आफत: कोरोना मरीजों से अस्पताल भरे, दूसरे रोगियों को नहीं मिल रहा इलाज, ओपीडी बंद होने से बढ़ी परेशानी
- सीएम अरविंद केजरीवाल ने अधिकारियों के साथ आपात बैठक की, अस्पतालों में बेड्स बढ़ाने को लेकर निर्णय
- दिल्ली के ज्यादातर प्राइवेट अस्पतालों में कोरोना बेड भरे, सरकारी अस्पतालों में अभी भी जगह
विस्तार
शहादरा के रहने वाले अमर सिंह वर्मा की पत्नी राधा वर्मा (50 वर्ष) की तबीयत पिछले कुछ दिनों से खराब चल रही थी। रविवार/सोमवार रात लगभग तीन बजे उनकी हालत ज्यादा खराब हो गई। उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी। ऑक्सीजन स्तर लगातार गिरता जा रहा था। परिवार तत्काल अस्पताल में भर्ती कराने की कोशिश कर रहा था, लेकिन काफी प्रयास के बाद भी उन्हें कहीं बेड नहीं मिल सका। सोमवार दोपहर लगभग दो बजे राधा वर्मा की मौत हो गई।
अमर सिंह वर्मा अकेले व्यक्ति नहीं हैं जो अस्पतालों में बेड न मिल पाने की समस्या से जूझे। उनके जैसे हजारों लोग अस्पतालों में कोरोना या नॉन-कोरोना मरीजों के इलाज के लिए भटक रहे हैं, लेकिन राजधानी के अस्पतालों में जगह नहीं बची है और लोगों को बेड नहीं मिल पा रहे हैं।
गैर कोरोना रोगियों के बेड भी नहीं
सर गंगाराम अस्पताल प्रशासन ने अमर उजाला को बताया कि उनके यहां कोरोना के 150 बेड थे जो पूरी तरह भर गए हैं। दिल्ली सरकार के निर्देश पर 20 बेड अतिरिक्त बढ़ाए गए हैं, लेकिन ये भी पूरी तरह भर चुके हैं। कोरोना मरीजों के लिए यहां बेड मिलने में मुश्किलें आ रही हैं।
गैर कोरोना मरीजों के लिए अलग-अलग विशेष वार्ड्स बनाए गए हैं, जहां ऐसे मरीजों का इलाज चल रहा है। इनमें बेड्स की उपलब्धता विभाग के अनुसार ही हो पाती है, लेकिन कुछ अन्य अस्पतालों में नॉन-कोरोना मरीजों की सेवाएं बंद किए जाने से इन अस्पतालों में दबाव बढ़ गया है और यहां नॉन-कोरोना मरीजों को भी बेड नहीं मिल पा रहे हैं।
अन्य अस्पतालों में भी स्थिति बुरी
एम्स अस्पताल में ओपीडी सेवाएं अस्थायी तौर पर बंद कर दी गई हैं तो दूसरे अस्पतालों में भी कोरोना मरीजों को ही प्रमुखता से देखा जा रहा है। राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल को पूरी तरह कोरोना मरीजों के इलाज के लिए आरक्षित कर दिया गया है। इसका असर दूसरी बीमारियों से पीड़ित लोगों को हो रहा है और उनके उपचार में मुश्किलें आ रही हैं।
दोबारा अस्थायी कोविड अस्पताल बनाने का निर्णय
अधिकारियों ने भी मुख्यमंत्री को बताया है कि अस्पतालों में तेजी से बेड भरते जा रहे हैं। हालांकि अभी कुछ बेड्स उपलब्ध हैं, लेकिन जिस तेजी से कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ रही है, उसे देखते हुए तत्काल आपात कदम उठाये जाने की आवश्यकता बताई गई है।
मुख्यमंत्री ने लोगों से यह भी अपील की है कि बेहद आवश्यक होने पर ही अस्पताल में भर्ती होने का विकल्प अपनाएं। कोशिश करें कि माइल्ड स्तर का संक्रमण होने की स्थिति में अपने घर पर ही रहकर अपना इलाज कराएं। दिल्ली सरकार की हेल्प लाइन पर इससे जुड़ी किसी भी सहयता के लिए मदद मांगी जा सकती है।
स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन ने कहा
स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन ने कहा है कि कोरोना के पहले फेज में राजधानी के सरकारी-प्राइवेट अस्पतालों में कुल मिलाकर 18 हजार कोविड बेड बनाए गए थे। अब दोबारा संक्रमण को बढ़ते हुए देखने के बाद उसी स्तर की तैयारी की जा रही है, जिससे सभी लोगों को बेड्स की सुविधा दी जा सके। उन्होंने कहा कि अभी केंद्र सरकार के अस्पतालों में 1090 बेड्स और जबकि नवंबर महीने में 4000 से ज्यादा कोरोना बेड्स उपलब्ध थे। दिल्ली सरकार ने केंद्र सरकार से दोबारा बेड क्षमता बढ़ाने का अनुरोध किया है।