कोरोना का कहर : भारतीय अर्थव्यवस्था को लग सकता है 2,548 करोड़ रुपये का झटका
- चीन में सुस्त पड़ी है मैन्युफैक्टरिंग, जिससे प्रभावित हो रहा वैश्विक कारोबार
- 15 शीर्ष देशों में शामिल है भारत, जिन्हें होगा सबसे ज्यादा नुकसान
- भारतीय केमिकल कारोबार को लगेगा सबसे ज्यादा 12.9 करोड़ डॉलर का झटका
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कोरोनावायरस तेजी से चीन के बाहर दुनियाभर में फैल रहा है। इसका बड़ा असर कारोबार पर पड़ रहा है, जिसे लेकर भारत सहित वैश्विक बाजार चिंतित हैं। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस वायरस के कारण भारत के व्यापार को 34.8 करोड़ डॉलर (करीब 2,548 करोड़ रुपये) की चपत लग सकती है।
संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (अंकटाड) की ओर से प्रकाशित अनुमानों में कहा गया है कि कोरोनावायरस के कारण चीन में विनिर्माण गतिविधियां सुस्त पड़ने से वैश्विक कारोबार प्रभावित हो रहा है। इस संकट की वजह से जिन शीर्ष-15 अर्थव्यवस्थाओं को सबसे ज्यादा नुकसान होगा, उनमें भारत भी शामिल हो सकता है।
अनुमानों में कहा गया है कि भारतीय कारोबार में इस वायरस के कारण केमिकल क्षेत्र को सबसे अधिक 12.9 करोड़ डॉलर की चपत लग सकती है। इसके अलावा, वस्त्र एवं परिधान कारोबार को 6.4 करोड़ डॉलर, मोटर वाहन को 3.4 करोड़ डॉलर, इलेक्ट्रिकल मशीनरी को 1.2 करोड़ डॉलर, चमड़ा उत्पादों को 1.3 करोड़ डॉलर, धातु उत्पादों को 2.7 करोड़ डॉलर और लकड़ी के उत्पादों एवं फर्नीचर कारोबार को 1.5 करोड़ डॉलर का नुकसान हो सकता है।
ये देश सबसे ज्यादा प्रभावित
कोरोनावायरस के कारण दुनिया की जिन अर्थव्यवस्थाओं को सबसे ज्यादा झटका लगा है, उनमें यूरोपीय संघ (15.6 अरब डॉलर), अमेरिका (5.8 अरब डॉलर), जापान (5.2 अरब डॉलर), दक्षिण कोरिया (3.8 अरब डॉलर), चीन का ताइवान प्रांत (2.6 अरब डॉलर) और वियतनाम (2.3 अरब डॉलर) शामिल हैं। इसके अलावा, इंडोनेशिया को भी इससे 31.2 करोड़ डॉलर की चपत लगी है। यूरोपीय संघ, अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया जैसी अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत का व्यापार कम प्रभावित होगा।
वैश्विक निर्यात को 50 अरब डॉलर का झटका
संयुक्त राष्ट्र के अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि इस वायरस के कारण अकेले फरवरी में दुनियाभर में चीन के मैन्युफैक्चरिंग निर्यात में 50 अरब डॉलर (करीब 3.65 लाख करोड़ रुपये) की कमी आ सकती है। अंकटाड की अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं जिंस विभाग की प्रमुख पामेला कोक-हेमिल्टन ने बताया कि चीन में मैन्युफैक्चरिंग सुस्त पड़ी है। इससे उसकी मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई (परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स) पिछले एक महीने में 20 अंक गिरकर 16 साल के निचले स्तर 37.5 पर आ गई है। चूंकि, यह सीधे निर्यात से जुड़ा है। ऐसे में यह कुल वैश्विक निर्यात में दो फीसदी की गिरावट ला सकता है। इस वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में मशीनरी, मोटर वाहन और संचार उपकरण शामिल हैं।
चीनी उत्पादों पर निर्भरता से बढ़ा संकट
अंकटाड ने कहा कि चीन कई वैश्विक व्यापार संचालन का केंद्रीय मैन्युफैक्चरिंग केंद्र बन गया है। चीन के मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में सुस्ती के कारण जो परिस्थितियां बन रही हैं, उससे पता चलता है कि किसी भी देश का उद्योग चीनी आपूर्तिकर्ताओं पर कितना निर्भर है। इससे संकट और बढ़ा है। पामेला ने कहा कि इससे वे विकासशील देश ज्यादा प्रभावित होंगे, जिनकी अर्थव्यवस्था कच्चे उत्पादों के निर्यात पर निर्भर है। यह अल्पकालिक नहीं है। इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर समग्र रूप से पड़ेगा।
2020 में विमानन राजस्व को 113 अरब डॉलर का नुकसान
अंतरराष्ट्रीय हवाई परिवहन संघ (आईएटीए) का कहना है कि कोरोनावायरस के प्रभाव से विमानन उद्योग को 2020 में राजस्व में 113 अरब डॉलर की चपत लग सकती है। आईएटीए ने कहा कि यह वायरस एक महामारी के रूप में दुनियाभर में फैल रहा है, जिससे इस उद्योग को बड़ा झटका लग सकता है। आईएटीए के प्रमुख एलेक्जेंडर डी जूनियाक ने कहा कि कोविड-19 की वजह से घटनाक्रम इतनी तेजी से बदले हैं, जिसका पहले कोई उदाहरण देखने को नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि दो महीने से भी कम समय में दुनिया भर में उद्योग के लिए संभावनाएं काफी खराब हुई हैं।