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Corona virus: कोरोना का एवाई-12 स्वरूप आया सामने, वैज्ञानिकों की बढ़ी चिंता

Mon, 30 Aug 2021 05:11 AM IST
Amit Mandal परीक्षित निर्भय नई दिल्ली।
परीक्षित निर्भय नई दिल्ली। Published by: Amit Mandal Updated Mon, 30 Aug 2021 05:11 AM IST
सार

  • वैज्ञानिक पहले इसे डेल्टा मान रहे थे, प्रयोगशालाओं को किया गया अलर्ट
  • भारतीय वैज्ञानिकों में अब नए स्वरूप को लेकर चिंता बढ़ गई है

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Corona virus: AY-12 form of corona detected, concern of scientists increased
corona virus - फोटो : pixabay

विस्तार

कोरोना वायरस का अब एक नया स्वरूप एवाई-12 सामने आया है। वैज्ञानिक पहले इसे डेल्टा का ही भाग मान रहे थे लेकिन इसकी सक्रियता की वजह से वैज्ञानिकों को इसे अलग से वर्गीकृत करना पड़ा है। भारतीय वैज्ञानिकों में अब नए स्वरूप को लेकर चिंता बढ़ गई है। देश भर की प्रयोगशालाओं से कहा गया है कि कोरोना वायरस से संक्रमित सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग के दौरान एवाई-12 म्यूटेशन पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। जीनोम सीक्वेंसिंग की निगरानी रख रहे इन्साकॉग ने सभी प्रयोगशालाओं के लिए अलर्ट भी जारी किया है।

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इस स्वरूप का प्रभाव अभी अज्ञात
इन्साकॉग के अनुसार कोरोना वायरस के नए स्वरुप  एवाई-12 के बारे में बहुत अधिक जानकारी विज्ञान के पास भी नहीं है। इस म्यूटेशन का कितना असर पड़ रहा है? यह आगामी दिनों में पता चलेगा, लेकिन अब तक यह पता चल चुका है कि दुनिया भर में कोरोना के डेल्टा वैरिएंट में 13 म्यूटेशन हुए हैं, जिनमें से यह एक है और भारत में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं।
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दुनिया में 33 हजार सैंपल में एवाई-12 की पुष्टि
इन्साकॉग के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया कि एवाई-12 म्यूटेशन को लेकर अभी अध्ययन चल रहा है। इसके बारे में बहुत अधिक जानकारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उपलब्ध नहीं है। हालांकि यह पता चला है कि दुनिया भर में 33 हजार से ज्यादा सैंपल में इसकी पुष्टि हो चुकी है जोकि डेल्टा के अन्य म्यूटेशन की तुलना में सबसे अधिक है। उन्होंने बताया कि एवाई-12 डेल्टा का ही एक उप-वंश है, जो अब तक कई राज्यों में देखा जा रहा है लेकिन इसकी संख्या की बारीकी से जांच करने की जरूरत है। अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि डेल्टा और एवाई-12 के बीच प्रभावों में क्या अंतर है? अभी इतना ही कहा जा सकता है कि यह दोनों बहुत समान प्रतीत होते हैं।
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78865 नमूनों की जीनोम सीक्वेंसिंग में 61.2 फीसदी में मिला वायरस
बीते 23 अगस्त तक देश भर में 78865 सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग हुई है, जिनमें से 31124 यानी 61.2 फीसदी में कोरोना वायरस के गंभीर स्वरूप मिल चुके हैं। सर्वाधिक 21192 सैंपल में डेल्टा स्वरूप मिला है। यानी अल्फा, बीटा और गामा सहित अन्य स्वरूप की तुलना में डेल्टा भारत में कई गुना अधिक है, जो लोगों को एक से अधिक बार संक्त्रस्मित कर सकता है। साथ ही टीकाकरण के बाद भी संक्रमित कर सकता है।

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