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Kargil War Vijay Diwas 2020: सूबेदार मेजर राजेंद्र सिंह की जुबानी ...संघर्ष से पता चला, पाक सेना कितनी कमजोर
Sun, 26 Jul 2020 12:32 PM IST
अवधेश कुमार
आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: अवधेश कुमार
Updated Sun, 26 Jul 2020 12:32 PM IST
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सूबेदार मेजर राजेंद्र सिंह
- फोटो : अमर उजाला
6 एनसीसी बटालियन में कार्यरत सूबेदार मेजर राजेंद्र सिंह उन जांबाजों में हैं, जिन्होंने पाकिस्तानी घुसपैठियों को कारगिल से भगाकर वहां फिर तिरंगा फहराया था। राजेंद्र का कहना है कि इसी युद्ध से उन्हें पता चला कि पाकिस्तान की सेना कितनी कमजोर है।
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सूबेदार मेजर सिंह बताते हैं, मेरी बटालियन तेरह कुमाऊं रेजांगला और हवास की टीम को सेना की तीन अलग-अलग टुकड़ियों के साथ तीन पोस्ट खाली कराने का जिम्मा सौंपा गया था। 27 जुलाई को सुबह की पहली किरण के साथ हमने 5810 की चढ़ाई शुरू की।
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हमें अंदाजा था कि दुश्मनों ने पत्थरों में भी बारूदी सुरंगें बिछाई होंगी। आशंका सही थी। एक बारूदी सुरंग से साथी सिपाही सुमेर सिंह का बायां हाथ उड़ गया। इसके बाद भी सुमेर सिंह और दूसरे साथियों का जोश कम नहीं हुआ। घंटों तक दुश्मन के साथ गोलाबारी होती रही। आधी रात से पहले ही हमने 5810 को कब्जे में ले लिया। 5880 रिंग कंटूर में हमने करीब 20 पाकिस्तानी घुसपैठियों को मार गिराया।
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फिर पॉइंट 5685 के लिए चढ़ाई शुरू कर दी। सूरज निकला ही था कि बारूदी सुरंगों ने हमारे पांच साथियों की जान ले ली। हमारे 12 और साथी शहीद हो गए। लेकिन जवाबी फायरिंग से पाकिस्तानी फौजियों के हौसले पस्त होने लगे और वे 5685 को छोड़कर भाग खड़े हुए।