Congress convention: क्या भारत जोड़ो यात्रा के बाद भी 'पिछलग्गू' बनेगी कांग्रेस? इस माह तय होगा गठबंधन का खाका
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विस्तार
कांग्रेस ने जिस तरीके से भारत जोड़ो यात्रा को अपनी अब तक की सबसे सफल यात्रा के तौर पर देखा है, वही सफलता अब कांग्रेस के लिए मुसीबत भी बन रही है। दरअसल ये मुसीबत किसी और तरह से नहीं, बल्कि उस गठबंधन की राह में आड़े आ रही है, जिसमें यह तय होना है कि विपक्ष अगर एकजुट होता है, तो उनका नेता कौन होगा। कांग्रेस की ओर से उठने वाली आवाजों में राहुल गांधी का नाम सबसे आगे रखा जा रहा है। इसके पीछे तर्क राहुल गांधी की उस भारत जोड़ो यात्रा का दिया जाता है, जिसमें राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी की छवि बड़े विपक्षी नेता के तौर पर सबसे ज्यादा उभरकर सामने आई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे में बनने वाले बड़े विपक्षी गठबंधन में कांग्रेस से जुड़े नेता यह स्वीकार करने की स्थिति में नहीं हैं कि भारत जोड़ो यात्रा जैसे सफल आंदोलन के बाद वह किसी दूसरे दल के नेता को अपना नेता मानें। या फिर पिछलग्गू बन कर के उनके पीछे खड़े रहें।
2024 के लोकसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आते जा रहे हैं, तो सियासी सरगर्मियां भी उसी तरीके से लगातार बढ़ती जा रही हैं। सत्ता पक्ष जहां 2024 में नरेंद्र मोदी के नाम पर चुनाव की जमीन तैयार कर आगे बढ़ रहा है। वहीं विपक्ष के नेता अलग-अलग धुरी में अभी फंसे हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषक एसएन झा कहते हैं कि यह बात बिल्कुल सच है कि अब लोकसभा के चुनाव के लिए वक्त उतना नहीं बचा है। ऐसे में सभी राजनैतिक दल सियासी गुणा भाग के माध्यम से सरकार बनाने के पक्ष में गठबंधन से लेकर तमाम रास्तों पर निकल पड़े हैं। झा कहते हैं कि जिस तरीके से विपक्षी एक साथ मिलकर एक बड़ा संगठन तैयार करना चाहते हैं, उसमें कांग्रेस के लिए कुछ तकनीकी दिक्कतें जरूर सामने आ रही हैं। वह कहते हैं कि इसमें सबसे बड़ी समस्या कांग्रेस के लिए उनकी भारत जोड़ो यात्रा की सफलता है। दरअसल कांग्रेस ने जिस तरीके से राहुल गांधी के नेतृत्व में भारत जोड़ो यात्रा को सफल किया, उससे न सिर्फ कांग्रेस बल्कि राहुल गांधी की छवि पूरी तरीके से निखर कर सामने आई है। झा कहते हैं कि यह बात भी सच है कि जब कोई पार्टी या कोई नेता देश में इतने बड़े आंदोलन के तौर पर इतनी बड़ी यात्रा करता है, तो वह इसलिए नहीं करता है कि सियासत में उसको पिछलग्गू बनकर चलना पड़े।
कांग्रेस से जुड़े वरिष्ठ नेता बताते हैं कि अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की नीति गठबंधन को लेकर क्या होगी यह तीन दिन बाद रायपुर में शुरू होने वाले अधिवेशन में तय हो सकती है। लेकिन कांग्रेस के नेता यह बात जरूर कहते हैं कि उनके नेताओं और कार्यकर्ताओं की महीनों तक पदयात्रा सिर्फ इसलिए नहीं हुई कि वे किसी भी दल के पीछे खड़े हो जाएं। उनका कहना है जिस तरीके से अभी प्रमुख विपक्षी दलों के तौर पर कांग्रेस न सिर्फ बड़े संगठनात्मक ढांचे और नेतृत्व के साथ आगे बढ़ रही है। उसे सभी विपक्षी दलों को भी ध्यान में रखना चाहिए और अगर किसी भी तरीके की नई सियासी गठबंधन की राजनीति तय की जा रही है, तो उसमें इसका ख्याल रखना बेहद जरूरी भी होगा। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि जो उनके पुराने सियासी गठबंधन की ताकत रही है, वह अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों में भी रहने वाली है। लेकिन वह यह बात जोर देकर जरूर कहते हैं कि कांग्रेस किसी भी तरीके से उस समझौते के पक्ष में नहीं होगी, जिसमें वह पिछलग्गू बनकर खड़ी हो।
दरअसल बीते कुछ समय से जिस तरीके से नीतीश कुमार कांग्रेस के साथ मिलकर के बड़े गठबंधन की बात कर रहे हैं। उससे सियासी दलों में तमाम तरह की चर्चाएं भी हो रही हैं। राजनीतिक विश्लेषक एसएन झा कहते हैं कि जिस तरीके से नीतीश कुमार का झुकाव कांग्रेस के लिए बना हुआ है, उससे कई तरह के सियासी संकेत भी मिल रहे हैं। हालांकि वह यह भी कहते हैं कि केसीआर ने देश की राजनीति में कुछ अन्य अलग राजनीतिक दलों के लिए विकल्प के तौर पर एक रास्ता जरूर तैयार करना शुरू किया है, वह भी 2024 के लोकसभा चुनावों में बड़ा रोचक होने वाला है। वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक अनिरुद्ध चतुर्वेदी कहते हैं कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा से पहले जिस तरह से कांग्रेस के नेताओं में आत्मविश्वास था, वह इस यात्रा के बाद न सिर्फ बढ़ा है, बल्कि आने वाले चुनावों की तैयारियों के लिहाज से बहुत मजबूत भी हुआ है। ऐसे में जब गठबंधन की सियासत आगे बढ़ती है, तो पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं का न सिर्फ ध्यान रखना होता है, बल्कि हाल के दिनों में की गईं रैलियों, यात्राओं, सम्मेलनों और आंदोलनों की पृष्ठभूमि को भी देखना पड़ता है।
हालांकि 2024 को लेकर कांग्रेस पार्टी में गठबंधन को लेकर क्या स्वरूप होगा, यह 24 से 26 फरवरी के बीच में होने वाले रायपुर के कांग्रेस अधिवेशन में तय होगा। पार्टी से जुड़े वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि राष्ट्रीय अधिवेशन में बहुत सारे मुद्दे रखे जाएंगे। जिसमें कांग्रेस न सिर्फ आगे की रणनीति पर विचार करेगी, बल्कि एक लंबा खाका तैयार करके पार्टी को आगे बढ़ाने का पूरा विजन ड्राफ्ट भी तैयार करेगी। पार्टी से जुड़े वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन उस वक्त हो रहा है, जब कांग्रेस का एक सबसे सफल भारत जोड़ो यात्रा का आयोजन पूरा हो चुका है। इसके अलावा कांग्रेस हाथ से हाथ जोड़ो अभियान को पूरे देश भर में चला रही है। इन सबसे अलग कांग्रेस ने पिछले साल उदयपुर में आयोजित अपने चिंतन शिविर में जिन मसौदों को पारित किया था, उसे भी शिविर के निश्चित पटल पर रखा जाएगा। फिलहाल गठबंधन की किसी भी रणनीति पर कांग्रेस के बड़े नेता ने स्पष्ट तौर पर तो कुछ भी कहने से मना किया। लेकिन माना जा रहा है कि फरवरी के इसी हफ्ते में होने वाले राष्ट्रीय अधिवेशन में कांग्रेस 2024 के लोकसभा चुनाव का पूरा खाका तैयार कर लेगी, जिसमें सियासी गठबंधन का स्वरूप क्या होगा इसकी पूरी रूपरेखा भी तय कर ली जाएगी।