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कर्नाटक में नया विवाद: कक्षा आठ की किताब में चूक, 'बुलबुल के पंख पर सवार होकर जेल से बाहर आए थे सावरकर'
Sun, 28 Aug 2022 10:55 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Sun, 28 Aug 2022 10:55 PM IST
सार
कर्नाटक में वीर सावरकर को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। यहां कक्षा आठ की कन्नड़ भाषा की किताब में कहा गया है कि सावरकर जब अंडमान निकोबार जेल में बंद थे तब वे बुलबुल के पंखों पर बैठकर जेल से बाहर आते थे।
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वीर सावरकर(फाइल फोटो)
- फोटो : SAVARKARSMARAK.COM
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विस्तार
कर्नाटक में एक बार फिर राज्य की भाजपा सरकार सवालों के घेरे में है। यहां भाजपा सरकार ने कक्षा आठ के पाठ्यक्रम में बदलाव करके वीर सावरकर से जुड़ा हुआ एक अध्याय जोड़ा गया है। नए अध्याय में लेखक केटी गट्टी के ट्रैवलॉग के कुछ अंश शामिल किए गए हैं। किताब में जोड़े गए इन अंशों से राज्य में विवाद गहरा सकता है। कन्नड़ भाषा में इस किताब में दावा किया गया है कि वीर सावरकर जब अंडमान जेल में बंद थे, तब वे बुलबुल के पंख पर बैठकर बाहर आते थे।
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गौरतलब है कि पहले कक्षा आठ की इस किताब में ये अध्याय शामिल नहीं था। इसे हाल में संशोधन करके भाजपा सरकार ने शामिल किया था। इस किताब का ये अंश अब इंटरनेट पर वायरल हो रहा है। किताब के इस अंश पर कई अध्यापकों ने आपत्ति जताई है। इन अध्यापकों का कहना है कि इस अंश को किताब में इस तरह से लिखा गया है जैसे ये कोई शाब्दिक तथ्य हो। उन्होंने कहा कि इससे छात्र भ्रमित होंगे। वहीं, किताब में संशोधन करने वाली कमेटी के अध्यक्ष का कहना है कि इसे एक अलंकार के रूप में प्रयोग किया गया है।
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बता दें कि कर्नाटक की भाजपा सरकार ने किताब में संशोधन की जिम्मेदारी रिवीजन कमेटी को सौंपी थी। इस कमेटी की अध्यक्षता रोहित चक्रतीर्थ ने की थी। हालांकि सरकार ने संशोधन के बाद ये कमेटी भंग कर दी थी।
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गौरतलब है कि कर्नाटक में ये पहली बार नहीं हैं जब सावरकर को लेकर विवाद खड़ा हुआ हो। कर्नाटक के शिवमोगा में पिछले दिनों सावरकर के पोस्टर लगाने को लेकर विवाद हुआ था। एक समूह ने सावरकर की जगह टीपू सुल्तान के पोस्टर लगाने की कोशिश की थी। इससे बवाल मच गया, जिसके बाद पूरे इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई थी।
इस विवाद के बीच श्रीराम सेना ने पूरे राज्य में वीर सावरकर के पोस्टर लगाने का एलान किया था। प्रमोद मुथालिक ने कहा था, हमने तय किया है कि पूरे राज्य में वीर सावरकर और बाल गंगाधर तिलक के 15 हजार पोस्टर लगाए जाएंगे। सावरकर मुस्लिमों के खिलाफ नहीं लड़े थे। वह स्वतंत्रता सेनानी थे और अंग्रेजों के खिलाफ लड़े थे। चेतावनी देते हुए मुथालिक ने यह भी कहा था कि अगर मुस्लिम या कांग्रेस में से किसी ने उनके पोस्टर को छुआ तो हाथ काट दिए जाएंगे। यह मेरी चेतावनी है।