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अटल का भाषण सुनने 11 किलोमीटर पैदल जाते थे कांग्रेस के ये मंत्री
अमित शर्मा, नई दिल्ली
Updated Fri, 17 Aug 2018 08:38 PM IST
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दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रह चुके कांग्रेस नेता अशोक कुमार वालिया ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वे अद्भुत क्षमता के स्वामी थे।
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ऐसे व्यक्तित्व कभी-कभी ही जन्म लेते हैं। एक राजनीतिक पार्टी का हिस्सा होने के बाद भी दलगत राजनीति से ऊपर रहकर सर्वश्रेष्ठ स्तर की राजनीति कैसे की जा सकती है, इसे कोई अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन से सीख सकता है।
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शुक्रवार को अटल बिहारी के प्रति अपनी भावनाएं जाहिर करते हुए वालिया ने कहा कि विपक्षी दल के नेता होने के बाद भी दिल्ली सरकार को चलाने में, उसकी किसी योजना को आगे बढ़ाने में उनकी सरकार को कभी कोई मुश्किल नहीं आई।
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अपने बचपन में अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति को ताजा करते हुए अशोक कुमार वालिया ने कहा कि जब उनकी उम्र महज दस या बारह साल की थी, वे अटल बिहारी वाजपेयी का भाषण सुनने पैदल ही घर से ग्यारह किलोमीटर दूर दरियागंज के रामलीला मैदान जाया करते थे।
कांग्रेस नेता वालिया
यह अटल की भाषण शैली का असर था कि सामान्य जनता भी उनको सुनने को दौड़ पड़ती थी। उनकी वाणी में जोश था, गजब की राजनीतिक समझ थी और किसी भी विषय पर उनकी गहरी पकड़ हुआ करती थी। यही कारण है कि लोग मंत्रमुग्ध हो उन्हें सुनते थे।
पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर से कांग्रेस के विधायक रह चुके वालिया ने कहा कि उनके व्यवहार की सरलता और सबको एक साथ लेकर चलने की प्रतिबद्धता के कारण ही वे दो दर्जन पार्टियों को एक साथ लेकर अपने पूरी सरकार चलाने में सफल रहे, जबकि उनके पूर्व इस तरह के कई प्रयास पूरी तरह असफल साबित हो गए थे। उन्होंने कहा कि 1998 में वे (अशोक कुमार वालिया) शीला दीक्षित के सरकार में मंत्री बन चुके थे।
1999 में केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बन गई थी। यानी उसके बाद साल 2004 तक उन्हें केंद्र से अनेक मुद्दों पर लगातार सामंजस्य स्थापित करने की आवश्यकता होती थी। लेकिन इस बीच उन्हें कभी भी राजनीतिक कटुता नहीं देखने को मिली।
सबसे ज्यादा बढ़कर तो यह कि भाजपा शासित एमसीडी के तीन अस्पतालों को जब दिल्ली सरकार के अधीन लेने की जरूरत पड़ी, तब भी कहीं कोई परेशानी नहीं हुई। इससे यह साफ होता है कि अटल बिहारी वाजपेयी के लिए जनता का हित सबसे ऊपर था, वह भाजपा करे या कांग्रेस, इससे उन्हें बहुत फर्क नहीं पड़ता था।
पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर से कांग्रेस के विधायक रह चुके वालिया ने कहा कि उनके व्यवहार की सरलता और सबको एक साथ लेकर चलने की प्रतिबद्धता के कारण ही वे दो दर्जन पार्टियों को एक साथ लेकर अपने पूरी सरकार चलाने में सफल रहे, जबकि उनके पूर्व इस तरह के कई प्रयास पूरी तरह असफल साबित हो गए थे। उन्होंने कहा कि 1998 में वे (अशोक कुमार वालिया) शीला दीक्षित के सरकार में मंत्री बन चुके थे।
1999 में केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बन गई थी। यानी उसके बाद साल 2004 तक उन्हें केंद्र से अनेक मुद्दों पर लगातार सामंजस्य स्थापित करने की आवश्यकता होती थी। लेकिन इस बीच उन्हें कभी भी राजनीतिक कटुता नहीं देखने को मिली।
सबसे ज्यादा बढ़कर तो यह कि भाजपा शासित एमसीडी के तीन अस्पतालों को जब दिल्ली सरकार के अधीन लेने की जरूरत पड़ी, तब भी कहीं कोई परेशानी नहीं हुई। इससे यह साफ होता है कि अटल बिहारी वाजपेयी के लिए जनता का हित सबसे ऊपर था, वह भाजपा करे या कांग्रेस, इससे उन्हें बहुत फर्क नहीं पड़ता था।