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Electoral Bond: 'भाजपा ने करोड़ों रुपये का चंदा लिया, पर हमारे खाते सीज कर दिए', खरगे ने उठाई जांच की मांग

Fri, 15 Mar 2024 03:25 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Fri, 15 Mar 2024 03:25 PM IST
सार

खरगे ने कहा कि 'हमारे खाते बंद है और उनके खुले हुए हैं। ऐसे में बराबरी का मुकाबला कैसे होगा? हम इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हैं। जब तक सच बाहर न आए, तब तक उनके खाते भी सीज होने चाहिए।

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congress claim mismatch in electoral bonds entries of donor and recipient ask from sbi ec
चुनावी बॉन्ड्स पर उठे सवाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चुनाव आयोग ने गुरुवार को इलेक्टोरल बॉन्ड के आंकड़े सार्वजनिक कर दिए। कांग्रेस ने इन आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं और इलेक्टोरल बॉन्ड्स की एंट्री में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि चुनावी बॉन्ड से पैसे बनाए हैं और उन्होंने इसकी जांच कराने की मांग की। खरगे ने ये भी आरोप लगाया कि चुनाव के समय कांग्रेस पार्टी के बैंक खाते आयकर विभाग ने सीज कर दिए हैं, इससे चुनाव में बराबरी की लड़ाई कैसे होगी?
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खरगे ने लगाए आरोप
बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इलेक्टोरल बॉन्ड्स मामले पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि 'प्रधानमंत्री कहते हैं कि ना खाऊंगा और न खाने दूंगा। आज सुप्रीम कोर्ट ने इसका पर्दाफाश कर दिया है कि किस तरह से भाजपा ने चुनावी बॉन्ड से पैसे बनाए।' खरगे ने कहा कि 'कांग्रेस पार्टी के बैंक खाते सीज कर दिए गए हैं। उन्होंने (भाजपा) आयकर विभाग को ऐसा करने का निर्देश दिया। हमारे करीब 300 करोड़ रुपये जब्त हैं। ऐसे में हम चुनाव कैसे लड़ेंगे? हमारे खाते बंद है और उनके खुले हुए हैं। ऐसे में बराबरी का मुकाबला कैसे होगा? हम इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हैं। जब तक सच बाहर न आए, तब तक उनके खाते भी सीज होने चाहिए।' खरगे ने इलेक्टोरल बॉन्ड्स की 50 प्रतिशत से ज्यादा रकम सिर्फ भाजपा को मिलने पर गंभीर सवाल उठाए और इसकी जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और सच बाहर आना चाहिए। क्या चंदे के बदले कोई लाभ पहुंचाया गया। 
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कांग्रेस नेताओं ने इलेक्टोरल बॉन्ड्स पर उठाए ये सवाल
कांग्रेस के संचार विभाग के रिसर्च और मॉनिटरिंग शाखा के प्रभारी अमिताभ दुबे ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा किया। इस पोस्ट में कांग्रेस नेता लिखा कि 'इलेक्टोरल बॉन्ड योजना साल 2017 में शुरू की गई थी, लेकिन जो आंकड़े पेश किए गए हैं, वह अप्रैल 2019 से हैं। आंकड़ों में दानदाताओं की 18,871 एंट्री है, वहीं दान लेने वालों की एंट्री की संख्या 20,421 है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और चुनाव आयोग ये अनियमितता क्यों है?' अमिताभ दुबे की इस पोस्ट को कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर ने भी रि-पोस्ट किया है और एंट्री की गड़बड़ी पर सवाल उठाए। मणिकम टैगोर ने पोस्ट में लिखा कि मुझे नहीं लगता कि ये एक संयोग है। 
 
इस मुद्दे पर भी नाराजगी
चुनाव आयोग द्वारा जो आंकड़े सार्वजनिक किए गए हैं, उनमें बॉन्ड खरीदने वाले और इन बॉन्ड को भुनाने वालों के तो नाम हैं, लेकिन यह पता नहीं चलता कि किसने यह पैसा किस पार्टी को दिया? इलेक्टोरल बॉन्ड के खिलाफ याचिका दायर करने वाले एडीआर के वकील प्रशांत भूषण ने भी इस बात को उठाया है। इस मुद्दे को लेकर एडीआर फिर से सुप्रीम कोर्ट जा सकता है। 

क्या है चुनाव आयोग द्वारा सार्वजनिक किए गए आंकड़ों में
चुनाव आयोग ने गुरुवार को इलेक्टोरल बॉन्ड का डाटा अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दिया है। जो आंकड़ा सार्वजनिक किया गया है, उसमें 12 अप्रैल 2019 से 11 जनवरी 2024 तक का डाटा है। सूची में खुलासा हुआ है कि लॉटरी किंग सैंटियागो मार्टिन की कंपनी फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विस प्राइवेट लिमिटेड ने सबसे ज्यादा 1368 करोड़ रुपये का दान दिया है। फ्यूचर गेमिंग कंपनी के अलावा मेघा इंजीनियरिंग, क्विक सप्लाई चेन, वेदांता लिमिटेड, हल्दिया एनर्जी, भारती ग्रुप, एस्सेल माइनिंग, पश्चिम यूपी पावर कॉर्पोरेशन, केवेंटर फूड पार्क और मदनलाल लिमिटेड नामक कंपनियों ने सबसे ज्यादा कीमत के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे। भाजपा को इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए सबसे ज्यादा चंदा 6,060 करोड़ रुपये का चंदा मिला। भाजपा के बाद टीएमसी को 1609 करोड़ रुपये, कांग्रेस को 1421 करोड़ रुपये, बीआरएस को 1214 करोड़ रुपये, बीजद को 775 करोड़ रुपये और डीएमके को 639 करोड़ रुपये का चंदा मिला। 
 

चुनावी बॉन्ड योजना वैध रिश्वतखोरी- चिदंबरम
इस बीच, चुनावी बॉन्ड के आंकड़े सार्वजनिक होने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस दिन चुनावी बॉन्ड पेश किए गए थे, मैंने कहा था कि यह वैध रिश्वतखोरी है। मैं अब भी उस पर कायम हूं। चुनाव लोकतंत्र का त्योहार है, इसमें बहुत सारी बयानबाजी, गीत-नृत्य, भाषण होने चाहिए।  उन्होंने सब कुछ प्रतिबंधित कर दिया है।  उम्मीदवारों के लिए खर्च की बड़ी सीमा की अनुमति दें। इतनी कम रकम पर कोई भी चुनाव नहीं लड़ सकता और जीत नहीं सकता।
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