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अवमानना मामला: आज खत्म हो रही है बिना शर्त माफी मांगने की समयसीमा, क्या झुकेंगे प्रशांत भूषण

Mon, 24 Aug 2020 08:18 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Mon, 24 Aug 2020 08:18 AM IST
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contempt of court case prashant bhushan deadline of unconditional forgiveness from supreme court ends today
वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook

उच्चतम न्यायालय ने वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को अदालत की अवमानना का दोषी माना है। ऐसे में सोमवार का दिन उनके लिए काफी अहम है क्योंकि आज अदालत द्वारा बिना शर्त माफी मांगने के लिए दी गई समयसीमा का आखिरी दिन है। इस वजह से सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशांत भूषण माफी मांगेंगे।

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पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने अवमानना मामले में सुनवाई करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था। शीर्ष अदालत ने भूषण को अपने बयान पर विचार करने के लिए कहा था। अदालत का कहना था कि भूषण चाहें तो 24 अगस्त तक बिना शर्त माफीमाना दाखिल कर सकते हैं। यदि ऐसा नहीं होता है तो 25 अगस्त को अदालत उनके खिलाफ सजा पर फैसला सुनाएगी। 
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मैं नहीं करता दया की अपील: प्रशांत भूषण
अदालत के फैसले पर प्रशांत भूषण ने कहा कि मुझे पीड़ा है कि मुझे अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया गया है। जिसकी महिमा मैंने दरबारी के रूप में नहीं बल्कि 30 सालों से एक संरक्षक के रूप में बनाए रखने की कोशिश की है। मैं सदमे में हूं और इस बात से निराश हूं कि अदालत इस मामले में मेरे इरादों का सबूत दिए बिना ही निष्कर्ष पर पहुंची है। उन्होंने महात्मा गांधी के एक बयान का जिक्र करते हुए कहा कि मैं दया की अपील नहीं करता हूं। अदालत से जो भी सजा मिलेगी वो मुझे मंजूर है।
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यह भी पढ़ें- प्रशांत भूषण से पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता वीसी मिश्र भी कर चुके हैं अवमानना का सामना


क्या है पूरा मामला
22 जून को वरिष्ठ वकील ने अदालत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) एसए बोबडे और चार पूर्व मुख्य न्यायाधीशों को लेकर टिप्पणी की थी। इसके बाद 27 जून के ट्वीट में प्रशांत भूषण ने सर्वोच्च न्यायालय के छह साल के कामकाज को लेकर टिप्पणी की थी। इन ट्वीट्स पर स्वत: संज्ञान लेते हुए अदालत ने उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की थी।

अदालत ने उन्हें नोटिस भेजा था। इसके जवाब में भूषण ने कहा था कि सीजेआई की आलोचना करना उच्चतम न्यायालय की गरिमा को कम नहीं करता है। उन्होंने कहा था कि पूर्व सीजेआई को लेकर किए गए ट्वीट के पीछे मेरी एक सोच है, जो बेशक अप्रिय लगे लेकिन अवमानना नहीं है।

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