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कोरोना योद्धा: 37 वर्षीय डॉक्टर ने मरीज की जान बचाने के लिए हटाई खुद की ऑक्सीजन

Wed, 12 Aug 2020 09:22 PM IST
Rajeev Rai न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सूरत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सूरत Published by: Rajeev Rai Updated Wed, 12 Aug 2020 09:22 PM IST
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Corona warrior: 37-year-old doctor sanket mehta removed his own oxygen support to save 71-year-old patient's life
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI

कोरोना संकट के दौर में कई ऐसे किस्से सामने आए हैं जिन्होंने इंसानियत की एक नई मिसाल पेश की है। देश ने ऐसे कई योद्धाओं को देखा है जिन्होंने खुद की जान जोखिम में डालकर दूसरे की जान बचाई है। एक ऐसा ही मामला गुजरात के सूरत से सामने आया है। यहां के एक डॉक्टर ने कोरोना संक्रमित होने के बावजूद खुद की चिंता ना करते हुए एक बुजुर्ग की जिंदगी बचाई। 

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37 वर्षीय एनेस्थेटिस्ट संकेत मेहता ने 71 वर्षीय मरीज दिनेश पुराणी की जिंदगी उस वक्त बचाई जब मेहता खुद आईसीयू में भर्ती थे और अपना इलाज करा रहे थे। अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक पुराणी की इंटुबैषेण (सांस की तकलीफ दूर करने के लिए श्वास नली के रास्ते अंदर पाइप डालना) तीन मिनट के अंदर करना था वरना उनके दिमाग को बड़ा नुकसान पहुंच जाता।
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मामला नौ अगस्त की रात का है, जब अडाजन के बाप्स अस्पताल में कोरोना से संक्रमित 37 वर्षीय डॉक्टर संकेत मेहता को ऑक्सीजन की कमी और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद आईसीयू में भर्ती करवाया गया। 
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बाप्स अस्पताल के सीईओ ने मीडिया से बातचीत में बताया कि इंटुबैषेण का काम सिर्फ एक एनेस्थेटिस्ट ही कर सकता है। ऐसे में उस दिन 71 वर्षीय मरीज को आपातकालीन स्थिति में इंटुबैषेण के लिए आईसीयू में लाया गया। हालांकि डॉक्टर्स को कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करते हुए इलाज से पहले पीपीई किट पहनना पड़ता है, ऐसे में उन्हें 15-20 मिनट का समय लगता, ऐसे में मरीज के साथ कोई भी अप्रिय घटना घट सकती थी। उसी दौरान ऑक्सीजन के सहारे आईसीयू में लेटे डॉ मेहता ने मरीज को देखा और स्थिति को समझते हुए खुद का ऑक्सीजन मास्क हटा दिया और उठकर मरीज का तुरंत इंटुबैषेण किया।


अस्पताल के स्वस्थ्यकर्मियों के मुताबिक, अचानक से डॉक्टर मेहता को इलाज करते देख हर कोई हैरान रह गया था। उधर अस्पताल ने बताया है कि इंटुबैषेण के बाद दिनेश पुराणी की स्थिति स्थिर है और वे वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं। वहीं डॉक्टर मेहता जो पिछले दस दिन से कोरोना का इलाज करवा रहे हैं, वे कमजोरी की वजह से फिलहाल बोलने की स्थिति में नहीं हैं, उन्हें हर एक मिनट में छह लीटर ऑक्सीजन की जरुरत है।  

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