सुरक्षा पर सियासत: एसपीजी हटाने पर भड़की कांग्रेस, कहा- सोनिया राहुल की जिंदगी से खेल रही सरकार
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कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी, उनके बेटे राहुल गांधी और बेटी प्रियंका गांधी की एसपीजी सुरक्षा हटाने के फैसले के साथ ही सियासत भी शुरू हो गई। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा, सरकार इस कदम से सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की जान के साथ खिलवाड़ कर रही है।
कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने कहा, मोदी सरकार बदले की राजनीति के निचले स्तर पर पहुंच गई है। राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने ट्वीट किया, भाजपा बहुत ओछी राजनीति पर उतर आई है। एसपीजी सुरक्षा सोच समझकर संसद के एक्ट के अंतर्गत दी गई थी। अगर गृहमंत्री अपने स्तर पर फैसला कर रहे हैं तो प्रधानमंत्री को चाहिए वह हस्तक्षेप करें और यदि प्रधानमंत्री की जानकारी में है तो यह देश का दुर्भाग्य है।
पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह ने भी केंद्र के इस कदम की निंदा की है। कांग्रेस ने दावा किया कि जब भी भाजपा सत्ता में आती है गांधी परिवार की सुरक्षा हट दी जाती है। ऐसा इंदिरा गांधी के साथ भी हुआ। जब भाजपा समर्थित वीपी सिंह की सरकार थी, तब भी ऐसा किया गया। सुरक्षा हटते ही कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के कार्यकर्ता गृहमंत्री अमित शाह के घर पर पहुंचे और जमकर नारेबाजी की।
एसपीजी ने खुद राहुल को खतरे की जानकारी दी थी
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि एसपीजी ने खुद राहुल गांधी को पत्र लिखकर बताया था कि उन्हें खालिस्तानी और इस्लामिक आतंकियों से खतरा है। एसपीजी ने ये पत्र पिछले साल 6 अगस्त व 6 नवंबर और इस साल 6 जून व 29 अगस्त 2019 को लिखे थे। सुरजेवाला ने कहा, पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह व्यक्तिगक्त नफरत, बदले की आग और राजनीतिक प्रतिशोध में इतने अंधे हो गए कि उन्हें कानून, संविधान और लोकतंत्र की मर्यादाओं की भी परवाह नहीं।
अगस्त से मनमोहन को एसपीजी सुरक्षा नहीं, देवेगौड़ा की पहले ही हट चुकी
यूपीए सरकार में प्रधानमंत्री रहे डॉ. मनमोहन सिंह की एसपीजी सुरक्षा केंद्र सरकार ने इस साल अगस्त में खत्म कर दी थी। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा की विशेष सुरक्षा पहले ही हट चुकी है।
एसपीजी कानून के तहत प्रधानमंत्री, पूर्व प्रधानमंत्री और उनके परिवार को यह सुरक्षा देने की व्यवस्था है। इसमें पूर्व प्रधानमंत्री के पद छोड़ने के एक साल बाद से उनके और परिवार वालों की सुरक्षा की समीक्षा की जाती है। उसी आधार पर फैसला होता है कि पूर्व प्रधानमंत्री और उनके परिवार को एसपीजी सुरक्षा जारी रखी जाए या खत्म कर दी जाए। कानून के मुताबिक अगर पूर्व प्रधानमंत्री चाहें तो एसपीजी सुरक्षा से इनकार भी कर सकते हैं।