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72 हजार सालाना देने के लिए चाहिए 3.6 लाख करोड़ रुपये, गरीब कौन यह भी तय नहीं
Tue, 26 Mar 2019 09:21 AM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Priyesh Mishra
Updated Tue, 26 Mar 2019 09:21 AM IST
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प्रेस कांफ्रेंस करते राहुल गांधी
- फोटो : ANI
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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को चुनावी वादा किया कि उनकी पार्टी सत्ता में आई तो 20 फीसदी सबसे गरीब परिवारों को सालाना 72 हजार रुपये न्यूनतम आय के रूप में दिए जाएंगे। मतलब हर महीने 6 हजार रुपये। इस घोषणा से देश के पांच करोड़ परिवारों के लगभग 25 करोड़ लोगों को फायदा पहुंचेगा।
अब सवाल यह उठ रहा है कि सैद्धांतिक रूप से ऐसा करना तो संभव है लेकिन इसके लिए खर्च होने वाला 3.6 लाख करोड़ रुपये कहां से आएंगे। यह साफ नहीं किया गया।
कुछ एक्सपर्ट्स के अनुसार न्यूनतम आय देने के लिए 3.6 लाख करोड़ कहां से आएगा। यदि इसके साथ विभिन्न योजनाओं में दी जा रही सब्सिडी को जारी रखा गया तो सरकार का घाटा कई गुना बढ़ जाएगा। यह भी निश्चित नहीं है कि ग्रामीण क्षेत्रों और शहरी क्षेत्रों में यह निर्धारित कैसे होगा कि किसकी आय गरीबी रेखा से नीचे है।
साल 1971 के आंकड़ों के अनुसार देश की कुल आबादी 54.8 करोड़ में 31 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे थे। जबकि साल 2019 में भारत की जनसंख्या 136 करोड़ है और 35 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं।
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अब सवाल यह उठ रहा है कि सैद्धांतिक रूप से ऐसा करना तो संभव है लेकिन इसके लिए खर्च होने वाला 3.6 लाख करोड़ रुपये कहां से आएंगे। यह साफ नहीं किया गया।
कुछ एक्सपर्ट्स के अनुसार न्यूनतम आय देने के लिए 3.6 लाख करोड़ कहां से आएगा। यदि इसके साथ विभिन्न योजनाओं में दी जा रही सब्सिडी को जारी रखा गया तो सरकार का घाटा कई गुना बढ़ जाएगा। यह भी निश्चित नहीं है कि ग्रामीण क्षेत्रों और शहरी क्षेत्रों में यह निर्धारित कैसे होगा कि किसकी आय गरीबी रेखा से नीचे है।
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साल 1971 के आंकड़ों के अनुसार देश की कुल आबादी 54.8 करोड़ में 31 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे थे। जबकि साल 2019 में भारत की जनसंख्या 136 करोड़ है और 35 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं।
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गरीबों की पहचान के लिये सरकार ने कुल 13 सूचक तय किये हैं
- परिवार द्वारा धारित भूमि,
- मकान का प्रकार
- प्रति व्यक्ति पहनने के कपड़े की उपलब्धता
- खाद्य सुरक्षा
- स्वच्छता
- उपभोक्ता वस्तुओं का स्वामित्व
- शिक्षा
- श्रम
- जीविकोपार्जन के साधन
- बच्चों का स्तर
- देनदारी
- पलायन
कौन तय करता है गरीबी ?
भारत में गरीबी की परिभाषा तय करने का अधिकृत दायित्व नीति आयोग को सौंपा गया है। नीति आयोग इस बात से सहमत है कि किसी भी व्यक्ति को अपने जीवन की आवश्यकतओं की पूर्ति के लिए न्यूनतम रूप से दो वस्तुयें उपलब्ध होनी ही चाहिए- संतोषजनक पौष्टिक आहार, सामान्य स्तर का कपड़ा एक उचित ढंग का मकान और अन्य कुछ सामग्रियाँ जो किसी भी परिवार के लिए जरूरी है।
- न्यूनतम शिक्षा, पीने के लिये स्वच्छ पानी और साफ पर्यावरण। यह राज्य की जिम्मेदारी है कि वह इन बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये जो कुछ भी कर सकती हैं करे।