{"_id":"62c32aa4fc0c4571b766481f","slug":"cooperative-sector-can-play-an-important-role-in-making-india-self-reliant-says-amit-shah","type":"story","status":"publish","title_hn":"Amit Shah: केंद्रीय गृहमंत्री बोले, भारत को 'आत्मनिर्भर' बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है सहकारिता क्षेत्र","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Amit Shah: केंद्रीय गृहमंत्री बोले, भारत को 'आत्मनिर्भर' बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है सहकारिता क्षेत्र
Mon, 04 Jul 2022 11:30 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 04 Jul 2022 11:30 PM IST
सार
शाह ने कहा कि ये 70 करोड़ लोग अब बेहतर जीवन की आकांक्षा कर रहे हैं और इसे सिर्फ सहकारी क्षेत्र द्वारा ही पूरा किया जा सकता है।
विज्ञापन
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह
- फोटो : Social media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि सहकारिता क्षेत्र भारत को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही देश के 70 करोड़ गरीबों को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
शाह, जिनके पास गृह मंत्रालय का भी प्रभार है, ने सहकारी समितियों से इन 70 करोड़ लोगों की मदद करने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की अपील की। उन्होंने 100वां अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के मौके पर कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले आठ वर्षों में गरीबों की भलाई और उन्हें बिजली, रसोई गैस, आवास व स्वास्थ्य बीमा देने के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए हैं।
शाह ने कहा कि ये 70 करोड़ लोग अब बेहतर जीवन की आकांक्षा कर रहे हैं और इसे सिर्फ सहकारी क्षेत्र द्वारा ही पूरा किया जा सकता है। शाह ने कांग्रेस पार्टी पर हमला करते हुए कहा कि उन्होंने सिर्फ ‘गरीबी हटाओ’ का नारा दिया, लेकिन गरीबी को खत्म करने के लिए पर्याप्त उपाय नहीं किए। उल्लेखनीय है कि भारत में 8.5 लाख सहकारी समितियां हैं और लगभग 12 करोड़ लोग इस क्षेत्र से सीधे जुड़े हुए हैं।
विज्ञापन
विकास का सहकारी मॉडल ही देश के लिए उपयुक्त
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पूंजीवाद और साम्यवाद शासन के चरम रूप हैं और विकास का सहकारी मॉडल ही देश के लिए सबसे उपयुक्त है। सहकारिता मंत्रालय सहकारी क्षेत्र को पेशेवर और बहुआयामी बनाकर विभिन्न पहलुओं पर काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि कौशल प्रशिक्षण देने के लिए लेखांकन, विपणन और प्रबंधन जैसे विषयों पर आधारित एक सहकारी विश्वविद्यालय स्थापित किया जाएगा। शाह ने कहा कि प्रशिक्षित जनशक्ति को सहकारी समितियों में शामिल किया जा सकता है और इससे नियुक्तियों में भाई-भतीजावाद भी समाप्त होगा।
सहकारी समितियों के बीच स्व नियमन की जरूरत
शाह कहा कि कानूनों में भी बदलाव की जरूरत है, लेकिन साथ ही उन्होंने सहकारी समितियों के बीच स्व-नियमन पर जोर दिया। शाह ने कहा कि सरकार ने हाल ही में 2,516 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ सभी कार्यात्मक 63,000 प्राथमिक कृषि ऋ ण समितियों के कंप्यूटरीकरण का फैसला किया है। इस कदम से लेखांकन और बही-खाता पद्धति में पारदर्शिता आएगी।
विज्ञापन
शाह, जिनके पास गृह मंत्रालय का भी प्रभार है, ने सहकारी समितियों से इन 70 करोड़ लोगों की मदद करने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की अपील की। उन्होंने 100वां अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के मौके पर कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले आठ वर्षों में गरीबों की भलाई और उन्हें बिजली, रसोई गैस, आवास व स्वास्थ्य बीमा देने के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए हैं।
विज्ञापन
शाह ने कहा कि ये 70 करोड़ लोग अब बेहतर जीवन की आकांक्षा कर रहे हैं और इसे सिर्फ सहकारी क्षेत्र द्वारा ही पूरा किया जा सकता है। शाह ने कांग्रेस पार्टी पर हमला करते हुए कहा कि उन्होंने सिर्फ ‘गरीबी हटाओ’ का नारा दिया, लेकिन गरीबी को खत्म करने के लिए पर्याप्त उपाय नहीं किए। उल्लेखनीय है कि भारत में 8.5 लाख सहकारी समितियां हैं और लगभग 12 करोड़ लोग इस क्षेत्र से सीधे जुड़े हुए हैं।
विज्ञापन
विकास का सहकारी मॉडल ही देश के लिए उपयुक्त
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पूंजीवाद और साम्यवाद शासन के चरम रूप हैं और विकास का सहकारी मॉडल ही देश के लिए सबसे उपयुक्त है। सहकारिता मंत्रालय सहकारी क्षेत्र को पेशेवर और बहुआयामी बनाकर विभिन्न पहलुओं पर काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि कौशल प्रशिक्षण देने के लिए लेखांकन, विपणन और प्रबंधन जैसे विषयों पर आधारित एक सहकारी विश्वविद्यालय स्थापित किया जाएगा। शाह ने कहा कि प्रशिक्षित जनशक्ति को सहकारी समितियों में शामिल किया जा सकता है और इससे नियुक्तियों में भाई-भतीजावाद भी समाप्त होगा।
सहकारी समितियों के बीच स्व नियमन की जरूरत
शाह कहा कि कानूनों में भी बदलाव की जरूरत है, लेकिन साथ ही उन्होंने सहकारी समितियों के बीच स्व-नियमन पर जोर दिया। शाह ने कहा कि सरकार ने हाल ही में 2,516 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ सभी कार्यात्मक 63,000 प्राथमिक कृषि ऋ ण समितियों के कंप्यूटरीकरण का फैसला किया है। इस कदम से लेखांकन और बही-खाता पद्धति में पारदर्शिता आएगी।