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आईटी इंटरमीडिएटरी नियमों पर विवाद, बताया अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक

Sun, 06 Jan 2019 12:02 AM IST
गौरव द्विवेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव द्विवेदी Updated Sun, 06 Jan 2019 12:02 AM IST
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Controversy over IT intermediate rules

सोशल मीडिया को सुरक्षित बनाने और उस पर फर्जी खबरों व अफवाहों को फैलने से रोकने के नाम पर बनाए गए आईटी इंटरमीडिएटरी नियम लागू होने से पहले ही विवाद में घिर गए हैं। सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय (आईटी) ने शनिवार को इन नियमों का ड्राफ्ट एक बैठक में पेश किया, जिसमें विभिन्न हितधारक भी शामिल किए गए। इंटरनेट की स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले कार्यकर्ताओं, कानूनी फर्मों और पब्लिक एडवोकेसी ग्रुपों ने इन नियमों से सोशल मीडिया के सुरक्षित होने के बजाय अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक लगने का मुद्दा उठाया है। उधर, मंत्रालय ने इन नियमों पर जनता की तरफ से राय देने की आखिरी तारीख को 15 से बढ़ाकर 28 जनवरी कर दिया है। 

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बैठक में मौजूद करीब 30 विशेषज्ञों ने निजता के अधिकार, मैसेज का एनक्रिप्शन (एक से दूसरे सिरे तक संरक्षित) को तोड़ने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े सवाल उठाए। साथ ही कहा कि आईटी कानून में प्रस्तावित बदलाव सेंसरशिप को बढ़ावा देंगे और इनसे आपत्तिजनक कंटेंट को वेबसाइटों से हटाने का सरकारी लक्ष्य पूरा नहीं हो पाएगा। 
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बैठक में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से पुट्टास्वामी मामले में जारी किए गए निजता के अधिकार से संबंधित फैसले का भी जिक्र आया। पूरे मसौदे में विरोध कंपनियों को मसौदे के उस पहलू पर था, जिसमें कंपनियों को मैसेज का एनक्रिप्शन (एक से दूसरे सिरे तक संरक्षित) कोड मुहैया कराने को कहा गया है। हालांकि आईटी मंत्रालय के संयुक्त सचिव गोपालकृष्णन एस. ने सरकार की किसी भी तरह की सेंसरशिप की मंशा होने से इनकार किया। उन्होनें कहा, यह सेंसरशिप थोपने या अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक लगाने का प्रयास नहीं है। 
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सोशल मीडिया का उपयोग आतंकवादी और बुरे लोग भी कर रहे हैं और यह ऐसे ही लोगों के संदेश ट्रेस करने की कोशिश है। बैठक में औद्योगिक समूह के प्रतिनिधि, शोध और नीति क्षेत्र के बुद्धजीवी तथा वकील भी शामिल थे। आईटी मंत्रालय, गृह मंत्रालय और  नैस्कॉम के अधिकारियों के अलावा भारतीय शोध महासंघ, आईएसपीएआई, ट्विटर समेत अन्य प्रतिनिधि शामिल रहे।  


24 दिसंबर को जारी किया गया था ड्राफ्ट

आईटी मंत्रालय ने 24 दिसंबर को आईटी इंटरमीडिएटरी नियमों में संशोधन का ड्राफ्ट जारी किया था, जिसमें सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन प्लेटफार्म को सरकारी एजेंसियों के मांगने पर किसी सूचना का मूल स्रोत उपलब्ध कराने के लिए बाध्य किया गया है। शनिवार को इन नियमों पर रायशुमारी के लिए ही बैठक बुलाई गई थी।

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