{"_id":"586f86974f1c1b945d15a545","slug":"congress-shall-be-disclosed-its-polices-for-up-election-next-week","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"यूपी में कांग्रेस अकेले लड़ेगी या बनेगी सपा की तारणहार, सस्पेंस बरकरार","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
यूपी में कांग्रेस अकेले लड़ेगी या बनेगी सपा की तारणहार, सस्पेंस बरकरार
शशिधर पाठक
Updated Fri, 06 Jan 2017 06:35 PM IST
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस अगले सप्ताह अपना पत्ता खोलेगी। पार्टी के उच्चपदस्थ सूत्रों के अनुसार सूबे में राजनीतिक तैयारियां जारी हैं। पार्टी ने प्रत्याशी के चयन के लिए होमवर्क पूरा कर लिया है। पार्टी के रणनीतिकारों को अनुमान है कि आठ जनवरी के बाद सूबे की राजनीति में समाजवादी पार्टी को लेकर मचे धुंध के बादल छंट जाएंगे और विधानसभा चुनाव के बाबत पहल शुरू हो जाएगी। कांग्रेस पार्टी इस स्थिति का इंतजार कर रही है।
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यूपी में कांग्रेस के खामोश चुनाव प्रचार अभियान को लेकर पार्टी के एक सचिव का कहना है कि ऐसा कुछ भी नहीं है। सबकुछ ठीक चल रहा है। कांग्रेस पुरानी राजनीतिक पार्टी है और हम अपने अनुभव के हिसाब से आगे बढ़ रहे हैं। फिलवक्त यूपी में चुनाव की रणनीति को लेकर पार्टी महासचिव गुलाम नबी आजाद, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर, राज्यसभा सांसद संजय सिंह, प्रमोद तिवारी लगातार मंथन में जुटे हैं। कांग्रेस उपाध्यक्ष का कार्यालय प्रदेश की रणनीति को लेकर नेताओं के संपर्क में है। व्हाट्सअप तथा मेल के जरिए राहुल गांधी से लगातार संवाद प्रक्रिया जारी है।
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क्या है संभावना यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनकी कोर टीम के साथ बने सामंजस्य पर कांग्रेस पूरा भरोसा करके चल रही है। सूत्र बताते हैं कि यही वजह है अभी कांग्रेस ने चुनाव प्रचार के अभियान को भी गति नहीं दी है। इसके बजाय पार्टी ने सीटों पर प्रत्याशियों की स्क्रीनिंग समेत अन्य पर जोर देना शुरु किया है।
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माना जा रहा है कि आठ जनवरी तक समाजवादी पार्टी के भीतर चल रहा घमासान निर्णायक स्थिति में आ जाएगा। इसके बाद अखिलेश के नेतृत्व के वाली समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और कुछ सहयोगी दलों के साथ गठबंधन मूर्त रूप ले सकती है। सूत्र बताते हैं अखिलेश यूपी में पूरी तरह से गठबंधन के पक्ष में हैं। इतना ही नहीं अखिलेश खुद भी पिछले कुछ महीने लगातर खुद भी घटबंधन के पक्ष में बोल रहे हैं।
लेकिन रालोद को कुछ नहीं पता
समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर चर्चा में राष्ट्रीय लोकदल को भी शामिल करने की योजना है, लेकिन राष्ट्रीय लोकदल के शीर्ष नेताओं का कहना है कि अभी तक गठबंधन को लेकर किसी से कोई चर्चा नहीं हुई है। जद(यू) के केसी त्यागी का भी कहना है कि समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव से मुलाकात के बाद कोई चर्चा नहीं हुई है। केसी त्यागी का कहना है कि अभी राष्ट्रीय लोकदल, जद(यू), बामसेफ, एनसीपी, जद(एस) अपनी अलग राह पर चल रहे हैं। त्यागी का कहना है कि हमें कोई राजनीतिक दल गठबंधन पर चर्चा के लिए बुलाएगा तो जाएंगे, लेकिन खुद कोई पहल नहीं की जाएगी। वहीं रालोद के नेताओं का कहना है कि कोई एक दिन में गठबंधन का स्वरुप तो तय नहीं हो जाता। वैसे भी अब चुनाव आयोग तारीख का ऐलान कर चुका है। बचा ही क्या है?
क्यों होगा गठबंधन
कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि भाजपा की पूरी रणनीति धर्मनिरपेक्ष वोटों के बंटवारे पर टिकी है। मुजफ्फरनगर दंगा के बहाने भी प्रदेश की राजनीति गरमाई जा रही है। कुल मिलाकर पश्चिमी यूपी में जाट बनाम अल्पसंख्यक वोटों की रणनीति का तानाबाना बुना जा रहा है। इसी तरह से प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी समीकरण बन रहे हैं। इस स्थिति से कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय लोकदल तीनों दल वाकिफ हैं। तीनों ही राजनीतिक दलों को नफा-नुकसान का भी पूरा अनुमान है। इसलिए एक ताकत बनकर धर्मनिरपेक्ष वोटों का बंटवारा रोकना प्रमुख है। कांग्रेस के नेता भी मानकर चल रहे हैं कि यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी इससे सहमत हैं।
क्यों होगा गठबंधन
कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि भाजपा की पूरी रणनीति धर्मनिरपेक्ष वोटों के बंटवारे पर टिकी है। मुजफ्फरनगर दंगा के बहाने भी प्रदेश की राजनीति गरमाई जा रही है। कुल मिलाकर पश्चिमी यूपी में जाट बनाम अल्पसंख्यक वोटों की रणनीति का तानाबाना बुना जा रहा है। इसी तरह से प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी समीकरण बन रहे हैं। इस स्थिति से कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय लोकदल तीनों दल वाकिफ हैं। तीनों ही राजनीतिक दलों को नफा-नुकसान का भी पूरा अनुमान है। इसलिए एक ताकत बनकर धर्मनिरपेक्ष वोटों का बंटवारा रोकना प्रमुख है। कांग्रेस के नेता भी मानकर चल रहे हैं कि यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी इससे सहमत हैं।
हड़बड़ी में नहीं है कांग्रेस
राहुल गांधी
- फोटो : amar ujala
यूपी को लेकर कांग्रेस पार्टी किसी तरह की हड़बड़ी में नहीं है। बाद सबसे बड़ा राजनीतिक झटका कांग्रेस को ही लगा है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार कांग्रेस को जो खोना है खो चुकी है। हम जानते हैं कि पूरी ताकत लगाने के बाद भी सत्ता में तो आने से रहे? इसलिए गठबंधन हो या न हो इसकी चिंता उसे(सपा की तरफ ईशारा) होनी चाहिए, जिसके पास यूपी की सत्ता में बने रहने की संभावना है। कांग्रेस को 2017 के विधानसभा चुनाव में अच्छी संख्या में सीटें न मिली तो पांच साल के लिए यही सही।
आठ को लौटेंगे कांग्रेस उपाध्यक्ष
राहुल गांधी विदेश में हैं। वह नये साल की छुट्टियां मनाने गए हैं। कांग्रेस उपाध्यक्ष आठ जनवरी को लौटेंगे। हालांकि इसके बाद उनका चीन दौरा भी प्रस्तावित है, लेकिन माना जा रहा है कि उनके नई दिल्ली आते ही पार्टी की राजनीतिक तेजी से बढ़ जाएंगी। इस दौरान कांग्रेस उपाध्यक्ष पार्टी की भावी रणनीति को भी अंतिम रूप देंगे। विदेश दौरे से लौटने के बाद राहुल पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड के नेताओं तथा पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। 11 नवंबर को होने वाले राष्ट्रीय सम्मेलन की रणनीति पर चर्चा होगी और तमाम राजनीतिक गतिविधियों में व्यस्त होंगे।
आठ को लौटेंगे कांग्रेस उपाध्यक्ष
राहुल गांधी विदेश में हैं। वह नये साल की छुट्टियां मनाने गए हैं। कांग्रेस उपाध्यक्ष आठ जनवरी को लौटेंगे। हालांकि इसके बाद उनका चीन दौरा भी प्रस्तावित है, लेकिन माना जा रहा है कि उनके नई दिल्ली आते ही पार्टी की राजनीतिक तेजी से बढ़ जाएंगी। इस दौरान कांग्रेस उपाध्यक्ष पार्टी की भावी रणनीति को भी अंतिम रूप देंगे। विदेश दौरे से लौटने के बाद राहुल पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड के नेताओं तथा पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। 11 नवंबर को होने वाले राष्ट्रीय सम्मेलन की रणनीति पर चर्चा होगी और तमाम राजनीतिक गतिविधियों में व्यस्त होंगे।