मक्का मस्जिद ब्लास्ट: 2 मिनट में ढह गई कांग्रेस की भगवा आतंकवाद की थ्योरी
करीब 11 साल पहले संप्रग-1 की सरकार में मक्का मस्जिद ब्लास्ट मामले में तैयार की गई भगवा आतंकवाद की थ्योरी एनआईए कोर्ट में दो मिनट में भरभरा कर गिर गई। जज ने सिर्फ दो मिनट में सुनाए फैसले में इसे खारिज कर दिया। शुरुआती जांच में हैदराबाद पुलिस ने इस आतंकी वारदात में मुस्लिम आतंकी संगठन की ओर इशारा किया था।
हालांकि, जांच की कमान सीबीआई के हाथ आते ही अचानक पूरा मामला भगवा (हिंदू) आतंकवाद से जुड़ गया। हिंदू आतंकवाद की थ्योरी जब गढ़ी गई तब केंद्र में शिवराज पाटिल गृह मंत्री थे। उनके बाद गृह मंत्री बने सुशील कुमार शिंदे के समय भगवा आतंकवाद का जोर-शोर से प्रचार किया गया।
सीबीआई ने धमाकों के तार हिंदूवादी संगठन अभिनव भारत से जोड़ दिए। मामले में सीबीआई ने स्वामी असीमानंद सहित संगठन से जुड़े 10 लोगों को आरोपी बनाया। 68 चश्मदीद गवाहों के बयान दर्ज किए, जिनमें 54 गवाह अदालत में मुकर गए।
सीबीआई ने चश्मदीदों के अतिरिक्त करीब 200 लोगों से पूछताछ की थी। हालांकि, एनआईए कोर्ट ने असीमानंद सहित पांच आरोपियों को यह कहते हुए बरी कर दिया कि सबूतों के आाधर पर इनके खिलाफ दोष साबित नहीं होते।
कर्नाटक चुनाव से पहले बढ़ सकती है कांग्रेस की मुश्किल
एनआईए कोर्ट का फैसला ऐसे समय आया है जब अगले ही महीने कर्नाटक में विधानसभा चुनाव होने हैं। भगवा आतंकवाद के कारण हुए सियासी नुकसान के बाद पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने सॉफ्ट हिंदुत्व पर चलने की रणनीति बनाई है।
गुजरात विधानसभा चुनाव में इस रणनीति ने अपना असर भी दिखाया था। अब जिस तरह भगवा आतंकवाद की थ्योरी धराशायी हुई है, उससे कांग्रेस बचाव की जबकि भाजपा आक्रामक मुद्रा में है। कांग्रेस ने पहली बार भगवा आतंकवाद से किनारा करते हुए कोर्ट के फैसले का सम्मान करने की बात कही है। भाजपा की रणनीति चुनाव में लिंगायत को अलग धर्म का दर्जा देने का दांव चलने वाली कांग्रेस को फैसले के सहारे घेरने की है।