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कांग्रेस महाधिवेशन : राजनीतिक प्रस्ताव में गठबंधन पर हामी, कर्नाटक में दिख सकता है पहला प्रयोग
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Sun, 18 Mar 2018 01:24 AM IST
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कांग्रेस महाधिवेशन
- फोटो : PTI
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कांग्रेस ने अपने 84वें महाधिवेशन में गठबंधन की राजनीति को और मजबूती देने घोषणा की है। पार्टी की ओर से पेश राजनीतिक प्रस्ताव में कहा गया है कि सभी समान विचारधारा वाले दलों के सहयोग को व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। 2019 के आम चुनावों में भाजपा-संघ को हराने के लिए साझा कार्यप्रणाली विकसित की जाएगी। इसका पहला प्रयोग कर्नाटक में आने वाले विधानसभा चुनाव में होगा।
अधिवेशन में चुनाव के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के मैदान पर काम करने की जरूरत पर भी बल दिया गया। मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रस्ताव पेश करते हुए कर्नाटक से आए कार्यकर्ताओं से कहा कि उन्हें घर-घर जाकर वोटरों को तैयार करना होगा।
राजनीतिक प्रस्ताव में महिला सशिक्तकरण, युवा, सामाजिक न्याय, दलितों, आदिवासियों एवं अल्पसंख्यकों पर अत्याचार, संघ-भाजपा, भ्रष्टाचार, आंतरिक और बाहरी सुरक्षा का बिगड़ता माहौल, आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा, न्यायपालिका, दसवीं अनुसूची, चुनाव संचालन, एक साथ चुनाव और मीडिया की निष्पक्षता और तानाशाही राज में आवाज को दबाने के प्रयास जैसे मुद्दों के जरिये केंद्र सरकार पर हमला बोला गया है। इसमें कहा गया कि आज संवैधानिक मूल्यों की बुनियाद के लिए खतरा पैदा हो गया है। हमारे संस्थानों पर भारी दबाव है। उनकी आजादी से समझौता हो रहा है।
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एक साथ लोकसभा-विधानसभा चुनाव भाजपा की चाल
पार्टी के प्रस्ताव में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने को भाजपा की चाल बताया गया है। पार्टी ने इस पर राष्ट्रीय सहमति बनाने की आवश्यकता पर बल दिया है। प्रस्ताव में चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी कुछ आशंकाएं जताई गई और कहा गया कि निर्वाचन की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग को मतपत्र के पुराने तरीके को फिर से लागू करना चाहिए।
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अधिवेशन में चुनाव के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के मैदान पर काम करने की जरूरत पर भी बल दिया गया। मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रस्ताव पेश करते हुए कर्नाटक से आए कार्यकर्ताओं से कहा कि उन्हें घर-घर जाकर वोटरों को तैयार करना होगा।
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राजनीतिक प्रस्ताव में महिला सशिक्तकरण, युवा, सामाजिक न्याय, दलितों, आदिवासियों एवं अल्पसंख्यकों पर अत्याचार, संघ-भाजपा, भ्रष्टाचार, आंतरिक और बाहरी सुरक्षा का बिगड़ता माहौल, आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा, न्यायपालिका, दसवीं अनुसूची, चुनाव संचालन, एक साथ चुनाव और मीडिया की निष्पक्षता और तानाशाही राज में आवाज को दबाने के प्रयास जैसे मुद्दों के जरिये केंद्र सरकार पर हमला बोला गया है। इसमें कहा गया कि आज संवैधानिक मूल्यों की बुनियाद के लिए खतरा पैदा हो गया है। हमारे संस्थानों पर भारी दबाव है। उनकी आजादी से समझौता हो रहा है।
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एक साथ लोकसभा-विधानसभा चुनाव भाजपा की चाल
पार्टी के प्रस्ताव में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने को भाजपा की चाल बताया गया है। पार्टी ने इस पर राष्ट्रीय सहमति बनाने की आवश्यकता पर बल दिया है। प्रस्ताव में चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी कुछ आशंकाएं जताई गई और कहा गया कि निर्वाचन की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग को मतपत्र के पुराने तरीके को फिर से लागू करना चाहिए।
भ्रष्टाचार पर भाजपा के दोहरे मापदंड
सोनिया गांधी
- फोटो : PTI
दलबदल करने वालों पर छह साल का बैन लगाएंगे
प्रस्ताव में दलबदल को लेकर भी चिंता जताई गई है। कहा गया है कि पार्टी राजनीतिक स्थिरता कायम करने के लिए धनबल के खुलेआम दुरुपयोग पर रोक लगाकर दल बदलुओं को छह साल के लिए किसी भी चुनाव से लड़ने से वंचित करेगी।
विधान मंडल के अध्यक्ष प्राय: विपक्षी विधायकों के खिलाफ सक्रिय होकर खुद की पार्टी के संबंधित लोगों को बचाने हुए ट्रिब्यूनल के तौर पर अधिकारों का दुरुपयोग करते हैं। इससे अध्यक्ष पद की विश्वनीयता पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
भ्रष्टाचार पर भाजपा के दोहरे मापदंड
प्रस्ताव में कहा गया है कि भाजपा भ्रष्टाचार के मामले में दोहरा मानदंड अपनाती है। भाजपा के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बाद भी कार्रवाई नहीं होती। उन्हें बचाया जा रहा है।
प्रस्ताव में सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले का हवाला देकर उन्हें देश से भगाने को आरोप लगाया गया है। इसमें कहा गया है कि देश के सामने आंतरिक और बाहरी सुरक्षा को लेकर गंभीर चुनौतियां हैं।
आतंकवाद के मुद्दे पर कांग्रेस सरकार के साथ खड़ी है लेकिन भाजपा इस पर राजनीति करती है, जिसकी पार्टी कड़ी भर्त्सना करती है।
प्रस्ताव में दलबदल को लेकर भी चिंता जताई गई है। कहा गया है कि पार्टी राजनीतिक स्थिरता कायम करने के लिए धनबल के खुलेआम दुरुपयोग पर रोक लगाकर दल बदलुओं को छह साल के लिए किसी भी चुनाव से लड़ने से वंचित करेगी।
विधान मंडल के अध्यक्ष प्राय: विपक्षी विधायकों के खिलाफ सक्रिय होकर खुद की पार्टी के संबंधित लोगों को बचाने हुए ट्रिब्यूनल के तौर पर अधिकारों का दुरुपयोग करते हैं। इससे अध्यक्ष पद की विश्वनीयता पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
भ्रष्टाचार पर भाजपा के दोहरे मापदंड
प्रस्ताव में कहा गया है कि भाजपा भ्रष्टाचार के मामले में दोहरा मानदंड अपनाती है। भाजपा के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बाद भी कार्रवाई नहीं होती। उन्हें बचाया जा रहा है।
प्रस्ताव में सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले का हवाला देकर उन्हें देश से भगाने को आरोप लगाया गया है। इसमें कहा गया है कि देश के सामने आंतरिक और बाहरी सुरक्षा को लेकर गंभीर चुनौतियां हैं।
आतंकवाद के मुद्दे पर कांग्रेस सरकार के साथ खड़ी है लेकिन भाजपा इस पर राजनीति करती है, जिसकी पार्टी कड़ी भर्त्सना करती है।
बताना होगा, कांग्रेस ने 70 साल में क्या किया
राहुल गांधी और सोनिया गांधी
- फोटो : PTI
बताना होगा, कांग्रेस ने 70 साल में क्या किया
खड़गे ने अपने संबोधन में कहा कि लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी जैसे नेताओं के सामने पीएम और भाजपा की ओर से पूछा जाता है कि 70 साल में कांग्रेस ने क्या किया।
हमें चुप रहने की बजाय डटकर बताना चाहिए कि आजादी के बाद देश में सुई भी नहीं बनती थी। जवाहर लाल नेहरू की दूरदर्शिता और योजनाओं से देश में डैम बने, हरित क्रांति हुई।
एम्स, आईआईटी, पब्लिक सेक्टर ने विकास किया। हमें ये बताने में कतई नहीं शर्माना चाहिए। कांग्रेस के गौरवपूर्ण इतिहास आंदोलन और इंदिरा गांधी, राजीव गांधी के बलिदान का हवाला देना चाहिए।
...ताकि शर्मिंदा न होना पड़े
कांग्रेस की टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस के प्रति नरम रुख के संकेत भी दिए। पार्टी ने आंध्र प्रदेश की विशेष दर्जे की मांग पर मुहर लगा दी है। प्रस्ताव में कहा गया है कि 20 फरवरी 2014 को डा. मनमोहन सिंह ने विशेष दर्जा देने की घोषणा की थी।
खड़गे ने अपने संबोधन में कहा कि लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी जैसे नेताओं के सामने पीएम और भाजपा की ओर से पूछा जाता है कि 70 साल में कांग्रेस ने क्या किया।
हमें चुप रहने की बजाय डटकर बताना चाहिए कि आजादी के बाद देश में सुई भी नहीं बनती थी। जवाहर लाल नेहरू की दूरदर्शिता और योजनाओं से देश में डैम बने, हरित क्रांति हुई।
एम्स, आईआईटी, पब्लिक सेक्टर ने विकास किया। हमें ये बताने में कतई नहीं शर्माना चाहिए। कांग्रेस के गौरवपूर्ण इतिहास आंदोलन और इंदिरा गांधी, राजीव गांधी के बलिदान का हवाला देना चाहिए।
...ताकि शर्मिंदा न होना पड़े
कांग्रेस की टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस के प्रति नरम रुख के संकेत भी दिए। पार्टी ने आंध्र प्रदेश की विशेष दर्जे की मांग पर मुहर लगा दी है। प्रस्ताव में कहा गया है कि 20 फरवरी 2014 को डा. मनमोहन सिंह ने विशेष दर्जा देने की घोषणा की थी।