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दुनिया को नशे के दुष्चक्र में फंसा सकती है कोरोना की आर्थिक मंदी

Sat, 05 Sep 2020 09:01 PM IST
मुकेश कुमार झा अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली Published by: मुकेश कुमार झा Updated Sat, 05 Sep 2020 09:01 PM IST
सार

  • नशे के पदार्थों के उपयोग-बिक्री पर बने हैं कड़े कानून, छह महीने से 20 साल तक हो सकती है सजा
  • कुछ पदार्थों के उत्पादन के लिए लेने पड़ते हैं लाइसेंस, गड़बड़ी करने पर हो सकती है 20 साल तक की सजा

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Corona economic slowdown may trap the world in a vicious cycle of drug addiction
ड्रग - फोटो : ANI

विस्तार

संयुक्त राष्ट्र की 'वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट 2020’(World Drug Report 2020) में इस बात की आशंका जाहिर की गई है कि कोरोना के कारण पैदा हुई वैश्विक आर्थिक मंदी में पैसे कमाने के लिए ज्यादा लोग नशे के अवैध कारोबार में उतर सकते हैं, और नशे के अवैध कारोबार में बच्चों-महिलाओं की भूमिका बढ़ सकती है। रिपोर्ट में इस बात की भी आशंका जाहिर की गई है कि कोरोना के कारण बन रहे हालात में दुनिया 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी की परिस्थिति में जा सकती है जहां नशे से जुड़े अपराधों में अचानक बहुत बढ़ोतरी देखी गई थी।

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आशंका है कि इस दौरान नशेड़ी लोगों के स्वास्थ्य की स्थिति और भी ज्यादा खराब हो सकती है क्योंकि आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण ऐसे लोग नशे की अपनी डोज पूरा करने के लिए ज्यादा घटिया स्तर के उत्पादों का उपयोग कर सकते हैं। आवागमन पर रोक के कारण स्थानीय स्तर पर कृत्रिम घटिया नशीले पदार्थों के उत्पादन में भारी बढ़ोतरी की भी आशंका जताई गई है।
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इस तरह की मंदी में सरकारें नशे के विरोध में जनजागरुकता अभियान चलाने के अपने खर्चों में भी कटौती कर सकती हैं। इसका नकारात्मक असर भी नशे से जुड़े व्यापार की गतिविधियों को बढ़ावा दे सकता है। वैश्विक स्तर पर देखा गया है कि नशे से जुड़ी वस्तुओं के व्यापार पर रोक के तमाम प्रयास के बाद भी हाल के वर्षों में नशे के सामानों के व्यापार और इनके उपभोग में बढ़ोतरी हुई है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2009 में 21 करोड़ लोग गंभीर नशे के शिकार थे। यह संख्या 15 से 64 वर्ष के बीच की कुल वैश्विक आबादी की 4.8 प्रतिशत थी। वर्ष 2018 में यही आंकड़ा बढ़कर 26.9 करोड़ या 5.3 प्रतिशत आबादी तक पहुंच गया था।
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बढ़ती शहरी आबादी आश्चर्यजनक रूप से नशे के व्यापार को बढ़ावा देने वाली साबित हुई है। 1960 तक दुनिया की 34 फीसदी आबादी शहरों में निवास करती थी। अब यह आंकड़ा 50 फीसदी से भी ऊपर जा चुका है। विकासशील और विकसित दोनों प्रकार के देशों में यह देखा गया है कि शहरीकरण के साथ-साथ नशे के मामलों में वृद्धि देखी गई है।

नशे के विभिन्न मामलों में देश में सजा नशे की कुछ वस्तुओं को रखने, उपयोग करने या बेचने पर उसकी मात्रा के अनुसार अलग-अलग सजाएं निर्धारित की गई हैं। एनडीपीएस एक्ट, 1985 की धारा 16, 18(G) और 20 के अनुसार बिना लाइसेंस के अफीम, भांग या कोका पौधों की खेती करने पर 10 साल की कठोर सजा के साथ-साथ एक लाख रुपये तक का जुर्माना किया जा सकता है। जिन किसानों को इनकी खेती करने का लाइसेंस मिला हुआ है, अगर वे भी उत्पादन की मात्रा में कोई चोरी-हेराफेरी करते हुए पाए जाते हैं तो उन्हें कम से कम दस साल से लेकर 20 साल तक की सजा के साथ अधिकतम दो लाख रुपये तक का जुर्माना किया जा सकता है।

अफीम के उपयोग करने पर छह महीने की सजा का प्रावधान है, लेकिन वाणिज्यिक मात्रा से ज्यादा अफीम के साथ पकड़े जाने पर अधिकतम 20 साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है। इन पदार्थों के आयात-निर्यात, या व्यापार में साझीदार होने पर भी इतनी सजा का प्रावधान किया गया है। अगर कोई व्यक्ति नशीले पदार्थो को भारत से बाहर भेजने या लाने में अवैध रुप से लिप्त पाया जाता है तो उसे 10 से 20 साल तक की सजा दी जा सकती है। इसके साथ उसे एक से दो लाख रुपये तक का जुर्माना भी अदा करना पड़ सकता है।

नशीली वस्तुओं के व्यापार के लिए किसी परिसर के इस्तेमाल होने पर भी पकड़ी गई नशीले पदार्थ की मात्रा के अनुसार इसी प्रकार की सजाएं दी जा सकती हैं। इन अवैध व्यापारों में लिप्त किसी अपराधी को शरण देने या आर्थिक सहायता करने पर भी एक से दो लाख रुपये के जुर्माने के साथ 10 से 20 साल तक की सजा दी जा सकती है।


अगर इस तरह के अपराध में शामिल होने के लिए कोई व्यक्ति तैयारी कर रहा था तो उसे अपराध की आधी सजा तक सुनाई जा सकती है, लेकिन इस तरह के अपराध में शामिल होने के लिए किसी को उकसाने पर अपराध के समान ही सजा दी जा सकती है।

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