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Madhya Pradesh: कांग्रेस ने MP में दो साल में बदले चार प्रभारी, अब हरीश चौधरी के सामने खड़ी है ये चुनौतियां
Sat, 15 Feb 2025 05:49 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Sat, 15 Feb 2025 05:49 PM IST
सार
Congress: कांग्रेस पार्टी ने राजस्थान के ही भंवर जितेंद्र सिंह की जगह अब हरीश चौधरी को मध्य प्रदेश का प्रभारी का जिम्मा सौंपा है। भंवर जितेंद्र कुल 13 महीने ही मप्र के प्रभारी रहे। उन्हें मप्र विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला को हटाकर प्रदेश प्रभारी बनाया गया था।
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कांग्रेस नेता हरीश चौधरी
- फोटो : इंस्टाग्राम- harishchaudharyinc
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विस्तार
राजस्थान कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री हरीश चौधरी को कांग्रेस ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। पार्टी हाईकमान ने चौधरी को राजस्थान से सटे राज्य मध्यप्रदेश का प्रभारी नियुक्ति किया है। शुक्रवार 14 फरवरी की देर शाम को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की ओर से पार्टी के 9 वरिष्ठ नेताओं को अलग अलग राज्यों की जिम्मेदारी दी गई। इस सूची में हरीश चौधरी का नाम भी है। चौधरी वर्तमान में बाड़मेर जिले के बायतु से कांग्रेस के विधायक हैं। मध्य प्रदेश का प्रभारी बनाए जाने से चौधरी का कांग्रेस में कद और बढ़ गया है। चौधरी ने भी पार्टी हाईकमान को भरोसा दिलाया कि वह सबको साथ लेकर मध्यप्रदेश में संगठन को मजबूत करने का काम करेंगे।
कांग्रेस पार्टी ने राजस्थान के ही भंवर जितेंद्र सिंह की जगह अब हरीश चौधरी को मध्यप्रदेश का प्रभारी का जिम्मा सौंपा है। भंवर जितेंद्र कुल 13 महीने ही मप्र के प्रभारी रहे। उन्हें मप्र विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला को हटाकर प्रदेश प्रभारी बनाया गया था। जबकि सुरजेवाला को विधानसभा चुनाव 2023 के ठीक पहले वरिष्ठ नेता जेपी अग्रवाल की जगह प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया गया था। कांग्रेस मध्यप्रदेश में दो साल में चार प्रदेश प्रभारी बदल चुकी है। भंवर जितेंद्र विधानसभा चुनाव में स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष भी रहे हैं।
दरअसल, पूर्व मंत्री हरीश चौधरी को गांधी परिवार के काफी नजदीकी माना जाता हैं। इससे पहले चौधरी के पास पंजाब कांग्रेस का भी प्रभार रहा। चौधरी राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार में चौधरी कैबिनेट मंत्री थे। लेकिन 'एक व्यक्ति-एक पद' के अनुपालन में हरीश चौधरी ने मंत्री पद से इस्तीफे की पेशकश की थी। 19 नवंबर 2021 को चौधरी ने कैबिनेट मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। चौधरी वर्ष 2009 से 2014 तक वे बाड़मेर जैसलमेर से कांग्रेस के टिकट पर सांसद भी रहे हैं। चौधरी 2014 से 2019 तक एआईसीसी के राष्ट्रीय सचिव भी रह चुके हैं।
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नाम न छापने के अनुरोध पर मध्यप्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने अमर उजाला से कहा, मध्यप्रदेश कांग्रेस को पांच साल छठा प्रभारी मिला है। मध्यप्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी इस कदर हावी है कि कोई प्रभारी जब तक प्रदेश की राजनीति समझ पाता है उससे पहले वह खुद ही यहां से चला जाता है। दीपक बाबरिया के बाद मुकुल वासनिक, जेपी अग्रवाल, रणदीप सिंह सुरजेवाला, भंवर जितेंद्र सिंह और अब हरीश चौधरी को राज्य का प्रभारी बनाया गया है। चौधरी खुद 2023 के विधानसभा चुनाव में अपनी सीट मात्र 910 वोटों से जीते थे। हाल ही में महू में कांग्रेस पार्टी की एक बड़ी रैली हुई थी। इसमें राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी शामिल हुए थे। इस रैली में कांग्रेस पार्टी की गुटबाजी और अंतर्कलह खुलकर सामने आई थी। इसके चलते पार्टी ने अपने करीबी को प्रभारी बनाकर सारा नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की है।
वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई अमर उजाला से चर्चा में कहते है कि, विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव के बाद राज्य में कांग्रेस पार्टी की स्थिति बहुत खराब हो गई है। जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में बहुत असंतोष है। पार्टी में गुटबाजी चरम पर है। चौधरी के सामने पहले सभी गुटों को साधने के साथ कार्यकर्ताओं में उत्साह भरना और मोहन यादव सरकार के खिलाफ लड़ाई के लिए तैयार करना पहली चुनौती होगी। दूसरा यह कि मध्यप्रदेश का पिछड़ा वर्ग, एससी-एसटी और आदिवासी वर्ग कांग्रेस पार्टी का परंपरागत वोट बैंक रहा है। आज इस पर भाजपा का कब्जा है। ऐसे में इन वोटर्स को अपने पाले में लाने के लिए चौधरी को प्रयास करने होंगे। बड़े शहरों में कांग्रेसी नेताओं के आपसी विवाद इसके चलते कोई भी आंदोलन सफल नहीं हो पाता है। चौधरी को इन सभी विवादों को खत्म करने होंगे। यहीं नहीं राज्य के बड़े नेताओं का प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के साथ तालमेल बैठाना भी चौधरी के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा। क्योंकि कई बार यह देखने को मिला है कि राज्य के बड़े नेता प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी का समर्थन नहीं कर रहे है। वहीं पटवारी भी इन बड़े नेताओं के गुटों के नेताओं के दरकिनार कर चल रहे है। इससे पार्टी में अंतर्कलह की स्थिति बढ़ती जा रही है।
मध्यप्रदेश की जिम्मेदारी मिलने के बाद हरीश चौधरी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा मध्यप्रदेश के प्रभारी के रूप में नई जिम्मेदारी देने के लिए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और हमारे नेता राहुल गांधी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। मैं विश्वास दिलाता हूँ कि इस जिम्मेदारी का संगठन के प्रति समर्पित सोच के साथ निर्वहन करते हुए हम सभी मिलकर मध्यप्रदेश में संगठन को मजबूत करने का कार्य करेंगे।
हरीश चौधरी की गिनती मारवाड़ के दिग्गज नेताओं में होती है। वर्ष 1991 - 1992 में वे जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए थे। लंबे समय तक उन्होंने संगठन में काम किया और वर्ष 2009 में पार्टी हाईकमान ने उन्हें बाड़मेर जैसलमेर से लोकसभा चुनाव मैदान में उतारा। इस चुनाव में चौधरी ने जीत दर्ज की। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में वे विधायक बने और गहलोत राज में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया। नवंबर 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में भी हरीश चौधरी बायतु से विधायक बने।
राजस्थान में रंधावा प्रभारी पद पर बरकरार
कांग्रेस हाईकमान ने राजस्थान में सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा को प्रदेश प्रभारी पद पर बरकरार रखा गया है। रंधावा दिसंबर 2022 से राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी हैं। रंधावा को अजय माकन की जगह राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई थी। 25 सितंबर 2022 को जयपुर में कांग्रेस विधायक दल की बैठक में विधायक दल का नेता चुनने का एक लाइन का प्रस्ताव पारित नहीं हो पाया था। तत्कालीन सीएम अशोक गहलोत के समर्थक विधायकों ने नया नेता चुनने का प्रस्ताव पारित करने के लिए बुलाई गई बैठक का बहिष्कार किया था। इस पर विवाद हुआ। गहलोत समर्थक तीन नेताओं को नोटिस जारी हुए। उस समय अजय माकन प्रभारी थे। उनके साथ मल्लिकार्जुन खड़गे ऑब्जर्वर थे।
विधायक दल की बैठक में एक लाइन का प्रस्ताव पारित नहीं होने पर अजय माकन ने तल्ख कमेंट किए थे और कांग्रेस अध्यक्ष को रिपोर्ट दी थी। भरी विवाद के बीच दिसंबर में राहुल गांधी को भारत जोड़ो यात्रा राजस्थान से होकर गुजरनी थी। राहुल गांधी की यात्रा राजस्थान में आते ही अजय माकन की जगह रंधावा को राजस्थान प्रभारी की जिम्मेदारी दो थी। तब से रंधावा ही प्रभारी हैं।राजस्थान में काफी समय से प्रभारी बदलने की चर्चाएं थीं, परंतु इस बार भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। पहले मीनाक्षी नटराजन का नाम राजस्थान प्रभारी के तौर पर चला था, लेकिन उन्हें अब तेलंगाना प्रभारी की जिम्मेदारी दे दी गई है।
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कांग्रेस पार्टी ने राजस्थान के ही भंवर जितेंद्र सिंह की जगह अब हरीश चौधरी को मध्यप्रदेश का प्रभारी का जिम्मा सौंपा है। भंवर जितेंद्र कुल 13 महीने ही मप्र के प्रभारी रहे। उन्हें मप्र विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला को हटाकर प्रदेश प्रभारी बनाया गया था। जबकि सुरजेवाला को विधानसभा चुनाव 2023 के ठीक पहले वरिष्ठ नेता जेपी अग्रवाल की जगह प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया गया था। कांग्रेस मध्यप्रदेश में दो साल में चार प्रदेश प्रभारी बदल चुकी है। भंवर जितेंद्र विधानसभा चुनाव में स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष भी रहे हैं।
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दरअसल, पूर्व मंत्री हरीश चौधरी को गांधी परिवार के काफी नजदीकी माना जाता हैं। इससे पहले चौधरी के पास पंजाब कांग्रेस का भी प्रभार रहा। चौधरी राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार में चौधरी कैबिनेट मंत्री थे। लेकिन 'एक व्यक्ति-एक पद' के अनुपालन में हरीश चौधरी ने मंत्री पद से इस्तीफे की पेशकश की थी। 19 नवंबर 2021 को चौधरी ने कैबिनेट मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। चौधरी वर्ष 2009 से 2014 तक वे बाड़मेर जैसलमेर से कांग्रेस के टिकट पर सांसद भी रहे हैं। चौधरी 2014 से 2019 तक एआईसीसी के राष्ट्रीय सचिव भी रह चुके हैं।
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नाम न छापने के अनुरोध पर मध्यप्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने अमर उजाला से कहा, मध्यप्रदेश कांग्रेस को पांच साल छठा प्रभारी मिला है। मध्यप्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी इस कदर हावी है कि कोई प्रभारी जब तक प्रदेश की राजनीति समझ पाता है उससे पहले वह खुद ही यहां से चला जाता है। दीपक बाबरिया के बाद मुकुल वासनिक, जेपी अग्रवाल, रणदीप सिंह सुरजेवाला, भंवर जितेंद्र सिंह और अब हरीश चौधरी को राज्य का प्रभारी बनाया गया है। चौधरी खुद 2023 के विधानसभा चुनाव में अपनी सीट मात्र 910 वोटों से जीते थे। हाल ही में महू में कांग्रेस पार्टी की एक बड़ी रैली हुई थी। इसमें राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी शामिल हुए थे। इस रैली में कांग्रेस पार्टी की गुटबाजी और अंतर्कलह खुलकर सामने आई थी। इसके चलते पार्टी ने अपने करीबी को प्रभारी बनाकर सारा नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की है।
वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई अमर उजाला से चर्चा में कहते है कि, विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव के बाद राज्य में कांग्रेस पार्टी की स्थिति बहुत खराब हो गई है। जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में बहुत असंतोष है। पार्टी में गुटबाजी चरम पर है। चौधरी के सामने पहले सभी गुटों को साधने के साथ कार्यकर्ताओं में उत्साह भरना और मोहन यादव सरकार के खिलाफ लड़ाई के लिए तैयार करना पहली चुनौती होगी। दूसरा यह कि मध्यप्रदेश का पिछड़ा वर्ग, एससी-एसटी और आदिवासी वर्ग कांग्रेस पार्टी का परंपरागत वोट बैंक रहा है। आज इस पर भाजपा का कब्जा है। ऐसे में इन वोटर्स को अपने पाले में लाने के लिए चौधरी को प्रयास करने होंगे। बड़े शहरों में कांग्रेसी नेताओं के आपसी विवाद इसके चलते कोई भी आंदोलन सफल नहीं हो पाता है। चौधरी को इन सभी विवादों को खत्म करने होंगे। यहीं नहीं राज्य के बड़े नेताओं का प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के साथ तालमेल बैठाना भी चौधरी के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा। क्योंकि कई बार यह देखने को मिला है कि राज्य के बड़े नेता प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी का समर्थन नहीं कर रहे है। वहीं पटवारी भी इन बड़े नेताओं के गुटों के नेताओं के दरकिनार कर चल रहे है। इससे पार्टी में अंतर्कलह की स्थिति बढ़ती जा रही है।
मध्यप्रदेश की जिम्मेदारी मिलने के बाद हरीश चौधरी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा मध्यप्रदेश के प्रभारी के रूप में नई जिम्मेदारी देने के लिए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और हमारे नेता राहुल गांधी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। मैं विश्वास दिलाता हूँ कि इस जिम्मेदारी का संगठन के प्रति समर्पित सोच के साथ निर्वहन करते हुए हम सभी मिलकर मध्यप्रदेश में संगठन को मजबूत करने का कार्य करेंगे।
हरीश चौधरी की गिनती मारवाड़ के दिग्गज नेताओं में होती है। वर्ष 1991 - 1992 में वे जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए थे। लंबे समय तक उन्होंने संगठन में काम किया और वर्ष 2009 में पार्टी हाईकमान ने उन्हें बाड़मेर जैसलमेर से लोकसभा चुनाव मैदान में उतारा। इस चुनाव में चौधरी ने जीत दर्ज की। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में वे विधायक बने और गहलोत राज में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया। नवंबर 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में भी हरीश चौधरी बायतु से विधायक बने।
राजस्थान में रंधावा प्रभारी पद पर बरकरार
कांग्रेस हाईकमान ने राजस्थान में सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा को प्रदेश प्रभारी पद पर बरकरार रखा गया है। रंधावा दिसंबर 2022 से राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी हैं। रंधावा को अजय माकन की जगह राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई थी। 25 सितंबर 2022 को जयपुर में कांग्रेस विधायक दल की बैठक में विधायक दल का नेता चुनने का एक लाइन का प्रस्ताव पारित नहीं हो पाया था। तत्कालीन सीएम अशोक गहलोत के समर्थक विधायकों ने नया नेता चुनने का प्रस्ताव पारित करने के लिए बुलाई गई बैठक का बहिष्कार किया था। इस पर विवाद हुआ। गहलोत समर्थक तीन नेताओं को नोटिस जारी हुए। उस समय अजय माकन प्रभारी थे। उनके साथ मल्लिकार्जुन खड़गे ऑब्जर्वर थे।
विधायक दल की बैठक में एक लाइन का प्रस्ताव पारित नहीं होने पर अजय माकन ने तल्ख कमेंट किए थे और कांग्रेस अध्यक्ष को रिपोर्ट दी थी। भरी विवाद के बीच दिसंबर में राहुल गांधी को भारत जोड़ो यात्रा राजस्थान से होकर गुजरनी थी। राहुल गांधी की यात्रा राजस्थान में आते ही अजय माकन की जगह रंधावा को राजस्थान प्रभारी की जिम्मेदारी दो थी। तब से रंधावा ही प्रभारी हैं।राजस्थान में काफी समय से प्रभारी बदलने की चर्चाएं थीं, परंतु इस बार भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। पहले मीनाक्षी नटराजन का नाम राजस्थान प्रभारी के तौर पर चला था, लेकिन उन्हें अब तेलंगाना प्रभारी की जिम्मेदारी दे दी गई है।