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कोरोना के योद्धा: लामा थुपस्टोन चोग्याल, वो भिक्षु जो लद्दाख के दिल की धड़कन को बनाए रखता है

Mon, 23 Mar 2020 12:26 PM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: योगेश साहू Updated Mon, 23 Mar 2020 12:26 PM IST
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corona ke yodha : Corona Warrior Lama Thupstan Chogyal, Monk, Ladakh Heart Foundation
कोरोना के योद्धा : लामा थुपस्टोन चोग्याल - फोटो : Ladakh Heart Foundation Website

कोरोना वायरस दुनियाभर में पैर पसार रहा है। वहीं कुछ लोग हैं जो इस वैश्विक महामारी के खिलाफ डटकर खड़े हैं और पूरी ताकत से लड़ रहे हैं। इन्हीं लोगों को कोरोना के योद्धा कहा जा रहा है। इन योद्धाओं में से एक हैं लद्दाख के एक भिक्षु लामा थुपस्टोन चोग्याल। आइए जानते हैं इनके बारे में...



49 वर्षीय लामा थुपस्टोन चोग्याल लद्दाख हार्ट फाउंडेशन (एलएचएफ) के अध्यक्ष हैं। एलएचएफ में इन दिनों आठ सदस्यों वाले परिवार के तीन बच्चे हैं, जिनकी उम्र महज दो से ढाई साल है। यहां उन्हें संगरोध कर एकांतवास में रखा गया है। 

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corona ke yodha : Corona Warrior Lama Thupstan Chogyal, Monk, Ladakh Heart Foundation
कोरोना के योद्धा : लामा थुपस्टोन चोग्याल - फोटो : Ladakh Heart Foundation Website

चोग्याल कहते हैं कि इन बच्चों की उम्र अभी खुले आसमान के नीचे खेलकर जीवन का आनंद लेने की है। लेकिन ये बच्चे यहां भर्ती हैं। इन बच्चों को रोता देख दिल दहल उठता है। इन बच्चों के परिवार के दो सदस्यों में कोरोना वायरस से संक्रमण की पुष्टि होने के बाद एलएचएफ में संगरोध किया गया है।

इनमें से एक 68 वर्षीय व्यक्ति लेह से करीब 20 किलोमीटर दूर चुचोट गांव का रहने वाला है, जो 26 फरवरी को ईरान से लौटा था। संक्रमण की पुष्टि होने के बाद इन्हें एकांतवास में रखकर उपचार करना अपरिहार्य हो गया था। 

यह शख्स बुखार आने पर अस्पताल पहुंचा और 28 फरवरी को जांच रिपोर्ट में कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई। तब उन्हें लेह के सोनम नोरबू मेमोरियल अस्पताल में भर्ती किया गया। इसके कुछ दिन बाद उनके 28 वर्षीय बेटे को भी बुखार आने पर अस्पताल में भर्ती किया गया। उसकी रिपोर्ट भी 11 मार्च को पॉजिटिव आई थी।

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कोरोना के योद्धा : लामा थुपस्टोन चोग्याल - फोटो : Ladakh Heart Foundation Website

हालांकि वह कभी विदेश नहीं गया। डॉक्टरों के मुताबिक वह अपने पिता के संपर्क में आने के कारण अनजाने में ही कोरोना वायरस के संक्रमण का शिकार हो गया। चिकित्सकों ने पहले अस्पताल में ही एकांतवास के लिए एक वार्ड बनाया था। परंतु बाद में महसूस किया कि एचएचएफ इसके कहीं अधिक मुफीद स्थान है, जो कि प्रदूषण रहित जगह पर स्थित है।

लद्दाख हार्ट फाउंडेशन की स्थापना लामा थुपस्टोन चोग्याल ने करीब एक दशक पहले की थी। वह बताते हैं कि यह संस्थान लेह के दूरस्थ इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए विशेष रूप से हृदय संबंधी बीमारियों के इलाज के लिए चलाया जा रहा था। लेकिन कोरोना वायरस का खतरा सामने आने के बाद सरकार की मदद करने का विचार आया। 

लामा ने कहा कि स्थानीय स्वास्थ्य विभाग ने फाउंडेशन से इस संबंध मदद मांगी थी। हालांकि सरकार चाहती थी कि संस्थान खुद ही सारी व्यवस्थाएं करे। इसके बाद इसे ऐसे मरीजों की देखभाल करने के एक केंद्र के तौर पर तैयार किया गया। 

फाउंडेशन के पास चार चिकित्सक हैं, जिनमें से अधिकांश स्वयंसेवक के तौर पर सेवाएं देते हैं। ये चिकित्सक महीनेभर में करीब 500 से 700 मरीजों का उपचार करते हैं। ये मरीज लद्दाख के दूरस्थ गांवों से यहां आते हैं। लामा चोग्याल बताते हैं कि हमने फिलहाल सभी ऑपरेशन टाल दिए हैं और कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित किया हुआ है।

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कोरोना के योद्धा : लामा थुपस्टोन चोग्याल - फोटो : Ladakh Heart Foundation Website

वह एकांतवास में रह रहे इस परिवार को दूर से ही देखकर ध्यान रखते कि उनकी देखभाल ठीक ढंग से हो रही है या नहीं। उन्होंने कहा कि एक दिन मैंने इस परिवार से बात करने के लिए एक मुस्लिम धर्मगुरु को फोन किया। उस धर्मगुरु ने इस परिवार से फोन पर बात की, मुझे लगता है जरूरत पड़ने पर वह दोबारा भी ऐसा करेंगे।

चोग्याल ने बताया कि लद्दाख के करीब 1200 श्रद्धालु इस स्वास्थ्य संकट से गुजर रहे हैं, वह ईरान में फंसे हैं। इनमें से ज्यादातर करगिल क्षेत्र के रहने वाले हैं। लद्दाख प्रशासन ने संस्थान से कहा है कि जो लोग दिल्ली या दूसरी जगहों से यहां लौटकर आ रहे हैं उन्हें क्वारंटीन में रखा जाए। 

साल 1997 से लद्दाख हार्ट फाउंडेशन में काम कर रहे लामा चोग्याल इससे पहले दिल्ली में रहते थे। एक बार वह लद्दाख बौद्ध विहार की यात्रा पर आए और देखा कि यहां लोग बीमार हैं, जिनमें कई सारे बच्चे हैं, और हृदय संबंधी बीमारी से जूझ रहे हैं।

वह कुछ करना चाहते थे, तब उन्होंने इलाज के लिए एक स्थानीय चिकित्सक से सलाह-मशविरा किया। डॉक्टर ने बड़ी मात्रा में पेनिसिलिन खरीदने और गांवों में वितरित करने के लिए कहा, साथ ही लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने के लिए भी कहा। लामा ने कहा कि इसके बाद मैंने 24,000 रुपये में पेनिसिलिन की दवा खरीदी।

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लामा थुपस्टोन चोग्याल - फोटो : Ladakh Heart Foundation Website

फिर, हम लोगों को शिक्षित करने के लिए गांव-गांव गए। मैंने विदेश में बसे अपने दोस्तों से भी मदद के लिए कहा; इस तरह धीरे-धीरे हार्ट फाउंडेशन की नींव पड़ी। हाल के वर्षों में लद्दाख में आरएचडी के नए मामले लगभग गायब हो गए हैं।

इस काम में उन्हें दिल्ली के एम्स अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग का भी साथ मिला। वहां के शीर्ष चिकित्सकों ने ग्रीष्मकाल के दौरान फाउंडेशन में अपनी सेवा देने के लिए शिविर लगाए। इसके अलावा विदेशों में काम कर रहे चिकित्सक भी यहां स्वयंसेवक के तौर पर समय-समय पर सेवाएं देते रहते हैं। 

एम्स के कार्डियोलॉजी सर्जरी विभाग में प्रोफेसर रहे चिकित्सक संपथ कुमार लद्दाख आ गए हैं और यहीं रहकर फाउंडेशन में अपनी पूर्णकालिक सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। जब वह आए थे तब यहां इको मशीन तक नहीं थी। लेकिन अब यहां करीब 300 हार्ट सर्जरी हो चुकी हैं। इनके अलावा प्लास्टिक सर्जरी और कई अन्य तरह के उपचार मरीजों को दिए गए हैं।

चोग्याल कहते हैं कि यहां अब पहले की तरह कुछ नहीं है, अस्पताल बंद है, यह देख दुख होता है। परंतु मन में संतोष भी है कि अब हम उस खतरे से लड़ रहे हैं जिससे पूरी दुनिया जूझ रही है। 

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