{"_id":"5bc05e52bdec222e7c7b4944","slug":"congress-demands-money-from-former-mla-in-fake-sc-certificate-case","type":"story","status":"publish","title_hn":"कांग्रेस ने की फर्जी अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र मामले में पूर्व विधायक से धन वसूलने की मांग","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
कांग्रेस ने की फर्जी अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र मामले में पूर्व विधायक से धन वसूलने की मांग
भाषा, अगरतला
Updated Fri, 12 Oct 2018 02:11 PM IST
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त्रिपुरा उच्च न्यायालय द्वारा आरएसपी के पूर्व विधायक की याचिका खारिज किए जाने के बाद कांग्रेस ने उनसे वह धन लौटाने की मांग की है जो उन्होंने विधायक के रूप में प्राप्त किया था।
दरअसल राज्य सरकार ने अपनी एक जांच रिपोर्ट में कहा था कि विधायक का अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र फर्जी है। विधायक ने इस रिपोर्ट को त्रिपुरा उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के महासचिव रतन दास ने बृहस्पतिवार को कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि सरकार पार्थ दास से वेतन, भत्ते, पेंशन तथा अन्य खर्च वसूले जो उन्होंने विधायक के तौर पर लिए हैं।’’
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इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार मीरा दास को शालगढ़-ककराबन विधानसभा सीट से विजयी घोषित करने की भी मांग की, जहां से वह 2008 के चुनाव में पार्थ दास से हार गईं थीं।
गौरतलब है कि वाम मोर्चा के शासन के दौरान राज्यस्तरीय जांच समिति ने 2012 में अपनी रिपोर्ट में कहा था कि दास का अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र फर्जी है। इसके बाद दास ने इस रिपोर्ट को त्रिपुरा उच्च न्यायालय की एकल पीठ के समक्ष चुनौती दी थी और न्यायमूर्ति टी एन के सिंह ने उसी वर्ष उनकी याचिका खारिज कर दी थी।
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दरअसल राज्य सरकार ने अपनी एक जांच रिपोर्ट में कहा था कि विधायक का अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र फर्जी है। विधायक ने इस रिपोर्ट को त्रिपुरा उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
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प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के महासचिव रतन दास ने बृहस्पतिवार को कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि सरकार पार्थ दास से वेतन, भत्ते, पेंशन तथा अन्य खर्च वसूले जो उन्होंने विधायक के तौर पर लिए हैं।’’
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इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार मीरा दास को शालगढ़-ककराबन विधानसभा सीट से विजयी घोषित करने की भी मांग की, जहां से वह 2008 के चुनाव में पार्थ दास से हार गईं थीं।
गौरतलब है कि वाम मोर्चा के शासन के दौरान राज्यस्तरीय जांच समिति ने 2012 में अपनी रिपोर्ट में कहा था कि दास का अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र फर्जी है। इसके बाद दास ने इस रिपोर्ट को त्रिपुरा उच्च न्यायालय की एकल पीठ के समक्ष चुनौती दी थी और न्यायमूर्ति टी एन के सिंह ने उसी वर्ष उनकी याचिका खारिज कर दी थी।