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टीका संकट पर विपक्ष हमलावर, बोला- केंद्र अगर वैक्सीन दूसरे मुल्कों में नहीं भेजता तो एक साथ नहीं जलती इतनी चिताएं

Fri, 14 May 2021 06:47 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 14 May 2021 06:47 PM IST
सार

कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता शक्ति सिंह गोहिल ने प्रधानमंत्री मोदी को लेकर कहा, हमें याद है कि आपने एक बार कहा था कि 'गुजराती हूं, मेरे खून में है कारोबार', लेकिन लोगों की जान की कीमत पर कारोबार इस देश की परंपरा और संस्कार नहीं है...

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Congress party blamed PM Modi for Vaccine crisis in India, alleged his vaccine maitri program
शक्ति सिंह गोहिल - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

कोरोना संक्रमण से जंग करने के लिए भारत के पास पर्याप्त संसाधन मौजूद थे, लेकिन एक गलत रणनीति ने सारा काम बिगाड़ दिया। अमेरिका ने जब वैक्सीन बनाई तो कह दिया कि ये टीका देश से बाहर नहीं जाएगा। पहले अमेरिका के लोगों को वैक्सीन लगेगी। उसके बाद दूसरे देशों की मदद के लिए सोचा जाएगा। भारत ने समय रहते वैक्सीन बना ली, लेकिन मोदी सरकार ने उसे अपने लोगों को लगाने की बजाए दूसरों मुल्कों में भेज दिया। कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता शक्ति सिंह गोहिल यहीं पर नहीं ठहरे, उन्होंने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, केंद्र सरकार अगर वैक्सीन को दूसरे मुल्कों में नहीं भेजती तो एक साथ इतने लोगों के शवों का दाह संस्कार जैसा ह्रदय विदारक द्रश्य नहीं देखना पड़ता।

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गोहिल ने प्रधानमंत्री मोदी को लेकर कहा, हमें याद है कि आपने एक बार कहा था कि 'गुजराती हूं, मेरे खून में है कारोबार', लेकिन लोगों की जान की कीमत पर कारोबार इस देश की परंपरा और संस्कार नहीं है। लोगों की जान बचाने पर ध्यान दें, न कि अपने छवि निर्माण पर।

कई दिनों से विपक्षी नेता, वैक्सीन को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साध रहे हैं। कभी तो सरकार की तरफ से कहा जाता है कि वैक्सीन पर्याप्त संख्या में है। इसके बाद देश के विभिन्न हिस्सों में वैक्सीन लगवाने के लिए लोगों की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं। कभी बोला जाता है कि चार सप्ताह बाद दूसरी वैक्सीन लगेगी, तो कुछ दिन बाद कहते हैं कि अब तो छह से आठ सप्ताह का समय लगेगा। ये भी फाइनल नहीं था।

अब सरकार कह रही है कि कोविशील्ड लगवाने वाले को व्यक्ति को दूसरी डोज 12 से 16 सप्ताह में लगवानी चाहिए। लोग असमंजस में हैं कि एक सप्ताह में क्लीनिकल रिसर्च कैसे बदल जाती है। शक्ति सिंह गोहिल ने शुक्रवार को कहा, मोदी सरकार लोगों की जान से खिलवाड़ कर रही है। कोरोना वैक्सीन हर सौ की आबादी में डोज देने वाले देशों की प्रतिशत में हमारा देश भारत दुनिया के देशों में 77वें पायदान पर पिछड़ चुका है।  देश की संसद की स्टैंडिंग कमेटी ऑन हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर ने 16 अक्टूबर, 2020 को वैक्सीन को लेकर जो सुझाव दिए थे, भारत सरकार ने उनकी पूर्ण अनदेखी की है।

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जिन देशों ने कोरोना की वैक्सीन के डोज देने में अग्रिमता रखी है, वहां कोरोना संक्रमण की चेन टूटी है। जीवन रक्षा के साथ सामान्य स्थिति बनी हुई है। दुनिया के चार देश सेशेल्स, इजरायल, यूएई और सैंड मैरिनो ने अपनी 100 फीसदी आबादी को टीका लगाने में सफलता प्राप्त की है। वहीं यूके और अमेरिका से लेकर मालदीव तक कई देशों ने 80 फीसदी से ज्यादा आबादी को कोरोना का टीका लगाया है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि वैक्सीन बनाने की क्षमता में दुनिया में अव्वल देश, भारत केवल 10 फीसदी लोगों को ही वैक्सीन का पहला टीका लगा पाया है। अगर पूरे वैक्सीनेशन की बात करें तो केवल 2.7 फीसदी लोगों को ही वैक्सीन लग सकी है। यानी 100 की आबादी पर वैक्सीन की एक खुराक भी लें, तो भी हमारा देश 13 फीसदी के अंक को भी पार नहीं कर सका है। महामारी से जीतने के लिए वैज्ञानिकों का कहना है कि हमें पूरी जनसंख्या के 60 फीसदी से अधिक लोगों का टीकाकरण करना होगा। तभी कोरोना से बचाव संभव है।

प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यों को टीके का खुद इंतज़ाम करने के लिए कह दिया है। वो भी तब, जब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गई है। महामारी चारों ओर विकराल रूप से फैल चुकी है। सरकार को वैक्सीन कंपनियों पर दबाव बनाकर तीसरी लहर आने से पहले 60 प्रतिशत से अधिक लोगों को वैक्सीन लगानी होगी। तभी महामारी की चेन तोड़ी जा सकती है। ऑक्सीजन कंसंट्रेटर व रेमडेसिवीर इंजेक्शन इत्यादि पर जीएसटी लगाया जा रहा है। सरकार ने एंबुलेंस पर 28 फीसदी जीएसटी लगाया है। पहले तो करोड़ों डोज विदेशों को एक्सपोर्ट कर दी गई और अब उसी वैक्सीन के लिए आज हमारे देश के नागरिक दर दर की ठोकरें खा रहे हैं।

अमेरिका जैसे समृद्ध देश ने भी कोरोना वैक्सीन को लेकर एक पॉलिसी बनाई थी, ‘अमेरिका फर्स्ट’। दूसरी तरफ पीएम मोदी ने अपनी शोहरत के लिए लोगों की जान जोखिम में डाल दी। करीब 6.6 करोड़ वैक्सीन बाहर भेज दी गईं। उससे यहां अनगिनत जीवन बचाए जा सकते थे। हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए कि लोगों की जान बचाई जाए। शहरों से महामारी ने अब गांव का रुख कर लिया है। अगर 'शहंशाह' ने वक्त रहते अपना ध्यान निर्माणाधीन 'राजमहल' से हटाकर आम आदमी के घरों और गरीब के झोपड़े की तरफ नहीं किया तो अंतहीन तबाही होगी। संवेदनाओं के लिए शब्द कम पड़ेंगे। स्वर्णिम भारत का स्वप्न लाचार देशवासियों की बेबसी के साथ दफन हो जाएगा।

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