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कोरोना का असर : कोर्ट में लंबित मामलों ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, सुप्रीम कोर्ट में 66,727 मामलों का बैकलॉग

Sat, 27 Mar 2021 03:37 PM IST
Tanuja Yadav न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Tanuja Yadav Updated Sat, 27 Mar 2021 03:37 PM IST
सार

  • लॉकडाउन में न्यायिक घंटे बढ़ने के बाद भी लंबित मामले बढ़े
  • जिला अदालतों में लंबित मामलों की दर में 18.2 फीसदी की बढ़ोतरी
  • सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में भी लंबित मामले तेजी से बढ़े

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corona virus pandemic impact on judiciary record pendency of cases al att level in judiciary
न्यायपालिका में लंबित मामलों पर महामारी का पड़ा असर

विस्तार

दुनिया में कोरोना वायरस का कहर पिछले एक साल से जारी है और ऐसा कोई भी क्षेत्र नहीं है, जिस पर महामारी का असर ना पड़ा हो। न्यायपालिका में लंबित मामलों की बात करें तो यहां भी महामारी की कहर बरपा है और लंबित मामले बहुत तेज गति से बढ़े हैं। एक साल वर्चुअल तरीके से संचालन के बाद भी न्यायपालिका में लंबित मामले में रिकॉर्ड बढ़ोतरी है। 

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न्यायिक डाटा पर निगरानी करने वाली सरकारी संस्था राष्ट्रीय न्यायिक डाटा ग्रिड के मुताबिक, जिला अदालतों में 31 दिसंबर 2019 से लेकर 31 दिसंबर 2020 तक मामलों के बैकलॉग में 18.2 फीसदी की तेज बढ़ोतरी देखी गई। पिछले साल यानी 2018-19 में ये वृद्धि मात्र 7.79 फीसदी थी और 2017-18 में 11.6 फीसदी थी। 
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2019-20 में देश के 25 हाईकोर्ट के लंबित मामलों में 20.4 फीसदी की बढ़ोतरी है, जबकि सुप्रीम कोर्ट के लंबित मामलों में 10.35 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। एक मार्च 2020 को सुप्रीम कोर्ट में 60,469 लंबित मामले थे लेकिन एक मार्च 2021 को यह आंकड़ा बढ़कर 66,727 हो गया। साफ शब्दों में कहा जाए 66,727 का बैकलॉग किसी सुप्रीम कोर्ट में अब तक नहीं रहा है। 
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गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे की बेंच ने माना था कि लंबित मामले नियंत्रण से बाहर हो गए हैं और कहा था कि बैकलॉग के बोझ को कम करने के लिए अस्थायी जजों की नियुक्ति की जाएगी। पिछले सालों की तुलना करें तो लंबित मामलों में तेजी की जगह थोड़ी गिरावट देखी गई थी।

उदाहरण के तौर पर, एक मार्च 2019 से लेकर एक मार्च 2020 के बीच बैकलॉग मामलों में बस 4.6 फीसदी की वृद्धि देखी गई। एक मार्च 2018 से एक मार्च 2019 तक 3.9 फीसदी की वृद्धि और 2017-18 में लंबित मामलों की दर में 11.9 फीसदी की गिरावट थी यानी 62,161 से लंबित मामले गिरकर 55,529 पर आ गए थे। 

कोर्ट की ओर से जारी बयान के मुताबिक लॉकडाउन के दौरान, न्यायिक घंटे बढ़ाने और वर्चुअल तरीके से की गई सुनवाई के बाद भी लंबित मामलों की दर तेजी थी। एक कैलेंडर ईयर के मुताबिक, कोर्ट साल में 190 दिन मामलों की सुनवाई करता है, जबकि लॉकडाउन के दौरान 231 दिन कार्यवाही हुई है। इसके बाद भी लंबित मामले कम नहीं हुए। 


सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील विकास सिंह का कहना है कि ये बात सही है कि लॉकडाउन के दौरान लंबित मामले और तेजी बढ़े हैं, लेकिन फाइलिंग प्रक्रिया महामारी के दौरान घटी है। उन्होंने आगे कहा कि देश में एक तरफ वकीलों की कमी है लेकिन इस स्थिति को सुधारने के लिए जज कुछ नहीं कर रहे हैं। 

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