एनआरसी नहीं, भाजपा सरकार की प्रक्रिया के खिलाफ है कांग्रेस
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भाजपा भले ही हर रोज राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (एनआरसी) पर कांग्रेस का जवाब मांग रही हो, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने नेताओं को साफ निर्देश दे दिए हैं। कांग्रेस राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण के खिलाफ नहीं है। पार्टी की नाराजगी भाजपा सरकार द्वारा एनआरसी को तैयार की जाने वाली प्रक्रिया से है। पार्टी के एक महासचिव का कहना है कि कांग्रेस के बारे में भाजपा झूठ फैला रही है। भाजपा अध्यक्ष और उनके नेता देश को भ्रमित कर रहे हैं। सूत्र का कहना है कि भला इस देश की नागरिकता सूची से किसे एतराज हो सकता है।
राज्यसभा में सदन के उपनेता आनंद शर्मा भी यही कह रहे हैं। उनका कहना है कि राष्ट्रीय नागरिक पंजीकर (एनआरसी) पर उच्चतम न्यायालय, केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह तीनों सही नहीं हो सकते। उच्चतम न्यायालय के दिशानिर्देश, राजनाथ सिंह और अमित शाह के बयानों में भारी विरोधाभास है। शर्मा साफ आरोप लगाते हैं कि भाजपा अध्यक्ष देश को गुमराह कर रहे हैं।
सरकार के पास गिनाने को कुछ नहीं
आनंद शर्मा का कहना है कि केंद्र सरकार के कामकाज के करीब साढे चार साल बीत चुके हैं। देश की अर्थव्यवस्था चरमरा रही है, निवेश आ नहीं रहा है। देश के युवा रोजगार के गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। सरकार के पास विकास के नाम पर बताने के लिए कुछ नहीं है। ऐसे में भाजपा देश में बंटवारा कराकर वोटों के ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है।
आनंद शर्मा ने भाजपा अध्यक्ष की शैली पर भी सवाल उठाया। शर्मा ने कहा कि वह भाजपा अध्यक्ष हैं। उन्हें सदन में अपनी जिम्मेदारी का एहसास होना चाहिए। यह पूछे जाने पर अभी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस विषय पर कुछ नहीं बोला। पार्टी के वरिष्ठ नेता और राहुल गांधी के करीबी का कहना है कि वह इस मुद्दे पर बोलेंगे। अपनी राय भी रखेंगे, लेकिन सही जगह और सही समय पर बोलेंगे।
भाजपा को न दो मौका
बुधवार एक अगस्त को ममता बनर्जी ने यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी से भेंट किया था। ममता पहले मंगलवार से सोनिया गांधी से मिलने का समय मांग रही थी। मंगलवार (31 जुलाई) को वह शरद पवार से भी मिलीं। विपक्ष के कुछ और नेताओं से भी उनकी भेंट हुई। सबकी राय यही थी कि वह भाजपा को एनआरसी के मुद्दे को कम से कम उछालने का अवसर दें। सूत्र बताते हैं कि शरद पवार ने भी ममता को कुछ सहमत करने की कोशिश की।
कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने शीर्ष स्तर से मिले निर्देश के बाद ममता बनर्जी के गृह युद्ध और देश में रक्तपात होने जैसे बयान से किनारा कर लिया। बताते हैं कि सोनिया-राहुल-ममता की मुलाकात में भी इस विषय पर चर्चा हुई और ममता बनर्जी राय से सहमत नजर आईं। माना जा रहा है कि 11 अगस्त को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान इस सहमति का असर देखने को मिल सकता है।