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एसआईआर: कांग्रेस का बड़ा आरोप- 10 करोड़ वोटरों की जांच में सिर्फ 1600 विदेशी मिले; फिर क्यों कटे लाखों नाम?
Thu, 29 Oct 2026 12:19 PM IST
प्रशांत तिवारी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Thu, 29 Oct 2026 12:19 PM IST
सार
कांग्रेस ने एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि मतदाता सूची में संशोधन के नाम पर लोगों का वोट देने का अधिकार छीना जा रहा है। जबकि छह राज्यों में करीब 10 करोड़ लोगों की जांच के बाद केवल 1,600 संदिग्ध विदेशी नागरिकों की पहचान हुई।
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जयराम रमेश, कांग्रेस सांसद
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
कांग्रेस ने मतदाता सूची में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने इसकी साजिश रची और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इसे अंजाम दिया। कांग्रेस के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया का मकसद मतदाता सूची में गड़बड़ियां दूर करना नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को उनके वोट देने के संवैधानिक अधिकार से वंचित करना है। पार्टी ने SIR रोकने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी दोहराई है।
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छह राज्यों में 10 करोड़ लोगों की जांच, मिले सिर्फ 1,600 विदेशी
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने गुरुवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा की। इसके मुताबिक, कर्नाटक, झारखंड, मेघालय, केरल, गोवा और मिजोरम में SIR के दौरान अब तक करीब 1,600 विदेशी नागरिकों की पहचान की गई है। इन छह राज्यों में लगभग 10 करोड़ लोगों को इस प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। रमेश ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी कवायद के बाद विदेशी
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नागरिकों की इतनी कम संख्या सामने आने का क्या मतलब है।
गृह मंत्री के दावे पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
जयराम रमेश ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने SIR के तीन मुख्य उद्देश्य बताए थे। इनमें घुसपैठियों की पहचान करना, उनके नाम मतदाता सूची से हटाना और उन्हें देश से बाहर निकालना शामिल था। रमेश का सवाल है कि अगर यही इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य था, तो अब तक सामने आए आंकड़े क्या बताते हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के दावों और उपलब्ध आंकड़ों में बड़ा अंतर है। कांग्रेस ने यह भी कहा कि बाकी 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से ऐसा कोई आंकड़ा सामने नहीं आया, क्योंकि चुनाव आयोग ने इस संबंध में जानकारी जुटाने के निर्देश ही नहीं दिए थे।
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कर्नाटक में हटे 99.7 लाख नाम, 716 विदेशी नागरिक मिले
रमेश ने कर्नाटक का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां मतदाता सूची से करीब 99.7 लाख नाम हटाए गए। इनमें से 716 लोगों की पहचान विदेशी नागरिकों के रूप में हुई। उन्होंने बताया कि इन 716 लोगों में 545 नेपाल के नागरिक हैं। कांग्रेस का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के बावजूद विदेशी नागरिकों की संख्या बहुत कम है। पार्टी ने इसी आधार पर SIR की जरूरत, उसके तरीके
और उसके वास्तविक उद्देश्य पर सवाल खड़े किए हैं।
सीईसी के इस्तीफे और एसआईआर रोकने की मांग
कांग्रेस ने एक बार फिर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटने, एसआईआर की प्रक्रिया तत्काल रोकने और ईसीआईएनईटी पोर्टल में बड़े बदलाव करने की मांग की है। रमेश ने आरोप लगाया कि एसआईआर के जरिए आम नागरिकों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। हालांकि, ये कांग्रेस के आरोप हैं। चुनाव आयोग ने इस प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा है कि वह कानून के दायरे में काम कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में हलफनामे को लेकर भी विवाद
कांग्रेस ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग की ओर से दाखिल हलफनामे को धोखाधड़ी भरा और दोहरे मापदंड वाला बताया था। पार्टी का कहना है कि आयोग का जवाब उसके अपने लिए ही नुकसानदेह साबित हो सकता है। वहीं, चुनाव आयोग ने 248 पन्नों के हलफनामे में फॉर्म-6 में बदलाव के आरोपों को खारिज किया है। आयोग के मुताबिक, मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले इस कानूनी फॉर्म में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
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चुनाव आयुक्तों की असहमति पर भी उठे सवाल
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 महीनों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कम से कम 14 बार ऐसे फैसलों और आदेशों पर आपत्ति जताई, जिनका संबंध मुख्य रूप से SIR से था। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने कहा कि किसी भी संस्था में चर्चा के दौरान अलग-अलग राय सामने आना सामान्य बात है। आयोग का कहना है कि उसके सभी आदेश कानूनी रूप से वैध हैं और निर्धारित प्रक्रिया के तहत जारी किए गए हैं। इस तरह SIR को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है।