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Hindi News ›   India News ›   Constitution Day : Three ways by which the constitution can be amended

संविधान दिवस विशेष : वो तीन तरीके जिनसे किया जा सकता है संविधान में संशोधन

Tue, 26 Nov 2019 04:23 AM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Tue, 26 Nov 2019 04:23 AM IST
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Constitution Day : Three ways by which the constitution can be amended

70 साल के दौरान संविधान में कुल 103 संशोधन हुए हैं। पहला संशोधन 1951 में अस्थायी संसद ने पारित किया था। सुप्रीम कोर्ट ने अब तक केवल 99वें संशोधन को असांविधानिक करार दिया है। यह राष्ट्रीय न्यायिक आयोग के गठन से संबंधित था। 

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राज्यसभा का गठन 1952 में हुआ और यह अब तक 107 संविधान संशोधनों को पारित कर चुकी है। इनमें से सिर्फ एक को लोकसभा ने नहीं माना जबकि चार संशोधन लोकसभा भंग होने के कारण निष्प्रभावी हो गए। लोकसभा द्वारा पारित 106 में से 03 संशोधनों को राज्यसभा अमान्य कर चुकी है।
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संविधान में संशोधन की प्रक्रिया

संविधान निर्माण के दौरान संविधान सभा के सदस्यों का स्पष्ट मत था कि संविधान को बदलते समय और परिवेश के अनुरूप बदलना चाहिए, लेकिन उनका यह भी मत था कि बदलाव की प्रक्रिया इतनी लचीली हो कि आसानी से संशोधन किया जा सके। भारत के संविधान के अनुच्छेद 368 में संविधान संशोधन की प्रक्रिया का प्रावधान है।

सामान्य बहुमत द्वारा

कई संवैधानिक प्रावधानों को संसद में सामान्य बहुमत के द्वारा संशोधित किया जा सकता है। इसमें नागरिकता, नए राज्यों का गठन, संसद में कोरम, पांचवें और छठे शेड्यूल में शामिल तथा अन्य प्रावधान शामिल हैं। इसकी आर्टिकल 368 में अलग से चर्चा नहीं है।

विशेष बहुमत द्वारा

संसद में विशेष बहुमत का मतलब है दोनो सदनों के दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन। इसमें राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग, देश में आपातकाल की घोषणा आदि से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।

विशेष बहुमत और राज्यों के बहुमत द्वारा

राष्ट्रपति का चुनाव, केंद्र और राज्यों के अधिकार, संविधान में संशोदन आदि से संबंधित प्रावधानों में बदलाव के लिए संसद के दोनों सदनों के विशेष बहुमत के साथ कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडलों का अनुमोदन भी अनिवार्य है।

संशोधन की प्रक्रिया

संविधान में संशोधन से संबंधित बिल संसद के किसी भी सदन में पेश किए जा सकते हैं। इसे दोनों सदनों में सदस्यों के बहुमत और वोटिंग के दौरान मौजूद सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से पास होने के बाद राष्ट्रपति के पास अनुमोदन के लिए भेजा जाता है। राष्ट्रपति की संस्तुतिु मिलने के बाद ही विधेयक कानून बनता है।

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