कांस्टेबल भर्ती: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की आरक्षित श्रेणी को सामान्य में ले जाने के खिलाफ यूपी सरकार की अर्जी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उच्चतम न्यायालय ने कांस्टेबल के पदों के लिए आरक्षित श्रेणी के तहत प्रारंभ में चयनित किए गए उम्मीदवारों से संबद्ध सीटें सामान्य श्रेणी में ले जाने के उत्तर प्रदेश सरकार के कदम को चुनौती देने वाली याचिका मंगलवार को खारिज कर दी। न्यायमूर्ति यूयू ललित, न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति ऋषिकेश राय की पीठ को उप्र सिविल पुलिस, प्रोवेंशियल आर्म्ड कांस्टेबलरी एवं अग्निशमन कर्मी की चयन प्रक्रिया और 3295 कांस्टेबलों की भर्ती में आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को सामान्य श्रेणी में ले जाने में कोई कमी नजर नहीं आई ।
न्यायमूर्ति ललित ने फैसला लिखते हुए संबद्ध मामले में शीर्ष अदालत के एक फैसले का हवाला दिया और कहा कि राज्य सरकार और उसके अधिकारी गुण-दोष के आधार पर आदेश का पालन करने और आरक्षण के सिद्धांत का पालन करने के लिए बाध्य हैं। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने प्रमोद कुमार सिंह समेत आम श्रेणी के कुछ उम्मीदवारों द्वारा दायर की गयी याचिका खारिज कर दी।
फैसले में कहा गया है, ‘3,295 अतिरिक्त पदों की उपलब्धता के साथ चीजों में थोड़ा परिवर्तन करने यदि, आरक्षित पदों के लिए पहले से चयनित उम्मीदवारों को खुली श्रेणी पदों के लिए गौर किये जाने का हक मिलता है तो यह कवायद किसी भी मायने से अवैध या गैरकानूनी नहीं मानी जा सकती है। ये 3295 पद 2013 में 41,610 पदों को भरने के लिए शुरू की गयी चयन प्रक्रिया का हिस्सा हैं और ऐसे बदलाव राज्य ने सही ही किया है।’