्लॉट के मामले काफी मिले हैं।
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द इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर डिजीज एंड ट्रांसप्लांटेशन, डॉक्टर रेला इंस्टीट्यूट एंड मेडिकल सेंटर भारत इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च चेन्नई के वैज्ञानिकों ने टीकाकरण में ऑटो इम्यून हेपेटाइटिस शीर्षक से प्रकाशित लेख में यह दावा किया है।
एल्सवीयर जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, एआईएच होने का प्रमुख कारण वायरस को माना है। वैज्ञानिकों का कहना है कि टीके के बाद एआईएच एक बहुत ही दुर्लभ मामला है।
0.01 फीसदी में यह दुर्लभ रोग
विशेषज्ञों का कहना है कि टीका लगने के बाद ऑटो इम्यून रिएक्शन दुर्लभ है। 0.01 फीसदी मामले में इस तरह की तकलीफ रिपोर्ट होती है। डॉक्टरों का यह भी कहना है कि बहुत से मामले सामने नहीं भी आ पाते हैं। क्योंकि बहुत लोगों में हल्के लक्षण होते हैं या बिना लक्षण वाले होते हैं। टीका लगने के बाद शरीर में होने वाली कुछ क्रियाओं में असंतुलन के कारण इस तरह की तकलीफ संभव है।
डेल्टा प्लस के अलावा आठ और में मिला 2 वैरिएंट
12 से ज्यादा मरीजों में मिल चुका है म्यूटेशन
वायरस के गंभीर वैरिएंट तेजी से बढ़ रहे हैं। एक और कोरोना मरीजों में सबसे ज्यादा डेल्टा वैरिएंट मिल रहा है। वहीं डेल्टा प्लस के अलावा अब एवाई 2.0 वैरिएंट भी आठ और मरीजों में मिला है। इसी के साथ ही देश में एवाई 2.0 वैरिएंट से संक्रमितों की संख्या 14 हो चुकी है। वहीं डेल्टा प्लस मामले बढ़कर 75 हो चुके हैं। डेल्टा प्लस और एवाई 2.0 दोनों वैरिएंट डेल्टा से ही निकले हैं।
इन तीनों का असर लगभग एक जैसा है जो न सिर्फ आक्रामक है बल्कि एंटीबॉडी के स्तर को कम भी करता है। जीनोम सीक्वेंसिंग को लेकर गठित समिति के अनुसार, डेल्टा, डेल्टा प्लस और एवाई 2.0 वैरिएंट ही सबसे ज्यादा मिल रहा है। बीते मई के माह के बाद से सभी सैंपल में इनकी मौजूदगी मिल रही है। देश में 42 हजार से ज्यादा के सैंपल की जिनोम सीक्वेंसिंग पूरी हो चुकी है।
फिलहाल दोनों वैरिएंट के बारे में जानकारी नहीं
समिति के अनुसार, डेल्टा प्लस और एवाई 2.0 वैरिएंट के प्रभाव के बारे में वैज्ञानिक स्तर पर अधिक जानकारी नहीं है। इसलिए डेल्टा प्लस पर एनआईवी पुणे ने अभियान शुरू कर दिया है जो कि सीरियाई हैमस्टर को संक्रमित करने के बाद किया जा रहा है। जबकि एवाई 2.0 पर अध्ययन बाकी है। इस म्यूटेशन का जब तक कल्चर नहीं होगा तब तक अध्ययन भी आगे बढ़ाया नहीं जा सकता है।