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कांग्रेस फेरबदल: अहम नेता किए गए दरकिनार, क्या फिर होगी बगावत?
Sun, 13 Sep 2020 02:01 AM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Sun, 13 Sep 2020 02:01 AM IST
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Sonia gandhi, Rahul Gandhi, Priyanka Gandhi
- फोटो : PTI
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नए अध्यक्ष के लिए आंतरिक चुनाव से पहले कांग्रेस ने पार्टी संगठन में बड़ा फेरबदल किया है। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि यह सारी कवायद राहुल गांधी को फिर से पार्टी की बागडोर सौंपने की है। इसके संकेत पार्टी की अहम समितियों में दिग्विजय सिंह, सलमान खुर्शीद और तारिक अनवर जैसे दिग्गज नेताओं की वापसी और कपिल सिब्बल, मनीष तिवारी, शशि थरूर और वीरप्पा मोइली जैसे असंतुष्ट नेताओं को नजरअंदाज किए जाने से मिल रहे हैं।
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क्या फिर होगी बगावत?
हालांकि राजनीतिक समीक्षकों का यह भी मानना है कि संगठन में हालिया बदलाव से असंतुष्ट सुर पूरी तरह से शांत नहीं होंगे। यह देखना अभी बाकी है कि देश की सबसे पुरानी पार्टी में सभी कुछ ठीक रहता है फिर कोई बगावत होती है क्योंकि पार्टी में बड़े पैमाने पर सुधार की मांग करने वालों को आपस ही में अलग-थलग कर दिया गया है। इनमें से कुछ को संगठन में जगह दी गई तो कुछ को सोच विचार के लिए मोहलत मिली है और अन्य को दरकिनार कर दिया गया है। कई नेताओं और राजनीतिक समीक्षकों की राय है कि कुछ पुराने दिग्गज नेताओं को संगठन में ‘23 असंतुष्ट’ नेताओं की काट के लिए शामिल किया गया है। इन असंतुष्ट नेताओं ने अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को खत लिखकर पार्टी संगठन में आमूलचूल बदलाव की मांग की थी।
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पार्टी में शनिवार को किए गए फेरबदल में राहुल गांधी की छाप स्पष्ट तौर पर दिखाई दे रही है। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल के करीबी माने जाने वाले रणदीप सिंह सुरजेवाला और जितेंद्र सिंह वरिष्ठ नेता तारिक अनवर के साथ महासचिव बनाया गया है। वहीं नवगठित केंद्रीय चुनाव समिति में भी राहुल के विश्वस्त मधुसूदन मिस्त्री को अध्यक्ष बनाया गया है और कृष्ण बायरे गौड़ा व एस जोतिमणि को सदस्य नियुक्त किया गया है। केंद्रीय मंत्री रहे पवन कुमार बंसल और राजीव शुक्ला की भी पार्टी संगठन में वापसी हुई है। इन दोनों नेताओं के पास अभी तक पार्टी में कोई अहम पद नहीं था।
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दिग्विजय फिर आए गांधी परिवार के करीब
कभी सबसे करीबियों में शुमार दिग्विजय सिंह को राहुल ने 2018 में कांग्रेस कार्यसमिति से हटा दिया था। ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी छोड़ने के बाद दिग्विजय सिंह फिर से गांधी परिवार के करीब आ गए हैं। कई मौके पर वह खुलकर प्रियंका गांधी वाड्रा और राहुल गांधी के नेतृत्व का समर्थन कर चुके हैं। फर्रुखाबाद लोकसभा चुनाव में हार के बाद से पार्टी में हाशिये में चल रहे सलमान खुर्शीद की वापसी चौंकाने वाली है। वह भी खुलकर गांधी परिवार के नेतृत्व का समर्थन करते रहे हैं। सीडब्ल्यूसी में स्थायी आमंत्रित सदस्य बनाए जाने के साथ ही उन्हें हाल में बनाई गई पांच सदस्यीय समिति का समन्वयक नियुक्त किया गया था। इस समिति को सरकार द्वारा लाए गए अहम अध्यादेशों पर पार्टी का रुख तय करना है।
‘24 अकबर रोड’ किताब के लेखक और वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई का कहना है कि दिग्विजय, खुर्शीद और अनवर की पार्टी में वापसी पत्र लिखने वाले नेताओं को जवाब है। सोनिया गांधी ने इस एक मास्टर स्ट्रोक से असंतुष्ट खेमे की धार कुंद कर दी है। पत्र लिखने वाले नेता अब तीन श्रेणियों में बंट गए हैं, एक जिन्हें पार्टी की किसी न किसी समिति में रखा गया है, कुछ को सोचने का वक्त दिया गया है तो कुछ को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज के निदेशक संजय कुमार ने भी किदवई की राय से सहमति जताई। उन्होंने कहा कि पत्र मुद्दे से दिग्विजय, खुर्शीद और अनवर को फायदा हुआ। हालांकि उन्होंने कहा कि पार्टी संगठन में बदलाव से असंतुष्ट पूरी तरह से शांत नहीं होंगे।
खरगे ने सुरजेवाला को कर्नाटक का प्रभारी बनाए जाने का किया स्वागत
वरिष्ठ कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कर्नाटक का प्रभारी बनाए जाने के लिए रणदीप सिंह सुरजेवाला को बधाई दी। साथ ही उन्होंने कांग्रेस कार्यसमिति में बदलाव का भी स्वागत किया। बदलाव के तहत खरगे को महासचिव पद से हटा दिया गया है।