कांग्रेस ने मोदी के वादों को बताया 'जुमला', आंकड़ों के साथ करते हैं खिलवाड़
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प्रधानमंत्री मोदी के दो मीडिया घरानों को दिए साक्षात्कार के दौरान पूछे गए सवालों के जवाबों पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने कहा कि मोदी ने साक्षात्कार के नाम पर आत्मभाषण दिया है, जिसका तथ्यों से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं रहा है। कांग्रेस ने मोदी से नौकरियों, राफेल, जीएसटी और एनआरसी समेत तमाम मुद्दों पर जवाब मांगा है।
मोदी के पास गिनाने के लिए तीन उपलब्धियां भी नहीं
रविवार को कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन सवा चार साल खत्म होने बाद भी साक्षात्कार में उनके पास बताने के लिए तीन उपलब्धियां भी नहीं थीं। वहीं अब प्रधानमंत्री 48 महीने और मांग रहे हैं और कहते हैं कि 2022 में जवाब देंगे। लोकतंत्र में प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी बनती है कि वह रोजाना, हर घंटे जनता के सवालों का जवाब दे।
आकड़ों पर करते हैं गलतबयानी
खेड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री हर चीज के पीछे विरासत की विफलता का रोना रोने लगते हैं। पहले मोदी जी 60 महीने मांगते थे, लेकिन अब जब चुनावों में 7-8 महीने बचे हैं, तो विरासत को कोसने लगते हैं। एक इंटरव्यू में मोदी कहते हैं कि नौकरियों का डाटा नहीं हैं, तो दूसरे में कहते हैं कि उन्होंने एक करोड़ नौकरियां दी। खेड़ा ने कहा कि मोदी आंकड़ों को लेकर गलतबयानी करते हैं और आंकड़ों के साथ खिलवाड़ करते हैं। इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन का कहना है कि देश में 2019 तक 77 फीसदी नौकरियां खतरे में हैं, लेकिन प्रधानमंत्री उस पर चुप्पी साध लेते हैं। नौकरियों को लेकर असलियत सामने न आ पाए, तो मोदी सरकार लेबर ब्यूरो के सर्वे पर रोक लगा देती है। जबकि आज तक किसी सरकार ने लेबर ब्यूरो के सर्वे पर रोक नहीं लगाई।
चुनावों में गुजरात मॉडल भूले
वहीं मोदी को मुद्रा योजना पर घेरते हुए खेड़ा ने कहा कि इस योजना में 91 फीसदी लोगों को 23 हजार का लोन मिला है। इतने पैसे में तो पकोड़े की दुकान भी नहीं खुलती। वहीं विकास के नाम पर अब मोदी स्पीडी विकास और डबल विकास की बाते करते हैं, लेकिन विधानसभा चुनावों के दौरान गुजरात जाकर अपने 'गुजरात मॉडल' को ही भूल जाते हैं, क्योंकि मोदी जानते हैं कि विकास एक 'जुमला' है।
जीएसटी से 20-25 साल पीछे हुआ देश
कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि जीएसटी को मुश्किल बनाने के बाद मोदी जीएसटी की सफलता के गुण गाते हैं। मोदी कहते हैं कि बिजनेस करना आसान कर दिया, लेकिन मुश्किल प्रक्रिया और सॉफ्वेयर की विफलता के चलते छोटे व्यापारी को रिफंड मिलना कठिन हो गया है। यहां तक कि वह व्यापार छोड़ने के लिए मजूबर हो रहा है। सरकार सरलीकरण के नाम पर रोजाना नियम बदलती है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने बिजनेस को 20-25 साल पीछे कर दिया है। वहीं सरकार ने 6 हजार 40 करोड़ रुपए जीएसटी मिलने का दावा किया था, लेकिन लक्ष्य से 517 करोड़ कम क्यों रह गया, सरकार इसका जवाब दे।
एनआरसी पर शाह को बोला शहंशाह
एनआरसी ड्राफ्ट पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के घेरते हुए कांग्रेस प्रवक्ता ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट से ऊपर बताते हुए कहा कि शाह संसद में खड़े होकर सभी को घुसपैठिया बताते हैं। वहीं प्रधानमंत्री और गृह मंत्री कुछ और जवाब देते हैं। खेड़ा ने शाह को शहंशाह बोलते हुए कहा कि असम में एनआरसी ढंग से लागू हो नहीं पा रहा है और वह बाकी राज्यों में एनआरसी लागू करने की बात कर रहे हैं। खेड़ा ने कहा कि एनआरसी को लाने वाली कांग्रेस है, लेकिन 30 नवंबर 2017 को मोदी सरकार कानून व्यवस्था का हवाला देकर सुप्रीम कोर्ट में एनआरसी को रोकने के लिए गुहार लगाती है। उन्होंने कहा कि एनआरसी पर 37 सुनवाइयों में सरकार ने रोकने की भरसक कोशिश की, लेकिन कोर्ट के निर्देश पर लागू करना पड़ा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को एनआरसी की प्रक्रिया को लेकर आपत्ति है, कांग्रेस की मांग है कि चाय बागानों में काम करने वाले लोगों, गुरखों की हितों की रक्षा हो और इन लोगों का नाम उस लिस्ट में हो।
पूछा अवैध बंग्लादेशियों पर रुख
वहीं अवैध बंग्लादेशियों को वापस भेजने के मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरते हुए खेड़ा ने कहा कि यूपीए 1 और 2 में 82 हजार 728 अवैध बंग्लादेशियों को वापस भेजा गया। वहीं मोदी सरकार ने केवल 1 हजार 822 अवैध बंग्लादेशी वापस भेजा। कांग्रेस ने सवाल पूछा कि सरकार का अवैध बंग्लादेशियों को लेकर क्या रुख है, स्पष्ट करे।
राफेल पर पूछे सवाल
राफेल डील पर भी कांग्रेस ने एक बार मोदी सरकार को घेरा। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री से डील को लेकर सवालों के जवाब मांगे हैं। कांग्रेस ने कहा कि साक्षात्कार में राफेल डील पर मोदी बड़ी सफाई से निकलने की कोशिश की। खेड़ा के मुताबिक मोदी बताएं कि प्रति एयरक्राफ्ट की कीमत क्या है? कैबिनेट कमेटी ऑफ सिक्योरिटी से अप्रूवल क्यों नहीं लिया, साथ ही नई आरएफपी क्यों लेकर आए? एचएएल से ठेका क्यों लिया और ऋण के नीचे दबी कंपनी को ऑफसेट ठेका क्यों दिया। कांग्रेस ने कहा कि बोलने के शौकीन प्रधानमंत्री इन सवालों के जवाब दें।