प्रियंका गांधी की वो दास्तां सुन, कुछ देर के लिए पाठशाला बन गया था रामलीला मैदान
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दरअसल, प्रियंका गांधी ने रैली में उन्नाव की घटना का जिक्र इतनी भावुकता से किया कि वहां का माहौल ही बदल गया। इतना ही नहीं, उन्होंने इस घटना के दर्द को जब अपने जीवन से जोड़ते हुए यह कहा कि मैं 19 साल की उम्र में अपने पिता के छलनी शरीर को लेने गई थी, तो रामलीला मैदान चंद पल के लिए सुन्न सा हो गया।
भारत बचाओ रैली में कांग्रेस पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी ने जब बोलना शुरू किया, तो कार्यकर्ताओं में खासा जोश देखा गया। उन्होंने कश्मीर और देश के दूसरे हिस्सों का नाम लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला। आप लोग देश की आवाज बनें, सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ आपको बोलना होगा। तब तक कार्यकर्ता कांग्रेस पार्टी के नारे लगा रहे थे, तालियां पीट रहे थे, लेकिन इसके बाद प्रियंका गांधी ने जब वह दास्तां सुनानी शुरू की, तो रैली स्थल एक पाठशाला बन गया। प्रियंका ने यह दास्तां अपने पिता राजीव गांधी के नाम के साथ शुरू की।
वे बोलीं कि अवध में एक किसान जो कि मेरे पिता की उम्र के थे, किसानी के साथ साथ वे लोहार का कामकाज भी कर रहे थे। वह इसलिए क्योंकि उनकी पांच बेटियां और एक बेटा था। नोटबंदी में कामकाज ठप हो गया। अब परिवार का लालन-पालन तो करना ही था। बेटे को नौकरी के लिए दूसरे प्रदेश में जाना पड़ा। तीन बेटियों का ब्याह कर दिया। अब उनके पास दो बेटी और पोती रहती थीं। एक बेटी के साथ बलात्कार हो गया। न्याय पाने के लिए वह संघर्ष कर रही थी।
उसे सुबह चार बजे उठकर ट्रेन पकड़नी पड़ती, तो कभी किसी दूसरे साधन से वह अदालत या वकील के पास जाती थी। बलात्कार के आरोपियों ने उसे जला दिया। आग की लपटों के बीच वह एक किलोमीटर तक भागती रही और अंत में जब शरीर साथ छोड़ने लगा, तो गिर गई। बाद में उसकी मौत हो गई। प्रियंका गांधी ने यह दास्तां इतनी भावुकता से सुनाई कि रैली स्थल के कौने-कौने में सन्नाटा पसर गया। उन्होंने इससे आगे बोलते हुए कहा, मैं उस लड़की के घर गई थी। उसकी भाभी से मिली।उन्होंने ये सब मुझे बताया।
बच्ची बोली, वकील से बड़ा जो होता है, वही बनूंगी
कांग्रेस पार्टी महासचिव प्रियंका ने उस कहानी को आगे बढ़ाते हुए कहा, उस लड़की के घर में मौजूद पोती से मैने पूछा, बेटी बड़े होकर क्या बनोगी। वह चुप रही, उसने कोई जवाब नहीं दिया। मुझे लगा कि उसके सपने खो चुके हैं। मैने सोचा कि अब इस बच्ची से नहीं पूछा, तो जीवन में बहुत कुछ छूट जाएगा। मैंने धीमी आवाज में उससे दोबारा पूछा कि बेटी क्या बनोगी। वह बोली, वकील जो होता है न, उससे बड़ी बनूंगी। मैं जज बनूंगी।
यही वो दास्तां थी कि जिससे रामलीला मैदान का रैली स्थल खामोश हो गया था। इसके बाद प्रियंका गांधी ने एक बार फिर मोदी सरकार पर नागरिकता संशोधन कानून को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, संविधान को बचाने और देश को विभाजन से बचाने के लिए सभी आवाज उठाएं। यह देश प्रेम का देश है, अहिंसा का देश है, युवाओं के सपनों का देश है। हमें इस देश को बचाना है क्योंकि इस पर एक ऐसी सरकार का साया है जिसमें समानता नहीं है।
प्रियंका ने कहा, पहले पूरी दुनिया हमारी तरफ देख रही थी। विकास हो रहा था। आज भाजपा की सरकार में रोजगार बढ़ने की बजाय घट रहा है। महंगाई बढ़ रही है। छोटे और मझोले व्यापारी परेशान हैं। उन्होंने कहा, असलियत यह है कि यदि भाजपा है तो 45 साल में सबसे ज्यादा महंगाई मुमकिन है।