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उदयपुर चिंतन शिविर: जिस शहर से कांग्रेस देख रही है देश जीतने का सपना, वहां कई बार चुनावों में हो चुका है सूपड़ा साफ!

Thu, 12 May 2022 08:19 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Thu, 12 May 2022 08:19 PM IST
सार

उदयपुर शहर विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार चार बार से चुनाव जीत रहे हैं। भाजपा के मुकाबले हमेशा से कांग्रेस का प्रत्याशी कमजोर होता है। 2019 में कांग्रेस से डॉ. गिरिजा व्यास को टिकट मिला, लेकिन बेहतर प्लानिंग नहीं होने से जातिगत समीकरण में कटारिया बाजी मार गए...

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Congress Party nav Sankalp Shivir organized in Udaipur, rajasthan from thursday onwards
कांग्रेस पार्टी नव संकल्प शिविर - फोटो : Agency

विस्तार

कांग्रेस गुरुवार से राजस्थान में चिंतन शिविर करने जा रही है। इसके लिए पार्टी ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। हालांकि जिस शहर में कांग्रेस सत्ता में वापसी करने के लिए मंथन करने जा रही है, उसी उदयपुर शहर में कांग्रेस की हालत बहुत खराब है। 1988 के बाद से पार्टी का कोई विधायक नहीं जीत सका है। जबकि 30 सालों में सिटी म्युनिसिपल कार्पोरेशन में कांग्रेस विपक्ष की भूमिका में है।

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दरअसल, एक समय उदयपुर का राजस्थान की राजनीति में डंका बजा करता था। आधुनिक राजस्थान के निर्माता कहे जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया जो 17 साल तक मुख्यमंत्री रहे, वे इसी शहर से लगातार तीन बार विधायक और एक बार सांसद चुने गए। पूर्व सीएम सुखाड़िया के बाद कांग्रेस नेता डॉ. गिरिजा व्यास उदयपुर सीट से तीन बार लोकसभा व एक बार विधानसभा चुनाव जीत चुकी हैं। लेकिन पार्टी की अंदरुनी गुटबाजी और लोकसभा—विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों के गलत चयन का नतीजा है कि कांग्रेस लगातार चार बार विधानसभा और दो बार लोकसभा चुनाव में हार चुकी है।
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म्युनिसिपल कारपोरेशन में 1995 से लेकर अब तक छह चुनावों में कांग्रेस एक बार भी अपना बोर्ड नहीं बना सकी। उदयपुर शहर विधानसभा सीट पूरी तरह से जैन बाहुल है। लेकिन कांग्रेस ने पिछले छह चुनावों में किसी जैन को प्रत्याशी नहीं बनाया। जातिगत समीकरण बैठाने की भी कोशिश नहीं की। यही सब कारण हैं, जिससे कांग्रेस का किला ढह गया और भाजपा ने अपना महल खड़ा कर लिया।
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ऐसे गिरता गया कांग्रेस का ग्राफ

उदयपुर शहर विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार चार बार से चुनाव जीत रहे हैं। भाजपा के मुकाबले हमेशा से कांग्रेस का प्रत्याशी कमजोर होता है। 2019 में कांग्रेस से डॉ. गिरिजा व्यास को टिकट मिला, लेकिन बेहतर प्लानिंग नहीं होने से जातिगत समीकरण में कटारिया बाजी मार गए। मोहनलाल सुखाड़िया की तीसरी पीढ़ी आ गई, लेकिन उनके परिवार के किसी सदस्य को कांग्रेस में तवज्जो नहीं दी गई। 1952 में पहली बार यहां रामराज्य परिषद विधानसभा चुनाव जीती थी। इसके बाद पांच बार कांग्रेस के विधायक चुने गए। इनमें तीन बार मोहनलाल सुखाड़िया जीते। एक बार गिरिजा व्यास तो एक बार त्रिलोक पूर्बिया विधायक बने। विधानसभा में भाजपा छह बार अपने विधायक उदयपुर शहर से बना चुकी है। जबकि आजादी के बाद से उदयपुर लोकसभा सीट से 11 बार सांसद चुने गए। इनमें पांच बार भाजपा ने इस सीट पर जीत हासिल की। एक बार जनसंघ और एक बार जनता पार्टी लोकसभा का चुनाव जीती थी।

चिंतन शिविर से पहले कांग्रेस ने उदयपुर को दी सौगात

इधर, चिंतन शिविर में हिस्सा लेने से एक दिन पहले गुरुवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत उदयपुर को दो बड़ी सौगातें देने की घोषणा की है। गुरुवार को सीएम शहर के गुलाबबाग में राजस्थान के पहले बर्ड पार्क का उद्घाटन करेंगे। इस बर्ड पार्क में पर्यटकों को एशियन, आस्ट्रेलियन, अफ्रिकन और अमेरिकन परिंदों के दीदार हो सकेंगे। इसमें कुल 28 प्रजातियों के पक्षियों को रखा गया है। इसके बाद उदयपुर संभाग के सबसे बड़े राजकीय महाराणा भूपाल अस्पताल में 34 करोड़ के कार्यों व नई मशीनों का लोकार्पण करेंगे।

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